31 मार्च को ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। ये सम्मान 2021 में प्रकाशित उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिला है। ममता कालिया हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका हैं। उनके चर्चित उपन्यासों में ‘बेघर’, ‘दुक्खम-सुक्खम’, ‘नरक दर नरक’, ‘प्रेम कहानी’ और कहानियों में ‘दूसरा देवदास’, ‘आपकी छोटी लड़की’, ‘छुटकारा’, ‘एक अरद औरत’, ‘सीट नंबर छह’, ‘बोलने वाली औरत’ शामिल हैं। साथ ही ‘कितने प्रश्न करूं’ और ‘खांटी घरेलू औरतें’ उनकी चर्चित कविताएं हैं। नुक़्ता और अनुस्वार की गलतियों पर चिढ़ जाने वाली ममता मीडिल क्लास, स्त्री-पुरुष सम्बंध, उनके अन्तर्मन की बातें और कामकाजी महिलाओं के संघर्ष पर बेबाकी से लिखती आई हैं। नवंबर 1940 में उत्तर प्रदेश के मथुरा में जन्मीं ममता कालिया का बचपन शहर दर शहर घूमते बीता। दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, नागपुर और इंदौर जैसे शहरों में पली-बढ़ीं। पिता विद्याभूषण अग्रवाल सरकारी अधिकारी थे, तो उनकी पोस्टिंग के साथ हर दो-ढ़ाई साल में शहर बदलते रहे। ममता भी खुद को ‘सरकारी बंजारा’ कहती हैं। परिवार में माता-पिता के अलावा ये दो बहनें थीं। ममता छोटी थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन पढ़ने, नाचने-गाने, सबमें अव्वल थी। उनके साथ की और लड़कियों के पास भी कई हुनर थे, लेकिन खुद उनके पास बस कागज-कल?
कवियित्री से कहानीकार बनीं ममता कालिया को साहित्य अकादमी मिला:लेखक का गुरूर तोड़ने को गद्य लिखा, 11 महीने बाद उसी से शादी की; जानें प्रोफाइल
By worldprime
On: अप्रैल 1, 2026 12:18 अपराह्न
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