क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड राजनीति जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़

---Advertisement---

डिफेंस कॉरिडोर-सेमीकंडक्टर से बदलेगा बिहार:तोप-मिसाइल बनेंगे, छोटी चिप से सुधरेगी इकोनॉमी, बजट 2026-27 में हुई घोषणा

On: फ़रवरी 3, 2026 5:40 अपराह्न
Follow Us:
डिफेंस कॉरिडोर सेमीकंडक्टर से बदलेगा बिहार:तोप मिसाइल बनेंगे, छोटी चिप से सुधरेगी इकोनॉमी, बजट 2026 27 में हुई घोषणा
---Advertisement---

बिहार सरकार ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। इसमें बिहार में डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाने का ऐलान किया गया है। 25 नवंबर को नीतीश सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाने के लिए कमेटी गठित करने की मंजूरी दी थी। डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनने से बिहार की तस्वीर कैसे बदल जाएगी? इसमें होगा क्या? खास रिपोर्ट में जानिए…। सबसे पहले जानिए क्या होता है डिफेंस कॉरिडोर? डिफेंस कॉरिडोर एक रूट होगा, जिसमें कई शहर शामिल होंगे। इन शहरों में सेना के काम में आने वाले सामान बनाने के लिए इंडस्ट्री लगाई जाएगी, जिसमें कई कंपनियां हिस्सा लेंगी। इस कॉरिडोर में सरकारी और प्राइवेट कंपनियां हिस्सा लेंगी। कॉरिडोर में वो सभी औद्योगिक संस्थान भी भाग लेंगे, जो सेना के सामान बनाते हैं। कॉरिडोर बनने के बाद यहां हथियारों से लेकर वर्दी तक बनाए जाएंगे। इस कॉरिडोर के तहत लगी फैक्ट्रियों में ड्रोन, तोप, AK-47, कार्बाइन, पिस्टल और स्नाइपर राइफल जैसे हथियार बनेंगे। मुंगेर, कैमूर, जमुई, बांका और अरवल जैसे जिलों में डिफेंस कॉरिडोर के तहत हथियार और अन्य सैन्य साजो-सामान बनेंगे। अभी नालंदा से होता है BMCS का निर्यात अभी नालंदा में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के तहत ऑर्डिनेंस फैक्ट्री चल रही है। यह देश की इकलौती फैक्ट्री है, जहां बाय मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम (BMCS) का उत्पादन किया जाता है। इसका इस्तेमाल बोफोर्स और अन्य तोप से गोला फायर करने में होता है। नालंदा में बने BMCS का निर्यात भी होता है। मुंगेर में 1760 में मीर कासिम ने बंदूक कारखाना शुरू किया था। अंग्रेजों ने भी गन फैक्ट्री लगाई थी। यहां आज भी बंदूकें बनती हैं, लेकिन ज्यादा चर्चा अवैध हथियारों के निर्माण के लिए होती है। डिफेंस कॉरिडोर से जुड़ने के बाद उम्मीद है कि इसकी खोई पहचान वापस मिलेगी। डिफेंस कॉरिडोर देश में कहां-कहां हैं? भारत में फिलहाल उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो बड़े डिफेंस कॉरिडोर बनाए गए हैं। 3,732 करोड़ रुपए के निवेश के साथ 11 अगस्त 2018 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में डिफेंस कॉरिडोर शुरू किया गया था। 3,123 करोड़ रुपए के निवेश के साथ 20 जनवरी 2019 को तमिलनाडु में डिफेंस कॉरिडोर की शुरुआत हुई थी। देश में डिफेंस का कारोबार कितने का है, बिहार में बनने से क्या फायदा होगा? भारत की गिनती दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयात करने वाले देशों में होती है। केंद्र सरकार हथियारों के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए देश में डिफेंस प्रोडक्ट्स के उत्पादन पर जोर दे रही है। इससे न सिर्फ हमारी सेनाओं की जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि भारत 100 से ज्यादा देशों को हथियार और सैन्य उपकरण निर्यात कर रहा है। फाइटर एयरक्राफ्ट के कल-पुर्जों से लेकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (ब्रह्मोस) तक का निर्यात किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपए के रक्षा संबंधी सामान निर्यात हुए। भारत सरकार ने रक्षा संबंधी निर्यात को 2029 तक बढ़ाकर 50 हजार रुपए तक करने का लक्ष्य रखा है। बिहार में हथियार और सैन्य सामान बनते हैं तो न सिर्फ देश की सेनाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि उन्हें निर्यात भी किया जाएगा। इससे राज्य को आमदनी होगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा। पटना यूनिवर्सिटी के अविरल पांडेय कहते हैं, ‘बिहार सरकार का यह निर्णय बताता है कि वह चुनाव में किए गए अपने वादों को लेकर गंभीर है। बिहार की अर्थव्यवस्था में इंडस्ट्री का हिस्सा अभी भी लगभग 20% के आसपास है, जबकि दूसरे राज्यों में यह करीब 29% है। बिहार में हाई क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक वाली इंडस्ट्री की जरूरत है।’ बिहार को कैसे फायदा होगा, इसे समझिए… 29 मार्च 2025 को रक्षा मंत्रालय की जारी रिपोर्ट के मुताबिक… बड़े बाजार में हिस्सेदार होगा बिहारः 2029 तक रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ रुपए करने का टारगेट है। जो 2024-25 से दो गुना से ज्यादा है। डिफेंस कॉरिडोर बनने से बिहार को बड़े बाजार में शामिल होने का मौका मिलेगा। इससे अर्थव्यवस्था सुधरेगी। प्राइवेट कंपनियां आएंगी: देश के मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार में 16 डीपीएसयू, 430 से अधिक लाइसेंसी कंपनियां और करीब 16,000 MSME शामिल हैं। ये कंपनियां स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देती हैं। देश के रक्षा उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 21% है। प्राइवेट कंपनियां नई तकनीक और स्किल्ड को बढ़ावा देती हैं। इसका फायदा भी बिहार को होगा। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क क्या होता है? सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क में सेमीकंडक्टर तैयार होते हैं। इनसे चिप बनते हैं। मोबाइल से लेकर कार और सैटेलाइट तक, हर इलेक्ट्रॉनिक सामान में चिप लगते हैं। फिलहाल सेमीकंडक्टर के मामले में पूरी दुनिया चीन और ताइवान पर निर्भर है। भारत को भी अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आयात करना पड़ता है। सेमीकंडक्टर को आप इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का दिमाग समझिए। कंप्यूटर, लैपटॉप, कार, वॉशिंग मशीन, ATM, अस्पतालों की मशीन से लेकर हाथ में मौजूद स्मार्टफोन तक सेमीकंडक्टर चिप पर ही काम करते हैं। ये चिप एक दिमाग की तरह इन गैजेट्स को ऑपरेट करने में मदद करती है। इनके बिना हर एक इलेक्ट्रॉनिक आइटम अधूरा है। सेमीकंडक्टर चिप्स सिलिकॉन से बने होते हैं और सर्किट में इलेक्ट्रिसिटी कंट्रोल करने के काम आते हैं। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनने से बिहार को क्या फायदा होगा? भारत ने ग्लोबल सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का हिस्सा बनने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन यानी ISM की शुरुआत की है। सरकार का पूरा जोर सेमीकंडक्टर को लेकर आत्मनिर्भर बनने और विश्व के बाजार पर कब्जा करने की है। अर्थशास्त्री अविरल पांडेय बताते हैं, ‘बिहार में सेमीकंडक्टर पार्क बनने से हाई-स्किल्ड युवाओं को रोजगार का बड़ा बाजार देगा। McKinsey की रिपोर्ट भी बताती है कि भारत इंजीनियरिंग प्रतिभा का बड़ा निर्यातक है, ऐसे में बिहार में हाई तकनीक इंडस्ट्री लगाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।’ बिहार को क्या फायदा होगा? मेक इन इंडिया बूस्ट: यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को बूस्ट करेगा। देश के साथ-साथ बिहार अब चिप्स का यूजर नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरर भी बनेगा। नई जॉब्स मिलेंगी: एक छोटे प्लांट से 15,000+ डायरेक्ट और इनडायरेक्ट जॉब्स के अवसर बनेंगे। इंजीनियर्स, टेक्नीशियन और सपोर्ट स्टाफ के लिए ढेर सारे मौके होंगे। ग्लोबल टेक हब: यह पार्क बिहार को चिप बनाने वाले देशों (जैसे-चीन, ताइवान, साउथ कोरिया) की कतार में लाएगा। ये देश ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बढ़े प्लेयर्स हैं। सस्ते गैजेट्स: लोकल प्रोडक्शन से चिप्स सस्ते हो सकते हैं, जिससे फोन, लैपटॉप और कारें अफोर्डेबल हो सकती हैं। कितना बड़ा है सेमीकंडक्टर का बाजार? 2021 में भारतीय सेमीकंडक्टर मार्केट की वैल्यू 27.2 बिलियन डॉलर थी। इसके सालाना 19% की बढ़ोतरी के साथ 2026 तक 64 बिलियन डॉलर के होने की उम्मीद है। इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक 103.4 बिलियन डालर मतलब 91,800 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

