हरियाणा के भिवानी की पूजा बोहरा ने राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर श्रेणी में 10 खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बनकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड भी भिवानी की ही कविता चहल के नाम था, जिन्होंने 9 बार नेशनल खिताब जीते थे। ग्रेटर नोएडा में 10 जनवरी को समाप्त हुई 9वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप उन्होंने फाइनल मुकाबले में रोहतक की नैना को 5-0 से हराया, जो कि एक पूर्व युवा चैंपियन हैं। रतियोगिता के बाद मंगलवार को भिवानी लौटने पर पूजा का जोरदार स्वागत किया गया। पूजा का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने शुरुआत में परिवार से छुपाकर बॉक दिवाली के दौरान हाथ में पटाखा फटने से उनके हाथ जल गए, इसके बाद कंधे में चोट भी लगी। इसके बावजूद पूजा ने हार नहीं मानी और शादी के बाद भ दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूजा ने अपने 17 साल के मुक्केबाजी के अनुभव साझा किए। जब उन्हें पता चला तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि “कल से बॉक्सिंग बंद करो, अगर खे इसके बाद कोच ने पिता से मिलने जाकर उन्हें समझाया कि पूजा के पंच में दम है और वह इस क्षेत्र में सफल हो सकती हैं। (आगे की कहानी) । हरियाणा के भिवानी की पूजा बोहरा ने राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर कैटेगरी में 10 खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बनकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड भी भिवानी की ही कविता चहल के नाम था, जिन्होंने 9 बार नेशनल खिताब जीते थे। ग्रेटर नोएडा में 10 जनवरी को समाप्त हुई 9वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पूजा ने 75-80 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में रोहतक की नैना को 5-0 से हराया, जो कि एक पूर्व यूथ चैंपियन हैं। प्रतियोगिता के बाद मंगलवार को भिवानी लौटने पर पूजा का जोरदार स्वागत किया गया।
पूजा का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने शुरुआत में परिवार से छुपाकर बॉक्सिंग की प्रैक्टिस की। दिवाली के दौरान हाथ में पटाखा फटने से उनके हाथ जल गए, इसके बाद कंधे में चोट भी लगी। इसके बावजूद पूजा ने हार नहीं मानी और शादी के बाद भी रिंग में वापसी की। हर बार उन्होंने कमबैक किया। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूजा ने अपने 17 साल के मुक्केबाजी के अनुभव साझा किए।
पूजा ने बताया कि शुरुआत में उनके पिता को यह पता नहीं था कि उन्होंने बॉक्सिंग ट्रेनिंग शुरू कर दी है। जब उन्हें पता चला तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि “कल से बॉक्सिंग बंद करो, अगर खेलना है तो कोई और कर ले।” इसके बाद कोच ने पिता से मिलने जाकर उन्हें समझाया कि पूजा के पंच में दम है और वह इस क्षेत्र में सफल हो सकती हैं। तब उनके पिता ने… (आगे की कहानी)। हरियाणा के भिवानी की पूजा बोहरा ने राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर कैटेगरी में 10 खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बनकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड भी भिवानी की ही कविता चहल के नाम था, जिन्होंने 9 बार नेशनल खिताब जीते थे। ग्रेटर नोएडा में 10 जनवरी को समाप्त हुई 9वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पूजा ने 75-80 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में रोहतक की नैना को 5-0 से हराया, जो कि एक पूर्व यूथ चैंपियन हैं। प्रतियोगिता के बाद मंगलवार को भिवानी लौटने पर पूजा का जोरदार स्वागत किया गया।
पूजा का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने शुरुआत में परिवार से छुपाकर बॉक्सिंग की प्रैक्टिस की। दिवाली के दौरान हाथ में पटाखा फटने से उनके हाथ जल गए, इसके बाद कंधे में चोट भी लगी। इसके बावजूद पूजा ने हार नहीं मानी और शादी के बाद भी रिंग में वापसी की। हर बार उन्होंने कमबैक किया। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूजा ने अपने 17 साल के मुक्केबाजी के अनुभव साझा किए।
पूजा ने बताया कि शुरुआत में उनके पिता को यह पता नहीं था कि उन्होंने बॉक्सिंग ट्रेनिंग शुरू कर दी है। जब उन्हें पता चला तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि “कल से बॉक्सिंग बंद करो, अगर खेलना है तो कोई और कर ले।” इसके बाद कोच ने पिता से मिलने जाकर उन्हें समझाया कि पूजा के पंच में दम है और वह इस क्षेत्र में सफल हो सकती हैं। तब उनके पिता ने… (आगे की कहानी)।










