कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने गुरुवार को राज्य विधानमंडल के जॉइंट सेशन को संबोधित किया। उन्होंने सरकार के तैयार भाषण की केवल तीन लाइन ही पढ़ीं और सदन से बाहर चले गए। एक दिन पहले राज्यपाल ने सेशन संबोधित करने से इनकार किया था। गहलोत के भाषण को CM सिद्धारमैया ने असंवैधानिक बताते हुए कहा- संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 के तहत राज्यपाल को मंत्रिमंडल का तैयार पूरा भाषण पढ़ना अनिवार्य है। राज्यपाल ने अपना भाषण दिया। यह संविधान का उल्लंघन है। वे केंद्र सरकार की कठपुतली हैं। दरअसल, राज्यपाल गहलोत सरकार के तैयार भाषण के पैरा नंबर 11 पर नाराज हैं। इनमें लिखा है कि केंद्र सरकार ने यूपीए काल में शुरू की गई मनरेगा (MGNREGA) योजना को कमजोर किया है। उसका बजट घटाया है, जिससे ग्रामीण रोजगार प्रभावित हुआ है। कर्नाटक सरकार का सत्र 22 जनवरी से शुरू हुआ और 31 जनवरी तक चलेगा। राज्य विधानमंडल की तस्वीरें… राज्यपाल गहलोत के भाषण की 3 लाइन गहलोत ने कहा- मैं राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र में आप सभी का हार्दिक स्वागत करता हूं। मुझे कर्नाटक विधानमंडल के एक और संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक और भौतिक विकास की गति दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक। कांग्रेस ने लगाए शेम-शेम के नारे राज्यपाल के अचानक चले जाने से सत्तापक्ष के मंत्री और विधायक हैरान रह गए। कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल सहित कई मंत्रियों ने उनसे भाषण पूरा करने का आग्रह किया। इसी दौरान कुछ कांग्रेस विधायकों और एमएलसी ने नारेबाजी करते हुए राज्यपाल को घेरने की कोशिश की, जिन्हें सुरक्षा कर्मियों ने हटाया। कांग्रेस सदस्यों ने शेम-शेम और ‘धिक्कार-धिक्कार, राज्यपालरिगे धिक्कार’ के नारे लगाए, जबकि भाजपा विधायकों ने जवाब में भारत माता की जय के नारे लगाए। राष्ट्रगान और सदन की परंपरा पर भी विवाद पूरे घटनाक्रम के बाद विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू की गई। कानून मंत्री एच के पाटिल के भाषण को प्राथमिकता दी गई, जिस पर भाजपा ने आपत्ति जताई। पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने अपने संबोधन के बाद राष्ट्रगान के लिए नहीं रुककर उसका अपमान किया। विवाद पर किसने क्या कहा आगे क्या होगा पड़ोसी राज्यों में राज्यपाल-राज्य सरकार आमने-सामने 20 जनवरी: तमिलनाडु गवर्नर भी बिना भाषण दिए विधानसभा से निकले तमिलनाडु विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यपाल आरएन रवि राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए स्पीच दिए बिना ही असेंबली से बाहर चले गए थे। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि उनके भाषण में रुकावट डाली गई। उन्होंने कहा कि मैं निराश हूं। राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया गया। राज्यपाल के असेंबली से बाहर जाने के बाद लोक भवन ने प्रेस रिलीज जारी की। रिलीज में कहा गया कि एक बार फिर राष्ट्रगान का अपमान किया गया। गवर्नर का माइक बार-बार बंद किया गया। उन्हें बोलने नहीं दिया गया। पढ़ें पूरी खबर… 20 जनवरी: केरल सरकार का आरोप- राज्यपाल ने भाषण पूरा नहीं पढ़ा केरल में भी CM पिनराई विजयन ने विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के भाषण के तुरंत बाद आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि राज्य मंत्रिमंडल से मंजूर नीतिगत भाषण पूरा नहीं पढ़ा। विजयन ने विधानसभा को बताया कि राज्यपाल ने केंद्र की राजकोषीय नीति की आलोचना करने वाले पैरा और लंबित विधेयकों को लेकर लिखी गई लाइनें नहीं पढ़ीं। इसके जवाब में लोक भवन ने विवाद को अनावश्यक और निराधार बताया। साथ ही दावा किया कि राज्यपाल ने भाषण के मसौदे से ‘अर्ध-सत्य’ तथ्यों को हटाने को कहा था। सरकार ने जवाब दिया था कि राज्यपाल के सुझाए बदलाव के साथ भाषण तैयार किया जा सकता है और पढ़ा जा सकता है। लेकिन आधी रात के बाद बिना किसी संशोधन के वही भाषण राज्यपाल को वापस भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट कह चुका- राज्यपाल मनमानी नहीं कर सकते 13 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश विधानसभा से जुड़े केस में कहा था – यह फैसला आज भी राज्यपाल–राज्य सरकार संबंधों पर प्रमुख नजीर माना जाता है। —— ये खबर भी पढ़ें: 6 जनवरी, 2025 में भी तमिलनाडु गवर्नर ने बिना स्पीच दिए विधानसभा से वॉकआउट किया तमिलनाड़ के विधानसभा सत्र के दौरान सोमवार को सदन में हाईलेवल ड्रामा हुआ। राज्यपाल आरएन रवि ने राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए अभिभाषण देने से इनकार कर दिया और सत्र बीच में ही छोड़कर विधानसभा से चले गए। इससे पहले फरवरी 2024 में भी वे ऐसा कर चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर…
कर्नाटक राज्यपाल ने विधानसभा में अभिभाषण की 3 लाइन पढ़ीं:सदन छोड़कर निकले, मनरेगा के जिक्र पर आपत्ति; CM सिद्धारमैया बोले- गवर्नर केंद्र की कठपुतली
By worldprime
On: जनवरी 22, 2026 6:30 अपराह्न
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