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फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों बोले- हमारे बच्चों का दिमाग बिकाऊ नहीं:सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर जल्द बैन लगाएंगे, हाई स्कूल में मोबाइल पर भी रोक

On: जनवरी 26, 2026 8:17 अपराह्न
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फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों बोले हमारे बच्चों का दिमाग बिकाऊ नहीं:सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर जल्द बैन लगाएंगे, हाई स्कूल में मोबाइल पर भी रोक
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उनके बच्चों और किशोरों का दिमाग बिकाऊ नहीं है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि सितंबर से पहले 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा दिए जाएंगे। इसके लिए सरकार कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर काम कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और हाई स्कूलों में मोबाइल फोन पर भी रोक लगेगी। मैक्रों के मुताबिक, यह नियम बच्चों, माता-पिता और शिक्षकों तीनों के लिए बिल्कुल साफ और स्पष्ट होगा। ऑस्ट्रेलिया ने भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगाया फ्रांस का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिमी देशों में बच्चों को सोशल मीडिया के नुकसान से बचाने को लेकर सख्त कानून बनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने एक ऐतिहासिक कानून पास किया था, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट रखना प्रतिबंधित कर दिया गया। मैक्रों की घोषणा से कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन सरकार ने भी कहा था कि वह बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिनमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाना भी शामिल है। यूजर को उम्र साबित करना होगा फ्रांस में इस प्रस्ताव की अगुवाई मैक्रों की पार्टी रिनेसां की सांसद लॉर मिलर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उम्र की कोई सही जांच नहीं होती। कोई भी व्यक्ति बर्थडे डालकर आसानी से अकाउंट बना सकता है। सरकार चाहती है कि यूरोपीय डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत प्लेटफॉर्म पर सख्ती से असली उम्र की पुष्टि अनिवार्य की जाए। इसका मतलब यह होगा कि यूजर को साबित करना पड़ेगा कि वह 15 साल से ऊपर है या नहीं। लॉर मिलर ने माना कि नियमों से बचने के रास्ते हमेशा निकल सकते हैं, लेकिन उनका कहना था कि कम से कम बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने की दिशा में ठोस कदम तो उठाया जाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में प्रतिबंध का फायदा मिला ऑस्ट्रेलिया में इस तरह के प्रतिबंध के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने बताया कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़े करीब 47 लाख सोशल मीडिया अकाउंट बंद या हटाए जा चुके हैं। उन्होंने CNN से कहा था कि सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया, क्योंकि सोशल मीडिया से बच्चों को नुकसान हो रहा है और माता-पिता व खुद बच्चों की ओर से लगातार मांग आ रही थी कि उन्हें “बस बच्चे रहने दिया जाए।” प्रतिबंध लागू होने से ठीक पहले अल्बानीज ने ऑस्ट्रेलियाई किशोरों से अपील की थी कि वे कोई नया खेल शुरू करें, कोई म्यूजिक इंस्ट्रुमेंट सीखें या वह किताब पढ़ें जो काफी समय से अलमारी में रखी है। ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन होने की वजह बनी किताब ऑस्ट्रेलिया में इस कानून को लाने की एक बड़ी वजह 2024 में प्रकाशित अमेरिकी सामाजिक मनोवैज्ञानिक जोनाथन हाइट की किताब द एंग्जायस जेनरेशन भी मानी जाती है। इस किताब में तर्क दिया गया है कि सोशल मीडिया बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। किताब पढ़ने के बाद दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के मुख्यमंत्री की पत्नी ने अपने पति से कहा था कि “इस पर कुछ करना ही होगा।” इसके बाद राज्य स्तर पर मसौदा कानून बना, जो आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर के अभियान में बदल गया। भारत में आदेश पर अमल नहीं हुआ भारत में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने अगस्त 2013 में केएन गोविंदाचार्य मामले में आदेश पारित किया था कि नाबालिग बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते। अदालत ने तब कहा था कि नाबालिग बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जॉइन नहीं कर सकते और कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे उम्र की सही जांच करें। हाईकोर्ट का मानना था कि सोशल मीडिया बच्चों की मानसिक सेहत, पढ़ाई और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे बिना माता-पिता की अनुमति सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करें। हालांकि, इस आदेश के बावजूद जमीनी स्तर पर कभी सख्ती से अमल नहीं हुआ। न तो सोशल मीडिया कंपनियों ने उम्र की प्रभावी जांच व्यवस्था लागू की और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस निगरानी तंत्र बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि बच्चे आसानी से गलत उम्र डालकर सोशल मीडिया अकाउंट बनाते रहे और यह आदेश कागजों तक सीमित रह गया।

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