तमिलनाडु के सथानकुलम में पिता-बेटे की कस्टोडियल मौत मामले में 6 साल बाद 6 अप्रैल को मदुरै कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई। इस पूरे मामले में हेड कांस्टेबल रेवती (43) का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। पुलिस हिरासत में पिता-बेटे की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले को दबाने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन रेवती की गवाही ने सच सामने ला दिया। रेवती दो बेटियों की मां है। उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट से कहा कि वह पूरा सच बताएंगी, लेकिन अपने बच्चों और नौकरी की सुरक्षा की गारंटी चाहती हैं। रेवती की बहादुरी और सच्चाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने इस केस को मुकाम तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने कोर्ट में मिनट-दर-मिनट घटनाक्रम बताया, जिससे यह साबित हुआ कि थाने में क्या हुआ और कौन जिम्मेदार था। पढ़िए पूरा मामला… घटना जून 2020 की है। जब पूरी दुनिया कोविड की बंदिशों से जूझ रही थी। थूथुकुडी जिले के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में ऐसा कुछ हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स को इसलिए हिरासत में लिया गया क्योंकि उन्होंने मोबाइल शॉप तय समय से कुछ देर ज्यादा खुली रखी थी। कांस्टेबल रेवती ने कोर्ट को बताया, ‘मैं रात करीब 8:50 बजे स्टेशन पहुंची। उसी समय, अंदर से चीखने और रोने की आवाज आई, कोई चिल्ला रहा था ‘अम्मा, दर्द हो रहा है! जाने दो! प्लीज मुझे जाने दो! मैंने कुछ गलत नहीं किया! ‘ लहूलुहान होने तक पीटा, निजी अंगों पर जूतों से वार किया रेवती ने बताया,’बीच-बीच में सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन की आवाज सुनाई दे रही थी,’तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई स्टेशन के अंदर हंगामा करने की? तुम कोई बड़े आदमी हो?
कांस्टेबल रेवती की गवाही से 9-पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा:तमिलनाडु में बाप-बेटे की कस्टोडियल मौत का सच बताया था; नौकरी तक दांव पर लगाया
By worldprime
On: अप्रैल 9, 2026 5:02 पूर्वाह्न
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