बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं. ये सीजन आते ही लाखों घरों में पाठ्यक्रम, टेस्ट सीरीज, रिवीजन प्लान और रिजल्ट की चिंता का माहौल बन जाता है। तनाव होना सामान्य है, लेकिन जब इसका दबाव दिमाग और शरीर दोनों पर लगातार असर डालता है, तो यह गंभीर समस्या बन सकती है। एडोलेंट हेल्थ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, 15 साल की उम्र में पढ़ाई के बारे में अधिक चिंता करने से आगे चलकर डिप्रेशन और खुद को नुकसान पहुंचाने का खतरा बढ़ सकता है। तो आज की जरूरत की खबर में जानेंगे कि – एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, मनोवैज्ञानिक, परिवार और बाल परामर्शदाता, जयपुर डॉ. भास्कर शुक्ला, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, पीएसआरआई हॉस्पिटल, दिल्ली प्रश्न- मनोविज्ञान में एक शब्द है ‘अकादमिक तनाव’ यह क्या होता है? उत्तर: शैक्षणिक तनाव वह मनोवैज्ञानिक दबाव है जो छात्र पढ़ाई के कारण महसूस करते हैं। इसमें उच्च पाठ्यक्रम, लगातार परीक्षाएं, कक्षा में प्रतिस्पर्धा, अच्छे नंबर शामिल हैं। इस तनाव में शामिल हैं, माता-पिता या शिक्षकों के दबाव और अपेक्षाएं। लंबे समय में, यह तनाव बच्चे की भावनाओं, सोच और शरीर को प्रभावित कर सकता है। जब यह दबाव लंबे समय तक रहता है और रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करता है, तो इसे अकादमिक तनाव कहते हैं।
ज़रूरी खबर – बच्चों में अकादमिक तनाव: इससे बढ़ती युवावस्था में डिप्रेशन और बीमारियों का रिस्क, डॉक्टर से जानें बचाव कैसे करें
By worldprime
On: फ़रवरी 21, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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