हर साल 24 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस (International Day of Education) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 दिसंबर, 2018 को एक प्रस्ताव पारित कर इसकी घोषणा की थी। शांति और विकास में शिक्षा की भूमिका के सम्मान में इस दिन को सेलिब्रेट करने की शुरुआत हुई थी। हर साल इंटरनेशनल एजुकेशन डे एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल की थीम ‘शिक्षा के सह-निर्माण में युवाओं की शक्ति यानी The Power of Youth in Co-Creating Education’ है। इसी थीम पर हम आज बात करने जा रहे हैं 2 ऐसे युवाओं की जिन्होंने अपनी काबिलियत और क्षमता के आधार पर समाज को शिक्षित करने का प्रयास किया। 1. ‘नींव की ईंट’ फाउंडेशन चलाते हैं अंशु कोविड 19 के दौर के बाद की बात है। राज्य प्रवासी मजदूरों की बड़ी आमद से जूझ रहा था। इस दौरान पत्रकार अंशु कुमार जायसवाल ईंट भट्ठों पर गए और देखा कि अलग-अलग राज्यों से आए मजदूर ईंट भट्ठों पर काम करने के लिए मजबूर हैं। वहां उन्होंने प्रवासी परिवारों की जिंदगी को करीब से समझने की कोशिश की। बच्चों की कहानियां बार-बार पलायन, तनाव और बचपन को त्यागकर परिवार की मदद करने की मजबूरी से भरी थीं। यहीं से अंशु ने एक NGO के जरिए इन बच्चों को उनका बचपन लौटाने का फैसला किया। इसके अलावा, एंटी-स्लेवरी इंटरनेशनल (Anti-Slavery International) की रिपोर्ट ने भी उन्हें बहुत प्रभावित किया। रिपोर्ट के के मुताबिक, ईंट भट्ठों में 14 साल से कम उ?
अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2026: ईंट भट्ठों पर काम करने वाले बच्चों को ‘अंशु’ ने दी शिक्षा; ‘फरमान’ ने 1,000 से अधिक बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा प्रदान की
By worldprime
On: जनवरी 24, 2026 5:00 पूर्वाह्न
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