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गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 8 इस्लामिक देश शामिल होंगे:इनमें पाकिस्तान, कतर और तुर्किये भी; विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी किया

On: जनवरी 22, 2026 8:10 पूर्वाह्न
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गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस' में 8 इस्लामिक देश शामिल होंगे:इनमें पाकिस्तान, कतर और तुर्किये भी; विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी किया
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बनाए गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 8 इस्लामिक देशों ने शामिल होने पर सहमति जताई है। इन देशों में कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कतर की राजधानी दोहा संयुक्त बयान इसका ऐलान किया। बयान में कहा गया है कि सभी देशों ने साझा फैसला लिया है। हर देश अपने-अपने कानूनी और जरूरी प्रक्रियाओं के तहत इसमें शामिल होने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेगा। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 13 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा चार्टर में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प का दावा- पुतिन गाजा पीस बोर्ड में शामिल होंगे ट्रम्प ने दावा किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह बयान स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान दिया। पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि पुतिन को न्योता दिया गया था और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है। दूसरी तरफ पुतिन ने कहा है कि बोर्ड में औपचारिक भागीदारी पर अंतिम फैसला रणनीतिक साझेदारों से सलाह के बाद ही लिया जाएगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक, अब तक करीब 50 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया गया है, जिनमें से 35 से अधिक देशों ने अपनी सहमति दे दी है। गाजा पीस बोर्ड को रूस 1 अरब डॉलर देगा रूस ने गाजा पीस बोर्ड को 1 अरब डॉलर देने की पेशकश की है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भले ही बोर्ड में उसकी औपचारिक भागीदारी पर अंतिम फैसला न हुआ हो, लेकिन वह 1 अरब डॉलर देने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह पैसा उस रूसी संपत्ति से लिया जा सकता है, जिसे अमेरिका ने पिछली सरकार के दौरान फ्रीज कर दिया था। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन्हीं प्रतिबंधों के तहत अमेरिका और यूरोप में रूस के सेंट्रल बैंक और सरकारी फंड से जुड़ी अरबों डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया था। इन पैसों पर रूस का मालिकाना हक तो बना रहता है, लेकिन वह बिना अमेरिकी मंजूरी के इनका इस्तेमाल नहीं कर सकता। पुतिन अब इसी फ्रीज संपत्ति से गाजा पीस बोर्ड को 1 अरब डॉलर देने की बात कर रहे हैं। गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंचा सीजफायर के बाद गाजा पीस प्लान अब दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। इस कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) का गठन किया गया है। ट्रम्प खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने पिछले हफ्ते कहा था कि गाजा के लिए बनाए गए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना बातचीत किए की है। इजराइल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से नाराजगी इजराइल ट्रम्प के पीस बोर्ड को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है। नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। पीस बोर्ड के हर सदस्य की अपनी तय जिम्मेदारी होगी व्हाइट हाउस ने कहा कि एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हर सदस्य गाजा की स्थिरता और लंबे समय की सफलता से जुड़े एक तय पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेगा। इसमें शासन क्षमता बढ़ाना, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के और सदस्यों की घोषणा की जाएगी। NCAG डॉ. अली शाथ के नेतृत्व में काम करेगी। डॉ. शा’थ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अली शाथ गाजा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा) को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। रिपोर्ट- परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे ट्रम्प की प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने शनिवार को रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में $1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है। अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल में $1 बिलियन से ज्यादा (एक अरब डॉलर) कैश फंड देता है, तो उसकी 3 साल की समय सीमा लागू नहीं होगी यानी स्थायी सदस्यता मिल जाएगी। फंड का इस्तेमाल बोर्ड के खर्चों के लिए होगा, लेकिन कहां-कैसे खर्च होगा, इसकी स्पष्ट डिटेल नहीं है। व्हाइट हाउस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को गुमराह करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस ने कहा, ‘यह गुमराह करने वाली रिपोर्ट है। बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता फीस नहीं है। यह सिर्फ उन पार्टनर देशों को स्थायी सदस्यता का ऑफर है जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।’ गाजा में पैनल बनाकर विकास की तैयारी इस पहल में ‘ट्रम्प इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल है। इसके तहत मिडिल ईस्ट में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों का पैनल बनाकर गाजा के पुनर्निर्माण और विकास की योजना तैयार की जाएगी। योजना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समूहों से निवेश और विकास से जुड़े प्रस्ताव लिए जाएंगे। इनका मकसद सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करते हुए निवेश आकर्षित करना और रोजगार के मौके पैदा करना है। इसके साथ ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के साथ टैरिफ और एक्सेस रेट तय किए जाएंगे। योजना में साफ कहा गया है कि गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकेंगे और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की आजादी होगी। योजना के मुताबिक, लोगों को गाजा में ही रहने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अब गाजा जंग को जानिए…

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