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आरोप- पुतिन ने अपने विरोधी को एपिबैटिडीन जहर देकर मारा:इससे पहले लकवा फिर दर्दनाक मौत होती है, दक्षिण अमेरिकी मेंढक में मिलता है

On: फ़रवरी 15, 2026 6:57 पूर्वाह्न
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आरोप पुतिन ने अपने विरोधी को एपिबैटिडीन जहर देकर मारा:इससे पहले लकवा फिर दर्दनाक मौत होती है, दक्षिण अमेरिकी मेंढक में मिलता है
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यूरोप के पांच देशों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर उनके विरोधी एलेक्सी नवलनी को ‘एपिबैटिडीन जहर’ देकर मारने का आरोप लगाया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने कहा है कि यूरोप की लैब में नवलनी के शरीर के नमूनों की जांच में एपिबैटिडीन पाया गया। ये जहर रूस में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता। इन देशों ने कहा कि रूस के पास यह जहर देने के साधन, मकसद और मौका तीनों थे। उन्होंने रूस के खिलाफ केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के उल्लंघन की शिकायत करने की बात कही है। नेशनल ज्योग्राफिक के मुताबिक, ये जहर दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले जहरीले डार्ट मेंढकों की त्वचा में मिलता है। यह जहर पहले शरीर को लकवाग्रस्त करता है, फिर सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है और आखिर में दर्दनाक मौत हो सकती है। एक डार्ट मेंढक का जहर 10 लोगों को मार सकता है डार्ट मेंढक करीब दो इंच लंबे होते हैं, लेकिन उनके शरीर में इतना जहर होता है कि वह लगभग 10 वयस्क लोगों को मार सकता है। इन मेंढकों की त्वचा से निकाले जाने वाले जहर को एपिबैटिडीन कहा जाता है। यह एक न्यूरोटॉक्सिन है, यानी ऐसा जहर जो सीधे नर्व सिस्टम पर असर करता है। इसे एक रासायनिक हथियार के रूप में भी जाना जाता है। डार्ट मेंढक का जहर धरती के सबसे घातक जहरों में गिना जाता है। यह मॉर्फीन से लगभग 200 गुना ज्यादा ताकतवर है। इससे शरीर को लकवा मार सकता है, सांस लेने में गंभीर दिक्कत पैदा हो सकती है और दर्दनाक मौत होती है। वैसे तो एपिबैटिडीन मेंढकों में प्राकृतिक रूप से मिलता है, लेकिन इसे लैब में भी बनाया जा सकता है। यूरोपीय वैज्ञानिकों को शक है कि इस मामले में इसे लैब में तैयार किया गया था। नवलनी आर्कटिक की जेल में सजा कर रहे थे नवलनी की 16 फरवरी 2024 को आर्कटिक की एक जेल में मौत हो गई थी, वो यहां 20123 साल की सजा काट रहे थे। वे सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते थे और विरोध प्रदर्शन करते थे। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि रूस नवलनी को खतरे के रूप में देखता था और इस तरह का जहर इस्तेमाल कर उसने दिखाया कि वह राजनीतिक विरोध से कितना डरता है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि पुतिन सत्ता में बने रहने के लिए बायोलॉजिकल हथियार तक इस्तेमाल करने को तैयार हैं। नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया ने कहा कि उन्हें पहले दिन से यकीन था कि उनके पति को जहर दिया गया था और अब इसका सबूत मिल गया है। उन्होंने पुतिन को हत्यारा बताते हुए जवाबदेह ठहराने की मांग की। वहीं रूसी अधिकारियों का कहना है कि नवलनी टहलने के बाद बीमार पड़े और उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी इन आरोपों को खारिज किया है। नवलनी को पहले भी जेल जहर देने की कोशिश हुई थी नवलनी पहले भी 2020 में जहर देने की कोशिश की गई थी। उस वक्त उन्हें ‘नोविचोक’ नाम का नर्व एजेंट दिया गया था। उन्होंने इसका आरोप क्रेमलिन पर लगाया था, लेकिन रूस ने इससे इनकार किया था। इलाज के लिए उन्हें जर्मनी ले जाया गया था। ठीक होने के बाद जब वे रूस लौटे तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और अपनी जिंदगी के आखिरी तीन साल जेल में बिताए। रूस पर पहले भी ऐसे हमलों के आरोप लगाते रहे हैं ब्रिटेन पहले भी रूस पर ऐसे हमलों का आरोप लगाता रहा है। 2018 में इंग्लैंड के सैलिस्बरी शहर में पूर्व रूसी एजेंट सर्गेई स्क्रिपल पर ‘नोविचोक’ नर्व एजेंट से हमला हुआ था। वे और उनकी बेटी गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। एक ब्रिटिश महिला डॉन स्टर्जेस की भी मौत हो गई थी। ब्रिटेन की जांच में कहा गया था कि इस हमले को हाई लेवल से मंजूरी मिली होगी। इसी तरह 2006 में लंदन में पूर्व रूसी एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की रेडियोएक्टिव पदार्थ पोलोनियम-210 से मौत हुई थी। ब्रिटिश जांच में कहा गया था कि दो रूसी एजेंटों ने उन्हें जहर दिया और संभव है कि इस ऑपरेशन को मंजूरी दी गई हो। हालांकि रूस ने इन सभी मामलों में अपनी भूमिका से इनकार किया है। 26 साल से रूस पर पुतिन का राज ​​​​​​​पुतिन पहली बार साल 2000 में रूस के राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले 1999 में उन्हें रूस के पहले राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने बतौर PM चुना था। 2000 से 2008 तक लगातार 2 कार्यकाल के दौरान पुतिन रूस के राष्ट्रपति पद पर काबिज रहे। रूस के संविधान के मुताबिक, पुतिन लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे। ऐसे में साल 2008 में पुतिन के सबसे बड़े समर्थकों में शामिल दिमित्री मेदवेदेव राष्ट्रपति बने। इस दौरान पुतिन ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद संभाला। 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति मेदवेदेव ने अपनी पार्टी से पुतिन को प्रेसिडेंट कैंडिडेट के लिए नॉमिनेट करने को कहा। इसके बाद 2012 के चुनाव में पुतिन ने दोबारा जीत हासिल की और वो सत्ता में लौट आए।

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