शरीर को स्वस्थ कार्य करने के लिए 37 डिग्री सेल्सियस के तापमान की आवश्यकता होती है। गर्मियों में तापमान बढ़ने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए लगातार पसीना बहाता है। सीने में आने पर पानी के साथ जरूरी मिनरल्स भी निकल जाते हैं। तापमान बहुत ज्यादा होने पर शरीर के कूलिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। यह थकान, चक्कर आना और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं का कारण बनता है। कुछ बुनियादी ग्रीष्मकालीन नियमों का पालन करके हम प्राकृतिक तरीके से शरीर की शीतलन प्रणाली का समर्थन कर सकते हैं इसलिए आपात खबर में आपको पता चलेगा कि विशेषज्ञ डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर प्रश्न – बाहर का तापमान बढ़ने से शरीर को कैसे नुकसान होता है? ऐसे में शरीर को अंदर से ठंडा रखना क्यों जरूरी है? उत्तर: जब शरीर बहुत गर्म या गर्म हो जाता है, तो शरीर का शीतलन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता है। इससे शरीर का गर्मी बाहर नहीं निकल पाता और शरीर अति गरम हो जाता है। इससे शरीर को कई तरह के नुकसान होते हैं – शरीर अपनी हीट को बाहर नहीं निकाल पाता और अंदर ही गर्म हो जाता है, जिससे पूरे सिस्टम पर असर पड़ता है। रनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. रोहित शर्मा ने बताया कि शरीर को अंदर से ठंडा रखना क्यों जरूरी है – प्रश्न – गर्मियों के मौसम में शरीर को अंदर से ठंडा रखना?
जरूरी खबर- गर्मियों में शरीर को ठंडा कैसे रखें: हीट स्ट्रोक से बचें, समर कूलिंग के 4 बेसिक रूल्स फॉलो करें, 9 गलतियां न करें
By worldprime
On: अप्रैल 12, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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