इंपैक्ट फीचर:मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने पटना के कंकड़बाग में नए शोरूम का उद्घाटन किया

इंपैक्ट फीचर:मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने पटना के कंकड़बाग में नए शोरूम का उद्घाटन किया

आइसक्रीम से वैश्विक कंपनियों का मोहभंग:नेस्ले ने भी समेटा कारोबार, शुरू किया ऑपरेशन क्लीनअप; फोकस मुनाफे वाले मुख्य सेगमेंट पर

आइसक्रीम से वैश्विक कंपनियों का मोहभंग:नेस्ले ने भी समेटा कारोबार, शुरू किया ऑपरेशन क्लीनअप; फोकस- मुनाफे वाले मुख्य सेगमेंट पर

चांदी दो दिन में ₹16 हजार महंगी, कीमत ₹2.67 लाख/किलो:सोना ₹5 हजार बढ़ा, 10 ग्राम ₹1.60 लाख का हुआ

चांदी दो दिन में ₹16 हजार महंगी, कीमत ₹2.67 लाख/किलो:सोना ₹5 हजार बढ़ा, 10 ग्राम ₹1.60 लाख का हुआ

बफे के भरोसेमंद अजीत जैन ने गुरुग्राम में फ्लैट खरीदा:गुरुग्राम में dlf द केमेलियास में ₹85 करोड़ की डील; जिम, क्लब हाउस जैसी सुविधाएं

बफे के भरोसेमंद अजीत जैन ने गुरुग्राम में फ्लैट खरीदा:गुरुग्राम में DLF द केमेलियास में ₹85 करोड़ की डील; जिम, क्लब हाउस जैसी सुविधाएं

बफे के भरोसेमंद अजीत जैन ने गुरुग्राम में फ्लैट खरीदा:गुरुग्राम में dlf द केमेलियास में ₹85 करोड़ की डील; जिम, क्लब हाउस जैसी सुविधाएं

बफे के भरोसेमंद अजीत जैन ने गुरुग्राम में फ्लैट खरीदा:गुरुग्राम में DLF द केमेलियास में ₹85 करोड़ की डील; जिम, क्लब हाउस जैसी सुविधाएं

अमेजन ने एशिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑफिस खोला:बेंगलुरु में 11 लाख स्क्वेयर फीट में 12 मंजिला कैंपस; 7,000 लोग काम करेंगे

अमेजन ने एशिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑफिस खोला:बेंगलुरु में 11 लाख स्क्वेयर फीट में 12 मंजिला कैंपस; 7,000 लोग काम करेंगे

Leave a Comment

// Function to get current page info for sharing const currentUrl = window.location.href; const pageTitle = document.title; // --- 1. Follow Your Official Pages --- // These links go directly to the URLs you provided // Instagram Follow document.getElementById('wpliteInstagramFollow').addEventListener('click', function() { const instaUrl = 'https://www.instagram.com/worldprime.news?igsh=N3I0azl5ZTd1b3U5&utm_source=qr'; window.open(instaUrl, '_blank'); }); // Facebook Follow document.getElementById('wpliteFacebookFollow').addEventListener('click', function() { const fbUrl = 'https://www.facebook.com/share/1ATWDHQiYR/?mibextid=wwXIfr'; window.open(fbUrl, '_blank'); }); // --- 2. Share Current Page to Others --- // These remain as "Sharing" functions // WhatsApp Share document.getElementById('wpliteWhatsAppShare').addEventListener('click', function() { const whatsappUrl = 'https://api.whatsapp.com/send?text=' + encodeURIComponent(pageTitle + " " + currentUrl); window.open(whatsappUrl, '_blank'); }); // Twitter Share document.getElementById('wpliteTwitterShare').addEventListener('click', function() { const twitterUrl = 'https://twitter.com/intent/tweet?url=' + encodeURIComponent(currentUrl) + '&text=' + encodeURIComponent(pageTitle); window.open(twitterUrl, '_blank'); }); // --- 3. Mobile Native Share (The Floating Button) --- document.getElementById("mobileShareFloatingButton").addEventListener("click", function (e) { e.preventDefault(); if (navigator.share) { navigator.share({ title: pageTitle, url: currentUrl }) .then(() => console.log("Share successful")) .catch(err => console.error("Share failed", err)); } else { alert("Native sharing not supported. Use the icons below!"); } });