’19 साल के बाद, मैं अचानक अपने ही घर में ‘प्रोबेशन’ पर आ गई, विश्वविद्यालय में पढ़ाने लगी, तिब्बत पर एक उपन्यास लिखने के लिए सुबह 3 बजे उठती, ताकि कीबोर्ड की आवाज़ फिर भी उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई…’ ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय मूल की लेखिका दीपा अनप्पारा कहती हैं, पति ने कहा कि वे तलाक चाहते हैं, मैंने अपनी बहन को सात महीने पहले ही खो दिया था। मैं किसी नए आघात के लिए तैयार नहीं थी। बहुत कोशिशों के बाद भी रिश्ता नहीं बचा। शांति की तलाश में कैलाश परिक्रमा पर निकला इस यात्रा ने मेरे जीवन को एक नया अर्थ दिया, जानिए कैसे… ‘इस टूटने के बीच… कुछ दिनों बाद मैं तिब्बत में 18,471 फीट ऊंचे डोल्मा दर्रे की चढ़ाई पर खड़ी थी। हवा में इतनी चुभन थी कि हर सांस उधार जैसी लग रही थी। अगस्त 2023 के उसी दिन मेरी शा मेरे कानों में मेरे पति के शब्द गूंज रहे थे… ‘तुम भी बरसों से दुखी हो, मैं भी बरसों से, अलग होना ही बेहतर है.’ अचानक गाइड की आवाज़ ने मुझे झकझोर दिया… उसने मुस्कुराते हुए कहा, “डॉल्मा दर्रे तक पहुँचने के लिए टट्टू किराए पर लो। भारतीय ट्रैकिंग में अच्छे नहीं होते हैं,’ मुझे यह रूढ़िवादिता तोड़ दो। मनाली में एक टट्टू पर बैठकर यात्रा पूरी की थी। इस बार मैंने तय किया था कि मैं पैदल ही जाऊँगी। चढ़ाई कठिन थी। फेफड़े जल रहे थे, दिल पिंजरे में फड़फड़ाते पक्षी की तरह
कैलाश परिक्रमा में आत्मा को मिला अनंत सुकून: भारतीय मूल की लेखिका कहती है – बहन की मौत ने तोड़ दिया था; 18000 फीट पर एकांत ने सिखाया – रिश्ते खत्म होते हैं, इंसान नहीं स्त्री
By worldprime
On: फ़रवरी 22, 2026 12:48 अपराह्न
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