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फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- गुंडागर्दी नहीं सम्मान की भाषा समझते हैं:ऐसी दुनिया खतरनाक, जहां ताकतवर देश मनमर्जी करें; ट्रम्प ने 200% टैरिफ की धमकी दी थी

On: जनवरी 20, 2026 2:49 अपराह्न
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फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले गुंडागर्दी नहीं सम्मान की भाषा समझते हैं:ऐसी दुनिया खतरनाक, जहां ताकतवर देश मनमर्जी करें; ट्रम्प ने 200% टैरिफ की धमकी दी थी
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को ट्रम्प की फ्रांसीसी शराब पर 27% टैरिफ लगाने की धमकी पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फ्रांस धमकी नहीं, सम्मान में भरोसा करता है। मैक्रों स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाषण दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने ग्रीनलैंड से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि यूरोप पर और पाबंदियां लगाने की धमकी देना गलत है। खासकर तब, जब इनका इस्तेमाल किसी देश की जमीन और आजादी पर दबाव बनाने के लिए किया जाए। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी दुनिया खतरनाक है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून की कोई अहमियत नहीं रह जाती। जहां ताकतवर देश जो चाहें करते हैं और कमजोर देशों को मजबूरी में सब सहना पड़ता है। मैक्रों बोले यह समय शांति का, लोग हंस पड़े मैक्रों ने कहा, ‘यह समय शांति, स्थिरता और भरोसे का होना चाहिए।’ इस पर हॉल में मौजूद लोग हंस पड़े। इसके बाद मैक्रों ने भी मान लिया कि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। मैक्रों ने कहा कि आज दुनिया अस्थिर होती जा रही है। सुरक्षा के मामले में भी और अर्थव्यवस्था के मामले में भी। उन्होंने कहा कि 2200 में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और कई देशों में लोकतंत्र कमजोर होकर तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। मैक्रों बोले- डेनमार्क के साथ खड़े हैं मैक्रों ने व्यापार और टैरिफ का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ देश ऐसे व्यापार समझौते कर रहा है जो यूरोप के कारोबार को नुकसान पहुंचाते हैं, ज्यादा शर्तें थोपते हैं और यूरोप को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार नए-नए टैक्स लगाए जा रहे हैं और यह बात बिल्कुल मंजूर नहीं की जा सकती, खासकर तब जब इन टैक्स का इस्तेमाल किसी देश की जमीन और संप्रभुता पर दबाव बनाने के लिए किया जाए। मैक्रों ने कहा कि वे अपनी आजादी और संप्रभुता को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई पुरानी सोच नहीं है, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध से मिली सीख को याद रखने का तरीका है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सहयोग जरूरी है और देश आपस में मिलकर ही आगे बढ़ सकते हैं। इसी बात को समझाते हुए मैक्रों ने बताया कि फ्रांस ने ग्रीनलैंड में होने वाले सैन्य अभ्यास में हिस्सा लिया है। उन्होंने साफ किया कि इसका मकसद किसी को धमकाना नहीं है, बल्कि अपने एक यूरोपीय दोस्त देश डेनमार्क के साथ खड़े होना है। ट्रम्प ने फ्रांसीसी शराब पर 2200% टैरिफ की धमकी दी इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने फ्रांस के वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने सोमवार को यह चेतावनी फ्रांस के गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने से इनकार करने के विरोध में दी। ट्रम्प ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों को शामिल भी नहीं करना चाहते, क्योंकि बहुत जल्द उनकी कुर्सी छिनने वाली है। उन्होंने कहा- अगर मुझे लगा तो मैं फ्रांसीसी वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाऊंगा, फिर मैक्रों खुद पीस बोर्ड में शामिल हो जाएंगे। दरअसल ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन को चलाने और उसे फिर से बसाने के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। ट्रम्प ने इस कमेटी में शामिल होने के लिए 60 देशों को न्योता भेजा है। ट्रम्प ने मैक्रों के एक प्राइवेट मैसेज का स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर मंगलवार को लीक कर दिया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ट्रम्प को G7 बैठक बुलाने का प्रस्ताव दिया ट्रम्प ने जो मैसेज शेयर किया उसमें इमेनुअल मैक्रों ने कहा था- सीरिया के मुद्दे पर हम पूरी तरह आपसे सहमत हैं। ईरान के मामले में हम काफी कुछ कर सकते हैं, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि आप ग्रीनलैंड में क्या कर रहे हैं। एक मत तक पहुंचने के लिए मैक्रों ने एक औपचारिक बैठक का प्रस्ताव रखा। मैक्रों ने कहा, ‘मैं पेरिस में G7 की बैठक बुला सकता हूं। मैं यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस को भी इसमें आमंत्रित कर सकता हूं। ‘मैक्रों ने अमेरिका लौटने से पहले ट्रम्प को साथ में डिनर करने का भी न्योता दिया। मैक्रों के मैसेज का स्क्रीनशॉट फ्रांस ने अमेरिका का मजाक उड़ाया था यह विवाद तब और तेज हो गया जब फ्रांस ने ट्रम्प के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के प्रयास की आलोचना की। