कृत्रिम मिठास हमारे दैनिक आहार का हिस्सा बन गए हैं, जैसे कोई भी चीनी मुक्त प्रसंस्कृत भोजन, प्रोटीन पाउडर, स्वाद युक्त योगर्ट या डाइट सोडा। और अगर आप देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि इसमें कुछ न कुछ कृत्रिम मिठास है. ये मिठास चीनी के विकल्प के रूप में उपयोग की जाती है क्योंकि ये इंसु यह स्पाइक नहीं करता है और बिना कैलोरी के मिठास देता है। यही कारण है कि मधुमेह, वजन घटाने और स्वस्थ आहार लेने वाले लोग इसका उपयोग करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में हमारे स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है? अक्टूबर 2025 में, अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के मेडिकल जर्नल में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ। के अनुसार, कृत्रिम स्वीटनर्स का अधिक सेवन स्मृति और सोचने की क्षमता को कम कर सकता है। ऐसे में इसे पूरी तरह से बेफिक्र ले लेना समझदारी नहीं है। तो चलिए, आज फिजिकल हेल्थ में हम आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि – एक्सपर्ट: डॉ. साकेत कांत, सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्रोनोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली प्रश्न – आर्टिफिशियल स्वीटनर पर हुई नई स्टडी क्या कहती है? उत्तर: यह अध्ययन ब्राजील के 12,772 लोगों पर किया गया, जिनकी औसत आयु 52 वर्ष थी।
शारीरिक स्वास्थ्य: कृत्रिम मिठास से दिमाग जल्दी बूढ़ा होता है ‘चीनी मुक्त’ उत्पादों के खतरे और स्वास्थ्य जोखिम, डॉक्टरों की सलाह लें
By worldprime
On: जनवरी 19, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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