डिजिटल टोल प्रणाली ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा को आसान बना दिया है लेकिन साइबर ठग अब इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। वार्षिक पास के नाम पर ऑनलाइन धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। स्कैमर्स ने NHAI (नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के नाम और लोगो का दुरुपयोग करके सोशल मीडिया और गूगल पर फ़रार किया है। ये वेबसाइट्स असली वेबसाइट की तरह दिखने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं, ताकि लोग इसे इस खतरे को देखते हुए, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने अपने ‘एक्स’ खाते के माध्यम से लोगों को सतर्क किया है। आज के ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में हम ‘फास्टैग स्कैम’ के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साइबर सुरक्षा सलाहकार, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- फास्टैग घोटाला क्या है? उत्तर- यह एक ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें साइबर अपराधी फास्टैग रिचार्ज या वार्षिक पास पर भारी छूट का लालच देकर लोगों को फर्जी वेबसाइट या लिंक पर ले जाते हैं। A. धोखाधड़ी करने वाले लोग पैसे लेते हैं। स्कैमर फास्टैग रिचार्ज, सक्रियण और रिफंड के बहाने लोगों को इस घोटाले में फंसा देते हैं।
साइबर लिटरेसी- फास्टैग रिचार्ज स्कैमः जानें कैसे फंसते हैं लोग, सस्ते के लालच में न आएं, रिचार्ज करवाने पर बरतें 10 सावधानियां
By worldprime
On: मार्च 22, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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