सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल अपशब्द या भद्दी भाषा का इस्तेमाल अपने आप में ‘अश्लीलता’ नहीं माना जा सकता, जब तक उसमें कोई यौन या कामुक तत्व शामिल न हो। कोर्ट ने पारिवारिक संपत्ति विवाद के दौरान ‘बास्टर्ड’ शब्द कहने पर दो लोगों को मिली सजा रद्द कर दी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 294(बी) के तहत अपराध तभी बनता है, जब इस्तेमाल किए गए शब्द किसी की कामुक भावनाओं को भड़काने वाले हों। कोर्ट ने कहा कि आज के दौर में गरमागरम बहस के दौरान ऐसे शब्द अक्सर बोल दिए जाते हैं, इसलिए इन्हें अश्लील मानकर सजा देना सही नहीं है। आज की अन्य बड़ी खबरें… मोइरांग में रॉकेट हमले में दो बच्चों की मौत, हिंसा भड़की सोमवार देर रात बिष्णुपुर जिले में एक संदिग्ध रॉकेट हमले में दो बच्चों की मौत हो गई। इसके बाद मणिपुर में फिर से हिंसा भड़क उठी। हमला रात करीब 1 बजे मोइरांग पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले ट्रोंगलाओबी अवांग लीकाई में हुआ, जहां कुकी उग्रवादियों द्वारा दागा गया एक गोला एक रिहायशी इलाके में जा गिरा। इसमें 5 साल के एक लड़के और 5 महीने की एक बच्ची की मौत हो गई।
भास्कर अपडेट्स:सुप्रीम कोर्ट बोला- अपशब्द अश्लीलता नहीं है, जब तक यौन संकेत नहीं हों, बास्टर्ड कहने पर मिली सजा रद्द की
By worldprime
On: अप्रैल 7, 2026 8:34 पूर्वाह्न
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