दिल्ली / रायपुर : छत्तीसगढ़ में “खाकी और खादी” की राजनीति को लेकर पुलिस मुख्यालय में गहमागहमी तेज़ है,अगला डीजीपी परंपरागत रूप से रबर स्टाम्प और निष्क्रिय होगा या फिर प्रभावशील ? आखिर कौन बनेगा डीजीपी ? इसे लेकर जहाँ चर्चाओं का दौर जारी है,वही चयन प्रक्रिया में राजनीति भी उफ़ान पर है| पुलिस मुख्यालय और DGP की कुर्सी सियासी रणभूमि में तब्दील नजर आ रही है | कहा जा रहा है,कि दिनों-दिन लचर हो रही प्रदेश की कानून व्यवस्था को चाक-चौकस और जवाबदेही पूर्ण बनाने के लिए एक अदद डीजीपी की तलाश शुरू हो गई है| इस फेहरिस्त में चार अधिकारियों का नाम सामने आने के बाद एक नया विवाद छिड़ गया है | इसे प्रशासनिक हलकों में “अँधा कानून” की संज्ञा दी जा रही है| मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश की बीजेपी सरकार के लगभग ढाई साल के कार्यकाल में कानून पर उठे बड़े सवालों के पीछे पुलिस महकमे की नाकामी सामने आई है| मैदानी इलाको से लेकर पुलिस मुख्यालय तक वर्दी में अपराधों का नया सिलसिला शुरू होने से बीजेपी सरकार की प्रशासनिक कार्यक्षमता पर राज्य में नई बहस छिड़ गई है|कयास लगाया जा रहा है,कि प्रदेश को जल्द ही प्रभारी के बजाए स्थाई डीजीपी मुहैया कराया जाएगा इसके लिए सत्ता गलियारों से लेकर सचिवालय तक सरगर्मियां तेज़ बताई जाती है| छत्तीसगढ़ में DGP पद को लेकर गरमाई सियासत ?
छत्तीसगढ़ में अंधा कानून ! बेलगाम कानून व्यवस्था मजबूरी ? डीजीपी की कुर्सी पर जीपी सिंह जरुरी,सत्ता-सिस्टम और कानून व्यवस्था पर संकट…
By worldprime
On: अप्रैल 12, 2026 6:13 अपराह्न
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