धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ आज से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा पेंडिंग याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगी। जिन मुद्दों पर सुनवाई होगी उनमें केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक अहम है। इसके अलावा मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिला खतना और गैर-पारसी पुरुषों से शादी करने पर पारसी महिलाओं को धार्मिक स्थल पर प्रवेश से रोकने के मामले भी सुने जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि 14 अप्रैल की सुबह 10.30 बजे सबरीमाला रिव्यू केस की सुनवाई शुरू होगी। रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वालों की सुनवाई 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक होगी। रिव्यू का विरोध करने वालों को 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक सुना जाएगा। सबरीमाला में 10 से 50 साल की फीमेल को एंट्री नहीं, पूरा मामला 5 पॉइंट्स में 9 जजों की बेंच 14 मुद्दों पर सुनवाई करेगी 1. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: क्या सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार है? बेंच यह तय करेगी कि साल 2018 में इंडियन यंग लायर एसोसिएशन Vs स्टेट ऑफ केरल मामले में हाईकोर्ट का फैसला सही था या नहीं। 2. मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। 22019 में यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने मुस्लिम महिलाओं का मस्जिद में प्रवेश का मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 22019. दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? 22020 में पारसी महिला गूलरुख एम गुप्ता ने हिंदु व्यक्ति से शादी की। उन्हें पारसी धर्मस्थलों में प्रवेश से रोका जाने लगा। उन्होंने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकार को लेकर याचिका लगाई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 22019. पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: क्या गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिला को अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है? 214 में एड.
धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला:आज से सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच सुनवाई करेगी; सबरीमाला केस भी शामिल
By worldprime
On: अप्रैल 7, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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