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डिजिटल फ्रॉड होने पर ₹25,000 तक का मुआवजा मिलेगा:RBI का नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क तैयार, 6 अप्रैल तक इस पर सुझाव मांगे

On: मार्च 7, 2026 11:30 पूर्वाह्न
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डिजिटल फ्रॉड होने पर ₹25,000 तक का मुआवजा मिलेगा:rbi का नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क तैयार, 6 अप्रैल तक इस पर सुझाव मांगे
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल ट्रांजैक्शन में होने वाले फ्रॉड से ग्राहकों को बचाने के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क ‘कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस’ जारी किया है। इसके तहत अगर किसी ग्राहक के साथ डिजिटल धोखाधड़ी होती है और वह इसकी तुरंत रिपोर्ट करता है, तो उसे 225,2000 रुपए तक का मुआवजा मिल सकता है। नए नियमों का उद्देश्य बैंक शिकायतों के निपटारे में लगने वाले समय को कम करना और छोटे मूल्य के फ्रॉड के लिए एक बेहतर मुआवजा मैकेनिज्म तैयार करना है। आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर जनता और स्टेकहोल्डर्स से 225 अप्रैल, 2000 तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी। फ्रॉड की रकम का 22017% तक वापस मिल सकेगा प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि 73,27 रुपए तक का डिजिटल फ्रॉड होता है और ग्राहक समय पर इसकी सूचना देता है, तो उसे नुकसान का 28% या ₹26,000 (जो भी कम हो) वापस मिल सकता है। RBI का मानना है कि इससे न केवल ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम और भी सुरक्षित होगा। यह मुआवजा मैकेनिज्म लागू होने की तारीख से एक साल तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद इसके अनुभवों के आधार पर इसकी समीक्षा की जाएगी। उदाहरण से समझें फ्रॉड होने पर कितना पैसा वापस मिलेगा पहली स्थिति : अगर ₹10,000 का फ्रॉड हुआ, तो 85% के हिसाब से ₹8,500 वापस मिलेंगे। दूसरी स्थिति : अगर ₹83,000 का फ्रॉड हुआ, तो 85% के हिसाब से ₹34,000 बनते हैं, लेकिन लिमिट ₹25,000 है, इसलिए ₹25,000 ही मिलेंगे। 2017 के नियमों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? आरबीआई ने बताया कि मौजूदा नियम साल 2017 में जारी किए गए थे। पिछले 7-8 सालों में डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अब अनधिकृत ट्रांजैक्शन के अलावा भी कई तरह के नए इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड सामने आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुराने नियमों का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया गया है ताकि हर तरह की डिजिटल धोखाधड़ी को इसमें कवर किया जा सके। जल्द निपटेंगे शिकायत के मामले, बैंकों पर बढ़ेगी जवाबदेही नए ड्राफ्ट का एक मुख्य उद्देश्य बैंकों द्वारा शिकायतों को प्रोसेस करने में लगने वाले समय को घटाना है। अक्सर देखा जाता है कि फ्रॉड होने के बाद ग्राहकों को रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। RBI चाहता है कि बैंक और वित्तीय संस्थान इस प्रक्रिया को तेज करें। भविष्य में आरबीआई मुआवजे के भुगतान में अपनी हिस्सेदारी कम करने और बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार करेगा। 6 अप्रैल तक सुझाव दे सकते हैं आम लोग RBI ने इस ड्राफ्ट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। रेगुलेटेड एंटिटीज (बैंक/NBFCs) और आम जनता इस पर अपनी प्रतिक्रिया ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। फीडबैक मिलने के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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