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ट्रम्प की ग्रीनलैंड नीति का बचाव करते हुए कहा था कि भविष्य में रूस से ग्रीनलैंड में खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर रूस या किसी दूसके से ग्रीनलैंड पर हमला होता है, तो हम NATO के तहत इस जंग में शामिल हो जाएंगे। फ्रांस ने इस बयान का मजाक उड़ाया था। फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक X अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि बेसेंट का तर्क ऐसा है जैसे अगर कभी घर में आग लगने का खतरा हो तो बेहतर है घर को अभी जला दो। फ्रेंच वाइन और शैम्पेन के बारे में जानिए… फ्रांस दुनिया की वाइन राजधानी कही जाती है फ्रेंच वाइन और शैम्पेन दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध हैं। फ्रांस की वाइन संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता हैं। फ्रांस को दुनिया की वाइन राजधानी कहा जाता है। फ्रेंच वाइन में कई तरह की रेड, व्हाइट, रोजे और स्पार्कलिंग वाइन शामिल हैं। फ्रेंच वाइन फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में उगाए गए अंगूरों से बनाई जाती है। फ्रेंच वाइन में आमतौर पर कोई बुलबुले नहीं होते। ये स्टिल वाइन होती हैं, जिनमें अल्कोहल 11-2003% तक होता है। इनकी क्वालिटी मिट्टी, मौसम और अंगूर की किस्म पर निर्भर करती है। इटली के बाद फ्रांस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा वाइन उत्पादक देश है। 2025 में वैश्विक वाइन उत्पादन लगभग 23.2 खरब मिलीलीटर रहा, जिसमें फ्रांस का उत्पादन 3.59 खरब मिलीलीटर है, यानी दुनिया की कुल वाइन का लगभग 15-16%। सिर्फ फ्रांस में शैम्पेन बनाई जाती है शैम्पेन एक स्पार्कलिंग वाइन है। जो केवल फ्रांस के शैम्पेन क्षेत्र में बनाई जा सकती है। यह नाम केवल इसी क्षेत्र की वाइन के लिए इस्तेमाल होता है। अगर कहीं और बनाई जाए, तो उसे शैम्पेन नहीं कह सकते। यह ट्रेडिशनल मेथड से बनता है। यह ज्यादातर सेलिब्रेशन, पार्टी या स्पेशल मौकों पर पी जाती है। शैम्पेन केवल फ्रांस में बनती है, इसलिए दुनिया की 100% शैम्पेन फ्रांस से ही आती है। NCAG कमेटी के बारे में जानिए… गाजा में पुनर्निर्माण के लिए ट्रम्प ने कमेटी बनाई गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए बनाई गई NCAG कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) का गठन किया गया है। ट्रम्प खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है। ट्रम्प ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को न्योता दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ को भी इस बोर्ड में शामिल होने का बुलावा दिया गया है। हालांकि, इजराइल इससे नाराज है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने शनिवार को कहा कि गाजा के लिए बनाए गए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना बातचीत करे की है। इजराइल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से क्या नाराजगी नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। रिपोर्ट- स्थायी सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे ट्रम्प की प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने शनिवार को रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में $1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है। अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल में $1 बिलियन से ज्यादा (एक अरब डॉलर) कैश फंड देता है, तो उसकी 3 साल की समय सीमा लागू नहीं होगी यानी स्थायी सदस्यता मिल जाएगी। फंड का इस्तेमाल बोर्ड के खर्चों के लिए होगा, लेकिन कहां-कैसे खर्च होगा, इसकी स्पष्ट डिटेल नहीं है। व्हाइट हाउस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को गुमराह करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस ने कहा, ‘यह गुमराह करने वाली रिपोर्ट है। बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता फीस नहीं है। यह सिर्फ उन पार्टनर देशों को स्थायी सदस्यता का ऑफर है जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।’ बोर्ड के सदस्यों में भारतवंशी अजय बंगा भी शामिल व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड के सदस्यों की सूची जारी की। इस बोर्ड में 7 लोग शामिल हैं, जिनमें भारतवंशी अजय बंगा भी हैं। बंगा फिलहाल वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष हैं। बोर्ड के दूसरे सदस्यों में मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), स्टीव विटकॉफ (विशेष राजदूत) समेत कई लीडर शामिल हैं। गाजा में पैनल बनाकर विकास की तैयारी इस पहल में ‘ट्रम्प इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल है। इसके तहत मिडिल ईस्ट में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों का पैनल बनाकर गाजा के पुनर्निर्माण और विकास की योजना तैयार की जाएगी। योजना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समूहों से निवेश और विकास से जुड़े प्रस्ताव लिए जाएंगे। इनका मकसद सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करते हुए निवेश आकर्षित करना और रोजगार के मौके पैदा करना है। इसके साथ ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के साथ टैरिफ और एक्सेस रेट तय किए जाएंगे। योजना में साफ कहा गया है कि गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकेंगे और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की आजादी होगी। योजना के मुताबिक, लोगों को गाजा में ही रहने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की फ्रांसीसी शराब पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी:मैक्रों का प्राइवेट मैसेज लीक किया, उन्होंने गाजा पर साथ देने से इनकार किया था अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने फ्रांस के वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उन्होंने सोमवार को यह चेतावनी फ्रांस के गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने से इनकार करने के विरोध में दी। पढ़ें पूरी खबर… नॉर्वे के PM बोले- नोबेल सरकार नहीं, कमेटी देती है: ट्रम्प की शिकायत पर जवाब दिया; ट्रम्प ने कहा- अब प्राइज नहीं देश का फायदा सोच रहा नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोर ने सोमवार को ट्रम्प का लेटर मिलने की पुष्टि की। इसके बाद बयान जारी कर उन्होंने साफ किया कि नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे सरकार नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र नोबेल कमेटी देती है। सरकार का इसमें कोई रोल नहीं है।

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