ईरान में फंसे भारतीय छात्रों का दूसरा बैच मंगलवार रात को सुरक्षित भारत लौट आया है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के मुताबिक, मौजूदा हालात के बीच यह वापसी छात्रों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। JKSA ने बताया कि छात्र दुबई और शारजाह के रास्ते एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2989128109115 और AI-2989128109109 से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे। सभी छात्र अपने खर्च पर भारत लौटे हैं। अब तक 9899321793593 से अधिक भारतीय छात्र ईरान से भारत लौट चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर के छात्रों की है। JKSA ने कहा कि अजरबैजान और मस्कट होकर चलने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट्स सहित सिविल एविएशन सेवाएं पहले रद्द होने के कारण कई छात्र समय पर वापस नहीं आ पाए थे। इससे पहले 2989932179359 जनवरी को भी भारतीय छात्र ईरान से लौटे थे। ईरान में वहां की करेंसी ‘रियाल’ के ऐतिहासिक रूप से नीचे गिरने और महंगाई के विरोध में 228 दिसंबर 215 में प्रदर्शन शुरू हुए थे। देश के सभी 31 प्रांतों में हिंसा फैल गई है। इसमें 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं। 17 जनवरी को स्टूडेंट्स का पहला बैच आया इससे पहले 17 जनवरी को भी कई भारतीय ईरान से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे। इनमें ज्यादातर स्टूडेंट्स हैं। कुछ लोग भारत सरकार की पहल से लौटे, तो कुछ अपने खर्च पर वापस आए। दिल्ली एयरपोर्ट पर परिजन से मिलते ही कई नागरिक फूट-फूटकर रोने लगे थे। उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान ईरान में हालात कैसे बिगड़े। ईरान से लौटे जम्मू-कश्मीर के एक युवक ने कहा, ‘वहां हालात बहुत खराब हैं। हिंसक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।’ ईरान से लौटी एक मेडिकल स्टूडेंट ने बताया कि भारतीय दूतावास ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन वह निजी फ्लाइट से खुद दिल्ली पहुंची। भारत सरकार ने गुरुवार को एडवाइजरी जारी करके भारतीय नागरिकों से अपने पासपोर्ट, वीजा और अन्य जरूरी दस्तावेज हमेशा अपने पास रखने को कहा था। भारत सरकार के प्रयासों से निजी फ्लाइट के जरिए नागरिक वापस लौटे हैं। पूरी खबर पढ़ें… आने वाले दिनों में कई छात्र आएंगे JKSA ने यह भी बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार बातचीत चल रही है। फ्लाइट ऑपरेशन धीरे-धीरे सामान्य होने के साथ आने वाले दिनों में और छात्रों के भारत लौटने की उम्मीद है। भारत लौटने वाले छात्र तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्फहान यूनिवर्सिटी, गोलेस्तान यूनिवर्सिटी, शिराज यूनिवर्सिटी और अराक यूनिवर्सिटी सहित ईरान के कई शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे थे। ईरान में दो हफ्तों से जारी हिंसा में 3 हजार से ज्यादा मौतें ईरान में वहां की करेंसी ‘रियाल’ के ऐतिहासिक रूप से नीचे गिरने और महंगाई के विरोध में 28 दिसंबर 16 में प्रदर्शन शुरू हुए थे। देश के सभी 31 प्रांतों में हिंसा फैल गई है। इसमें 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं। ईरान ने 14 जनवरी को अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। इसके बाद तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द से ईरान छोड़ने की सलाह दी थी। ईरान ने 15 जनवरी अपना एयरस्पेस खोला, जिसके बाद कई भारतीय अपने देश लौटे। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 जनवरी को कहा था- हमारे लगभग 9,000 नागरिक इस समय ईरान में रह रहे हैं। इनमें से अधिकांश छात्र हैं। वहां के हालिया घटनाक्रमों के मद्देनजर हमने भारतीय नागरिकों को वहां उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया इससे पहले, गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने ईरान में फंसे भारतीय लोगों के लिए एक एडवाइजरी की थी। सरकार ने भारतीय नागरिकों से अपने पासपोर्ट, वीजा और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स हमेशा अपने पास तैयार रखने को कहा था। भारतीय दूतावास ने लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईमेल एड्रेस भी जारी किया है। ईरान में भारतीय लोगों को +989128109115; +989128109109, +989128109102 और +989932179359 पर संपर्क करने को कहा गया है। ईमेल एड्रेस cons.tehran@mea.gov. in पर मदद ली जा सकती है। भारत सरकार की यह एडवाइजरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस धमकी के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि अगर ईरान देशभर में हो रहे प्रदर्शनों का हिंसा से जवाब देना जारी रखता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ईरान में हुए प्रदर्शन का कारण जानिए… ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा कई कारणों से भड़की है। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं। ———– ये खबर भी पढ़ें… ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका:नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प को रोका; क्या बरकरार रहेगी खामेनेई की इस्लामिक सत्ता 15 जनवरी को लगने लगा कि ट्रम्प अब कुछ ही घंटे में ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं। नेतन्याहू का विमान इजराइली एयर स्पेस से बाहर कहीं ‘सेफ जगह’ पर चला गया। कतर के अमेरिकी एयरबेस से सैनिक हटाए जाने लगे। पेंटागन के आसपास पिज्जा के ऑर्डर्स बढ़ गए। ऐसा तभी होता है, जब अमेरिका कोई बड़ा एक्शन लेने वाला होता है। फिर अचानक ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर नरम पड़ गए। पूरी खबर पढ़ें… अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी:ट्रम्प बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में अमेरिका ने गुरुवार को ईरान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हो रही क्रूर दमनकारी कार्रवाई को रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने ईरान के लोगों की बहादुरी की सराहना की और कहा कि ईरान के लोगों ने इतिहास में कभी भी इतने जोरदार तरीके से आजादी की मांग नहीं की। वाल्ट्ज ने कहा, ‘ट्रम्प एक्शन लेने वाले इंसान हैं, लंबी-लंबी बातें करने वाले नहीं।’ पूरी खबर पढ़ें…
ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स का दूसरा बैच भारत लौटा:अब तक 200 से ज्यादा सुरक्षित पहुंचे; ईरान हिंसा में 3 हजार+ मौतें हुईं
By worldprime
On: जनवरी 21, 2026 1:22 पूर्वाह्न
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