हम अक्सर चिप्स, कुकीज़ या नमक के पैकेट खरीदते हैं और उन्हें खाते हैं। बहुत कम लोग पैकेट को पलटकर देखते हैं कि वे जो भोजन खा रहे हैं, उसके पोषक तत्व और मूल्य क्या है? इसमें कितना शुगर, नमक या फैट है? पैकेट पर लिखी यह जानकारी ही बताती है कि खाना कितना स्वस्थ है या कितना अस्वस्थ। लेकिन अगर यह जानकारी पैकेज और अगर आपके सामने रंगों और ग्राफिक्स के साथ एक सरल तरीका है, तो यह जानकारी एक नज़र में हमें बहुत आसानी से मिल जाएगी। इसे ‘फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग’ कहा जाता है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) और केंद्र सरकार को एक आवश्यक निर्देश दिया कोर्ट ने कहा है कि पैक किए गए खाद्य पदार्थों पर “फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल” लगाने पर विचार किया जाए। यह लेबल पैकेट के सामने ही आवश्यक जानकारी दिखाएगा ताकि कंपनी जूमर खरीदने से पहले ही जान लें इसमें कितना शुगर, नमक और फैट है। इसलिए आज की जरूरी खबर में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रधान सलाहकार, आंतरिक चिकित्सा, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली प्रश्न – ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ क्या है? उत्तर: फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग (एफओपीएल) वह लेबल है जो किसी खाद्य उत्पाद के पैकेट के आगे के हिस्से पर लिखा होता है।
जरूरत की खबर- लगाओ ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’- सुप्रीम कोर्ट: पैकेट पर लिखा होगा, ‘फूड हेल्दी या अनहेल्दी’ जानें यह क्यों जरूरी है
By worldprime
On: फ़रवरी 18, 2026 4:30 पूर्वाह्न
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