बातचीत में अ… ऊं…, जैसे फिलर शब्द अक्सर आदत में आ जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये शब्द हमेशा अनावश्यक नहीं होते। कई बार ये दिमाग को सोचने का वक्त देते हैं और सामने वाले को संकेत देते हैं कि बात अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन इनका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल यह महसूस करा सकता है कि बोलने वाला कम तैयार है, जिससे उसकी विश्वसनीयता घटती है। हम इन्हें फिलर कहकर बेकार मान लेते हैं, क्योंकि फिलर शब्द सुनते ही लगता है कि यह गैर-जरूरी चीज है। फिलर शब्द के इस्तेमाल से बचाव के 4 तरीके 1. खुद को बोलते हुए रिकॉर्ड करें खुद को सुनना/देखना असहज लग सकता है, लेकिन इससे पता चलता है कि आप कौन से फिलर शब्द, कहां और कितनी बार बोलते हैं। जब तक यह साफ नहीं होगा, आप बस अंदाज से सुधार करते रहेंगे। 2. दोस्त से सीधा फीडबैक लें किसी करीबी दोस्त से पूछें कि क्या मेरे बोलते समय कोई खास फिलर शब्द बार-बार इस्तेमाल होता है? जवाब उपयोगी है। एक्सपर्ट हेस कहती हैं, जागरुकता ही आदत बदलने का पहला कदम है। 3. बोलने की गति धीमी करें बहुत तेज बोलना फिलर बढ़ाता है। हेस के मुताबिक, तेज स्पीड में दिमाग और मुंह तालमेल बैठाने में फिलर शब्द निकल जाते हैं। जानबूझकर कम गति से बोलेंगे तो खाली जगह भरने की मजबूरी कम होगी। 4. जोर से बोलकर अभ्यास करें बोलने की तैयारी सिर्फ सोचकर नहीं, बल्कि बोलकर करनी चाहिए। जब जो?
इंटरव्यू-मीटिंग में ‘अ… ऊं…’ जैसे शब्दों से घटता है आत्मविश्वास:विशेषज्ञ बोले- बोलचाल में ‘फिलर’ शब्दों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल जानकारी की कमी का संकेत
By worldprime
On: फ़रवरी 22, 2026 2:25 अपराह्न
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