भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे। नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के उस दौर के रणनीतिकार थे जब क्रिकेट की दुनिया पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा हुआ करता था। पंजाब क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट स्थल के रूप में पहचान दिलाई, बल्कि भारत में विश्व कप लाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। उनका क्रिकेट प्रशासन में सफर काफी लंबा रहा। वे 1993 से 1996 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे। हालांकि, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) पर उनकी पकड़ बेमिसाल थी। वे 36 वर्षों तक पीसीए के प्रमुख रहे। मोहाली का शानदार स्टेडियम उन्हीं की देन है, जिसे बाद में उन्हीं के सम्मान में ‘आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम नाम दिया गया। इसी मैदान पर 2011 विश्व कप का वह ऐतिहासिक सेमीफाइनल खेला गया था, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हराया था। 1980 के दशक तक विश्व कप केवल इंग्लैंड में ही होता था। बिंद्रा ने एनकेपी साल्वे और जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर इस परंपरा को तोड़ा। इन तीनों की कोशिशों से ही 1987 में पहली बार विश्व कप इंग्लैंड के बाहर भारत और पाकिस्तान में आयोजित हुआ। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 84 साल के थे। बिंद्रा केवल एक प्रशासक ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के उस दौर के रणनीतिकार थे जब क्रिकेट की दुनिया पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा हुआ करता था। उन्होंने न सिर्फ मोहाली को दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट वेन्यू के रूप में पहचान दिलाई, बल्कि भारत में वर्ल्ड कप लाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। 36 साल तक पंजाब क्रिकेट के सर्वेसर्वा रहे बिंद्रा का क्रिकेट प्रशासन में सफर काफी लंबा रहा। वे 1993 से 1996 तक BCCI के अध्यक्ष रहे। हालांकि, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) पर उनकी पकड़ बेमिसाल थी। वे 1978 से 2014 तक, यानी लगातार 36 सालों तक PCA के चीफ रहे। मोहाली का शानदार स्टेडियम उन्हीं की देन है, जिसे बाद में उन्हीं के सम्मान में ‘आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम’ नाम दिया गया। इसी मैदान पर 2011 वर्ल्ड कप का वह ऐतिहासिक सेमीफाइनल खेला गया था, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हराया था। 1987 में पहली बार इंग्लैंड से बाहर वर्ल्ड कप लाए 1980 के दशक तक वर्ल्ड कप सिर्फ इंग्लैंड में ही होता था। बिंद्रा ने एनकेपी साल्वे और जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर इस परंपरा को तोड़ा। इन तीनों की कोशिशों से ही 1987 में पहली बार वर्ल्ड कप इंग्लैंड से बाहर भारत और पाकिस्तान में आयोजित हुआ। उन्होंने भारत भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। उनकी उम्र 84 वर्ष थी। बिंद्रा केवल एक प्रशासक नहीं थे, बल्कि उस दौर के भारतीय क्रिकेट के प्रमुख रणनीतिकार भी थे, जब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट पर दबदबा था। उन्होंने मोहाली को विश्व के बेहतरीन क्रिकेट स्टेडियमों में से एक के रूप में स्थापित किया और भारत में वर्ल्ड कप आयोजित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंजाब क्रिकेट के 36 वर्षों तक सर्वेसर्वा रहे बिंद्रा का क्रिकेट प्रशासन में लंबा और प्रभावशाली करियर रहा। वे 1993 से 1996 तक BCCI के अध्यक्ष रहे, जबकि पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत थी। वे 1978 से 2014 तक लगातार 36 साल तक PCA के प्रमुख रहे। मोहाली के शानदार स्टेडियम का निर्माण उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है, जिसे बाद में उनके सम्मान में ‘आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम’ नाम दिया गया। इसी मैदान पर 2011 के वर्ल्ड कप का ऐतिहासिक सेमीफाइनल खेला गया था, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हराया था। 1987 में पहली बार इंग्लैंड के बाहर वर्ल्ड कप आयोजित कराने में भी बिंद्रा की अहम भूमिका रही। 1980 के दशक तक वर्ल्ड कप केवल इंग्लैंड में होता था, लेकिन बिंद्रा ने एनकेपी साल्वे और जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर इस परंपरा को तोड़ा और 1987 में पहला वर्ल्ड कप भारत और पाकिस्तान में आयोजित हुआ। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के विकास में अमूल्य योगदान दिया।
बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष आईएस बिंद्रा का निधन: 1993-96 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे, जिन्होंने भारत को क्रिकेट की वैश्विक महाशक्ति बनाने में अहम भूमिका निभाई
By worldprime
On: जनवरी 26, 2026 7:33 पूर्वाह्न
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