वुलर झील के किनारे बसे बांदीपोरा के नायदखाई गांव में एक छोटे-से घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी है। गांव वाले, रिश्तेदार और परिचित बधाई देने आ रहे हैं। ये घर इरफान अहमद लोन का है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है। उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि इरफान के पिता बशीर अहमद को लॉन में एक बड़ा टेंट लगवाना पड़ा। सिंचाई विभाग में दिहाड़ी मजदूर बशीर कहते हैं, हम कई वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इरफान की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपनी जमीन भी बेच दी। अब इरफान की सफलता ने उनके छोटे भाई और बहन के मन में भी आईएएस अधिकारी बनने का सपना मजबूत कर दिया है। यूपीएससी में 257 वीं रैंक हासिल करने वाले पुलवामा के तौसीफ अहमद गनी भी एक मजदूर के बेटे हैं। इस साल जम्मू-कश्मीर से रिकॉर्ड 17 उम्मीदवारों का यूपीएससी में चयन हुआ है। ये बदलाव कश्मीर में शिक्षा, अवसर और नई आकांक्षाओं के उभरते माहौल की भी कहानी है। हर साल औसतन 10-15 उम्मीदवार यूपीएससी में सिलेक्ट हो रहे हैं। 2010 से 2025 के बीच 150 से ज्यादा उम्मीदवार जम्मू-कश्मीर से यूपीएससी में चुने जा चुके हैं। प्रेरणा – शाह फैसल के टॉपर बनने के बाद कई युवा टॉप 10 में आए दो दशक पहले यूपीएससी की चयन सूची में जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के सिर्फ एक या दो ही युवा होते थे। 20 ?
बदलाव की बयार, युवा इलाके की फिजा बदलने में जुटे:10 साल में जम्मू-कश्मीर के 150 से ज्यादा उम्मीदवार UPSC में चयनित; कोई दृष्टिबाधित तो कोई मजदूर का बेटा
By worldprime
On: मार्च 10, 2026 5:08 अपराह्न
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