आपने अपने आस-पास के घरों में कभी-कभी छोटे बच्चों को प्लास्टिक की बोतल से दूध पीते देखा होगा। हर पांच में से एक बच्चे को प्लास्टिक की बोतल से दूध पिलाया जाता है। आपको यह बात बहुत सामान्य लग सकती है, लेकिन इसके कारण तीन साल की उम्र तक लाखों बच्चे फरवरी 2025 में, साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, शंघाई, चीन में हुए इस अध्ययन के अनुसार, प्लास्टिक फीडिंग बोतलें प्रति लीटर 1465 से 5893 माइक्रोप्लास्टिक कण छोड़ती हैं। इन बोतलों को उबालने या उनमें गर्म दूध रखने पर इसकी मात्रा दोगुनी तक हो जाती है। इससे शिशु रोजाना 2080 से 5910 माइक्रोप्लास्टिक कणों को निगल सकते हैं। यह अध्ययन बच्चों की सुरक्षा के लिए गैर-प्लास्टिक बोतलों के उपयोग की सिफारिश करता है। 2020 में नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि फार्मूला मिल्क तैयार करने के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्लास्टिक की बोतल से प्रति लीटर 13 एक लाख से 1.62 करोड़ तक माइक्रोप्लास्टिक कणों का उत्सर्जन हो सकता है। इससे पता चलता है कि प्लास्टिक की बोतलें शिशुओं के लिए माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क का एक प्रमुख स्रोत हैं। तो चलिए, आज की जरूरी खबर में हम प्लास्टिक की फ़ीडिंग बोतलों के खतरों के बारे में बात करेंगे
खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक बेबी फीडर में: शिशु को प्लास्टिक की बोतल से दूध न पिलाएं, बाल रोग विशेषज्ञ से जानें सुरक्षित फीडिंग का तरीका
By worldprime
On: जनवरी 21, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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