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ट्रम्प के गाजा पीस बोर्ड को लेकर घिरे पाकिस्तानी PM:विपक्ष बोला- ट्रम्प को खुश करने के लिए इससे जुड़े शहबाज, यह अमीरों का एक क्लब

On: जनवरी 23, 2026 2:32 अपराह्न
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ट्रम्प के गाजा पीस बोर्ड को लेकर घिरे पाकिस्तानी pm:विपक्ष बोला ट्रम्प को खुश करने के लिए इससे जुड़े शहबाज, यह अमीरों का एक क्लब
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को दावोस में अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर साइन किए हैं। इस बोर्ड को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई में गाजा में शांति कायम करने और फिर से बसाने के लिए बनाया गया है। पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक ऐसा करके शहबाज शरीफ अपने ही घर में घिर गए हैं। पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों ने उनके फैसले का विरोध किया है और इसे पाकिस्तान के लिहाज से गलत बताया है। प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक जाहिद हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है। हुसैन ने कहा कि PM को दूसरों के फैसलों का इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने इसे ट्रम्प की जोखिम भरी नीति का हिस्सा बताया और कहा कि यह बोर्ड यूनाइटेड नेशन (UN) के जैसा एक संगठन बन रहा है, जो वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा है। हुसैन ने कहा कि यह बस एक अमीरों का क्लब बन रहा है। ट्रम्प की गुड बुक्स में रहने के लिए गाजा पीस बोर्ड से जुड़ा पाकिस्तान लेखक हुसैन ने चिंता जताई कि पाकिस्तान ट्रम्प की गुड बुक्स में रहने के लिए उनकी नीतियों का पालन कर रहा है। एक जिम्मेदार देश की विदेश नीति ऐसी नहीं होती। बोर्ड में इजराइल और अब्राहम समझौते करने वाले देश शामिल हैं, लेकिन फिलिस्तीनियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने इसे ‘विनाशकारी कदम’ करार दिया। उन्होंने पूछा कि क्या पाकिस्तान हमास को हथियार छोड़ने पर मजबूर करने के लिए तैयार है। उन्होंने आशंका जताई कि अमेरिकी जनरल के नेतृत्व में गाजा में फोर्स तैनात हो सकता है और पाकिस्तानी सैनिकों को फिलिस्तीनी प्रतिरोध से लड़ना पड़ सकता है। विपक्ष बोला- यह बोर्ड फिलिस्तीनियों से उनका अधिकार छीन रहा संसद में विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने एक्स पर पोस्ट कर इसे नैतिक रूप से गलत और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड फिलिस्तीनियों से उनका अधिकार छीन रहा है। यह फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को कमजोर करेगा और UN को हाशिए पर धकेलने की कोशिश है। पाकिस्तान, जो कश्मीर जैसे मुद्दों पर UN के प्रस्तावों पर जोर देता है, इस तरह की पहल में शामिल होकर अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। नेता बोले- पाकिस्तान खुद को खतरनाक जिम्मेदारियों से बांध रहा है तहरीक-ए-तहफ्फुज के नेता मुस्तफा नवाज खोखर ने बिना संसद या सार्वजनिक बहस के इस बोर्ड में शामिल होना सरकार की मनमानी को दिखाता है। उन्होंने इसे औपनिवेशिक परियोजना (किसी शक्तिशाली देश का दूसरे देश पर कब्जा) बताया और कहा कि बोर्ड का चार्टर ट्रम्प को अत्यधिक शक्तियां देता है। खोखर के मुताबिक, बोर्ड के सदस्य को ट्रम्प शामिल या हटा जा सकते हैं और उनके पास वीटो का अधिकार भी होगा। खोखर ने सवाल उठाया कि अगर यह बोर्ड ईरान जैसे किसी देश के खिलाफ कार्रवाई का फैसला करता है, तो पाकिस्तान क्या करेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद को ऐसे खतरनाक जिम्मेदारियों से बांध रहा है। PTI की मांग पीस बोर्ड से सदस्यता वापस ले जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेताओं का कहना है कि इतना जरूरी अंतरराष्ट्रीय फैसला लेने से पहले सभी पार्टियों से सलाह लेनी चाहिए थी। PTI का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों को UN की मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए न कि उसके जैसी कोई नई संरचना बनानी चाहिए। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पाकिस्तान की सदस्यता फिलहाल वापस ले और इस मुद्दे पर संसद की निगरानी में फिर से चर्चा की जाए, जिसमें इमरान खान को भी शामिल किया जाए। PTI ने कहा कि वह फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में है, लेकिन फिलिस्तीन के लोगों की इच्छा के खिलाफ किसी भी योजना को स्वीकार नहीं करेगी। इस फैसले पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह या रेफरेंडम कराने की मांग भी की गई है। ट्रम्प ने गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान को क्यों जोड़ा? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल किए जाने की वजह उसकी बढ़ती सैन्य ताकत और बदली हुई कूटनीतिक स्थिति को माना जा रहा है। ट्रम्प के गाजा प्लान के तहत प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में एक अहम सदस्य के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों और अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया है, वहीं जॉर्डन और मिस्र के साथ भी सैन्य सहयोग बढ़ाने पर बात जारी है। इन सबके बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम और ट्रम्प के बीच नजदीकियां भी चर्चा में हैं। जून में ट्रम्प ने मुनीर को व्हाइट हाउस में एक प्राइवेट लंच पर बुलाया था। पाकिस्तान में हाल ही में पारित हुए संवैधानिक संशोधनों के तहत मुनीर को कई शक्तियां दी गई हैं। 8 इस्लामिक देश बोर्ड ऑफ पीस में शामिल ट्रम्प ने गुरुवार को दावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लॉन्च किया। गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 8 इस्लामिक देशों ने शामिल होने पर सहमति जताई है। इन देशों में कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कतर की राजधानी दोहा में संयुक्त बयान जारी कर इसका ऐलान किया। बयान में कहा गया है कि सभी देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का साझा फैसला लिया है। भारत से कोई हस्ताक्षर समारोह में शामिल नहीं हुआ। वहीं अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले ज्यादातर यूरोपीय देश भी इस समारोह से गायब रहे। पहले माना जा रहा था कि कार्यक्रम में 35 देशों के नेता शामिल हो सकते हैं। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। रूस ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। फ्रांस ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है। ब्रिटेन ने कहा है कि फिलहाल वह बोर्ड में शामिल नहीं होगा। चीन ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह इसमें शामिल होगा या नहीं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच आज त्रिपक्षीय बातचीत होगी: पहली बार एक साथ बैठक करेंगे; ट्रम्प बोले- समझौता नहीं किया तो पुतिन और जेलेंस्की मूर्ख यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच अबू धाबी में आज यानी शुक्रवार को त्रिपक्षीय वार्ता होने वाली है। यह 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तीनों देशों की पहली संयुक्त बैठक होगी। यह बैठक दो दिवसीय है। पूरी खबर पढ़ें…

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