इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) पर आरोप है कि वह अपनी शीर्ष घरेलू प्रतियोगिता ‘डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग’ में ऐसे खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दे रहा है, जो इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखने वाले असली दिव्यांग क्रिकेटरों का रास्ता बंद हो रहा है। और एलेक्स जर्विस जैसे इंग्लैंड के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के माता-पिता ने यह मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि लीग में उनके बेटों की जगह ऐसे खिलाड़ियों ने एक अभिभावक का अनुमान है कि हालिया मसौदा ईसीबी की लर्निंग डिसेबिलिटी (एलडी) यानी ‘सीखने की अक्षमता’ के मेडिकल मानदंडों को पूरा ही नहीं करते हैं। चयनित 64 में से 12 खिलाड़ी बिना किसी दिव्यांगता के हैं। नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस श्रेणी में खेलने के लिए खिलाड़ी का आईक्यू 75 या उससे कम होना चाहिए। लेकिन आरोप है कि ईसीबी ने लीग में ऐसे कई खिलाड़ियों को शामिल कर लिया है, जो इस सख्त पैमाने पर खरे नहीं उतरते। इनमें से कई तो मुख्यधारा का पेशेवर क उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड की गेंदबाज एम्म अर्लोट, जिन्हें 2023 में ऑटिज्म और एडीएचडी डायग्नोस हुआ था, वे सामान्य क्रिकेट खेलती हैं। लीग इतिहास में सर्वश्रेष्ठ? इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) पर आरोप है कि वह अपनी शीर्ष घरेलू प्रतियोगिता ‘डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग’ में ऐसे खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दे रहा है, जो तय मानकों के अनुसार दिव्यांग नहीं हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखने वाले असली दिव्यांग क्रिकेटरों का रास्ता बंद हो रहा है। जय चरण और एलेक्स जर्विस जैसे इंग्लैंड के पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ियों के माता-पिता ने यह मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि लीग में उनके बेटों की जगह ऐसे खिलाड़ियों ने ले ली है, जो ईसीबी की लर्निंग डिसेबिलिटी (एलडी) यानी ‘सीखने की अक्षमता’ के मेडिकल मानदंड को पूरा ही नहीं करते हैं। एक अभिभावक का अनुमान है कि हालिया ड्राफ्ट में चुने गए 64 में से 12 खिलाड़ी बिना किसी दिव्यांगता के हैं। नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस श्रेणी में खेलने के लिए खिलाड़ी का आईक्यू 75 या उससे कम होना चाहिए। लेकिन आरोप है कि ईसीबी ने लीग में ऐसे कई खिलाड़ियों को शामिल कर लिया है, जो इस सख्त पैमाने पर खरे नहीं उतरते। इनमें से कई तो मुख्यधारा का पेशेवर क्रिकेट खेलते हैं। उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड की गेंदबाज एम्म अर्लोट, जिन्हें 2023 में ऑटिज्म और एडीएचडी डायग्नोज हुआ था, वो सामान्य क्रिकेट खेलती हैं। इस गड़बड़ी का सीधा असर होनहार खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। लीग इतिहास में सर्वश्रे? इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) पर आरोप है कि वह अपनी शीर्ष घरेलू प्रतियोगिता ‘डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग’ में ऐसे खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दे रहा है, जो तय मानकों के अनुसार दिव्यांग नहीं हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखने वाले असली दिव्यांग क्रिकेटरों का रास्ता बंद हो रहा है। जय चरण और एलेक्स जर्विस जैसे इंग्लैंड के पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ियों के माता-पिता ने यह मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि लीग में उनके बेटों की जगह ऐसे खिलाड़ियों ने ले ली है, जो ईसीबी की लर्निंग डिसेबिलिटी (एलडी) यानी ‘सीखने की अक्षमता’ के मेडिकल मानदंड को पूरा ही नहीं करते हैं। एक अभिभावक का अनुमान है कि हालिया ड्राफ्ट में चुने गए 64 में से 12 खिलाड़ी बिना किसी दिव्यांगता के हैं। नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस श्रेणी में खेलने के लिए खिलाड़ी का आईक्यू 75 या उससे कम होना चाहिए। लेकिन आरोप है कि ईसीबी ने लीग में ऐसे कई खिलाड़ियों को शामिल कर लिया है, जो इस सख्त पैमाने पर खरे नहीं उतरते। इनमें से कई तो मुख्यधारा का पेशेवर क्रिकेट खेलते हैं। उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड की गेंदबाज एम्म अर्लोट, जिन्हें 2023 में ऑटिज्म और एडीएचडी डायग्नोज हुआ था, वो सामान्य क्रिकेट खेलती हैं। इस गड़बड़ी का सीधा असर होनहार खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। लीग इतिहास में सर्वश्रे?
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड पर गंभीर आरोप: डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग के मैचों में दिव्यांग खिलाड़ी तो पानी पीला रहे, जो दिव्यांग न हों वे खेलने उतरे
By worldprime
On: अप्रैल 2, 2026 1:26 अपराह्न
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