एक कॉलेज बास्केटबॉल खिलाड़ी मैच शुरू होने से पहले अपना मोबाइल खोलता है। स्क्रीन पर अजनबी का संदेश दिखता है, ‘सुनो, यह मजाक नहीं है। अगर तुमने आज 22 अंक व 1 यह डरावना संदेश किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि 2024 के एनसीएए (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) का है। उस खिलाड़ी ने अभी कोर्ट पर कदम भी नहीं रखा था, न ही कोई शॉट मिस किया था। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि सट्टेबाजी की दुनिया में उसकी काबिलिटी हालांकि वह मैदान में उतरा और स्वाभाविक खेलने की कोशिश भी की। एक्सपर्ट कहते हैं, हम इस समय ‘मार्च मैडनेस’ के बीच में हैं- जो अमेरिकी खेलों में सबसे अधिक है। भारत में सबसे अधिक सट्टेबाजी वाला आयोजन है। अनुमान है कि अकेले इस साल के टूर्नामेंट पर 25 हजार करोड़ रुपए दांव पर लगे हैं। वैज्ञानिक एमी कडी कहती हैं, ‘आज के एथलीट सिर्फ शारीरिक थकान से नहीं, बल्कि नए मनोवैज्ञानिक खतरे से जूझ रहे हैं, जिसे ‘सोशल-इवैल्यूएटिव थ्रेट’ (सामाजिक परख यह वह तनाव है जो दूसरों द्वारा नकारात्मक निर्णय लिए जाने या अपमानित होने के डर से पैदा होता है। लेकिन आज एक खिलाड़ी नाश्ता करेगा? एक कॉलेज बास्केटबॉल खिलाड़ी मैच शुरू होने से पहले अपना मोबाइल खोलता है। स्क्रीन पर अजनबी का संदेश दिखता है,‘सुनो, यह मजाक नहीं है। अगर तुमने आज 22 पॉइंट्स व 12 बाउंड्स नहीं बनाए, तो तुम्हारे सभी करीबी मार दिए जाएंगे।’ यह डरावना संदेश किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि 2024 के एनसीएए (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) की स्टडी का हिस्सा है। उस खिलाड़ी ने अभी कोर्ट पर कदम भी नहीं रखा था, न ही कोई शॉट मिस किया था। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि सट्टेबाजी की दुनिया में उसकी काबिलियत पर ‘दांव’ लगा था। हालांकि वह मैदान में उतरा और स्वाभाविक खेलने की कोशिश भी की। एक्सपर्ट कहते हैं,हम इस समय ‘मार्च मैडनेस’ के बीच में हैं- जो अमेरिकी खेलों में सबसे अधिक सट्टेबाजी वाला आयोजन है। अनुमान है कि अकेले इस साल के टूर्नामेंट पर 25 हजार करोड़ रुपए दांव पर लगे हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर और मनोवैज्ञानिक एमी कडी कहती हैं,‘आज के एथलीट सिर्फ शारीरिक थकान से नहीं, बल्कि नए मनोवैज्ञानिक खतरे से जूझ रहे हैं, जिसे ‘सोशल-इवैल्यूएटिव थ्रेट’ (सामाजिक परख का खतरा) कहते हैं। यह वह तनाव है जो दूसरों द्वारा नकारात्मक निर्णय लिए जाने या अपमानित होने के डर से पैदा होता है। 1995 में एक खिलाड़ी को सिर्फ स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की हूटिंग सुनाई देती थी। लेकिन आज, एक खिलाड़ी नाश्ते ? एक कॉलेज बास्केटबॉल खिलाड़ी मैच शुरू होने से पहले अपना मोबाइल खोलता है। स्क्रीन पर अजनबी का संदेश दिखता है,‘सुनो, यह मजाक नहीं है। अगर तुमने आज 22 पॉइंट्स व 12 बाउंड्स नहीं बनाए, तो तुम्हारे सभी करीबी मार दिए जाएंगे।’ यह डरावना संदेश किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि 2024 के एनसीएए (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) की स्टडी का हिस्सा है। उस खिलाड़ी ने अभी कोर्ट पर कदम भी नहीं रखा था, न ही कोई शॉट मिस किया था। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि सट्टेबाजी की दुनिया में उसकी काबिलियत पर ‘दांव’ लगा था। हालांकि वह मैदान में उतरा और स्वाभाविक खेलने की कोशिश भी की। एक्सपर्ट कहते हैं,हम इस समय ‘मार्च मैडनेस’ के बीच में हैं- जो अमेरिकी खेलों में सबसे अधिक सट्टेबाजी वाला आयोजन है। अनुमान है कि अकेले इस साल के टूर्नामेंट पर 25 हजार करोड़ रुपए दांव पर लगे हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर और मनोवैज्ञानिक एमी कडी कहती हैं,‘आज के एथलीट सिर्फ शारीरिक थकान से नहीं, बल्कि नए मनोवैज्ञानिक खतरे से जूझ रहे हैं, जिसे ‘सोशल-इवैल्यूएटिव थ्रेट’ (सामाजिक परख का खतरा) कहते हैं। यह वह तनाव है जो दूसरों द्वारा नकारात्मक निर्णय लिए जाने या अपमानित होने के डर से पैदा होता है। 1995 में एक खिलाड़ी को सिर्फ स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की हूटिंग सुनाई देती थी। लेकिन आज, एक खिलाड़ी नाश्ते ?
सट्टेबाजी का दबाव खिलाड़ियों को तोड़ रहा है: लक्ष्य पूरा करने के लिए एथलीटों को परिजनों की हत्या की धमकी; अपशब्दों की बौछार
By worldprime
On: अप्रैल 7, 2026 11:18 पूर्वाह्न
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