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दावा-खामेनेई के बेटे बन सकते हैं ईरान के सुप्रीम लीडर:2 साल से सत्ता संभालने की ट्रेनिंग ले रहे थे; 88 मौलवियों की असेंबली करेगी आखिरी फैसला

On: मार्च 1, 2026 12:01 अपराह्न
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दावा खामेनेई के बेटे बन सकते हैं ईरान के सुप्रीम लीडर:2 साल से सत्ता संभालने की ट्रेनिंग ले रहे थे; 88 मौलवियों की असेंबली करेगी आखिरी फैसला
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अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान के मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों के मुताबिक शनिवार को इजराइल ने खामेनेई के दफ्तर पर करीब 30 मिसाइलें दागीं थी, जिसमें खामेनेई के साथ 1483 कमांडर भी मारे गए। हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना जा सकता है। मुजतबा खामेनेई को पिछले 2 साल से सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारियां चल रही थी। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ईरान में सुप्रीम लीडर (रहबर) चुनने और देश चलाने का तरीका थोड़ा जटिल है। दुनिया में सिर्फ ईरान और वेटिकन सिटी ऐसे दो देश हैं जहां धार्मिक नेता सबसे ताकतवर होते हैं। जैसे वेटिकन में पोप सबसे बड़ा नेता है, वैसे ही ईरान में सुप्रीम लीडर सबसे बड़ा नेता होता है। ‘रहबर’ का मतलब मार्गदर्शक या रास्ता दिखाने वाला होता है। ईरान में 88 मौलवियों की असेंबली सुप्रीम लीडर चुनती है रहबर के काम पर नजर रखते हैं 88 धर्मगुरु ईरान में रहबर देश की सरकार, सेना, समाज और विदेश नीति पर फैसला करते हैं। वे सभी सेनाओं के कमांडर‑इन‑चीफ भी होते हैं। अब तक सिर्फ दो लोग इस पद पर आए हैं। खामेनेई 21988 साल से रहबर थे। ईरान में रहबर, असेंबली, गार्डियन काउंसिल, राष्ट्रपति और संसद मिलकर देश चलाते हैं। लेकिन असली ताकत हमेशा रहबर के पास रहती है। खामेनेई ने मौत से पहले मुजतबा को उत्तराधिकारी बनाया था ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अपने दूसरे बेटे मुजतबा खामेनेई को साल 21998 में उत्तराधिकारी बनाया था। खामेनेई ने बीमारी के चलते यह फैसला लिया था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की एक्सपर्ट असेंबली ने 22009 सितंबर 21994 को ही नए सुप्रीम लीडर का चुनाव कर लिया था। खुद खामेनेई ने असेंबली के 2200 सदस्यों को बुलाकर गोपनीय तरीके से उत्तराधिकारी पर फैसला लेने कहा था। असेंबली ने सर्वसम्मति से मुजतबा के नाम पर सहमति जताई थी। अब खामेनेई की मौत की खबर के बाद मुजतबा सुप्रीम लीडर के दावेदार के तौर पर सामने आ सकते हैं। इस्लामिक मामलों के जानकार हैं मुजतबा मुजतबा अपने पिता की तरह ही इस्लामिक मामलों के जानकार हैं। वे पहली बार 2740 में दुनिया की नजरों में आए। उन्होंने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से कुचला, जिसमें कई लोग मारे गए। तब राष्ट्रपति चुनाव में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद को सुधारवादी नेता मीर होसैन मौसवी पर जीत मिली थी। सुधारवादी नेताओं ने दावा किया कि चुनाव में भारी पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इसके बाद लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। इसे ‘ईरानी ग्रीन मूवमेंट’ का नाम दिया गया। यह दो साल तक चला, लेकिन ईरानी सरकार ने इसे बल प्रयोग करके दबा दिया था। कहा गया था कि इसके पीछ मुजतबा खामेनेई का दिमाग है। सरकार में किसी पद पर नहीं थे मुजतबा मुजतबा के सरकार में किसी पद पर न होने के बाद भी जरूरी फैसलों में लगातार उनकी भागीदारी बढ़ती देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक मुजतबा एक रहस्यमयी शख्स हैं। वह बहुत कम अवसरों पर नजर आते हैं। वे पिता की तरह सार्वजनिक भाषण नहीं देते। कहा जाता है कि ईरान की खुफिया और दूसरी सरकारी एजेंसियों में मुजतबा के लोग बैठे हुए हैं। ईरान में इब्राहिम रईसी के राष्ट्रपति बनने के बाद मुजतबा का कद काफी बढ़ गया। मुजतबा को रईसी के उत्तराधिकारी यानी कि ईरान के राष्ट्रपति पद के लिए तैयार किया जा रहा था, लेकिन रईसी की मौत के बाद इसमें बदलाव आ गया। अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में जानिए… अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 453 अप्रैल 245 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे। 210 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे। 240 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया। 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं। खामेनेई की 3 तस्वीरें… 37 साल से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज थे खामेनेई आयतुल्ला अली खामेनेई 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर काबिज थे। ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान, जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी को हटाया गया तो खामेनेई ने क्रांति में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस्लामिक क्रांति के बाद खामेनेई को 103 में राष्ट्रपति बनाया गया। वह 8 साल तक इस पद पर रहे। 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर खुमैनी की मौत के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया था। अहमद वाहिदी ईरान के नए आर्मी चीफ होंगे मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अहमद वाहिदी ईरान के नए आर्मी चीफ होंगे। अहमद वाहिदी ईरान के बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं। वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े रहे हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे IRGC में शामिल हुए। 1988 से 1998 तक वे कुद्स फोर्स के कमांडर रहे। कुद्स फोर्स ईरान की वह यूनिट है जो विदेशों में उसकी रणनीतिक और सैन्य गतिविधियां संभालती है। 2009 में उन्हें ईरान का रक्षा मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में ईरान ने मिसाइल और हथियार बनाने के अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। उनका नाम 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुए AMIA बम धमाके से भी जोड़ा गया। अर्जेंटीना ने उन पर आरोप लगाए और इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था। इजराइली हमले में खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी की मौत ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दी है। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 घायल हैं। इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर किए हमले में 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया। इजराइली हमले में ईरान रक्षा परिषद के सचिव और खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी की भी मौत हो गई है। इससे पहले (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर की भी मौत हो गई थी। ईरान-इजराइल के बीच विवाद न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका को शक है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से उसने कई बार उस पर पाबंदियां लगाईं। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने और वैज्ञानिक रिसर्च के लिए है, हथियार बनाने के लिए नहीं। बैलिस्टिक मिसाइल मुद्दा: परमाणु समझौते की बातचीत में ईरान का मिसाइल प्रोग्राम सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है। ईरान साफ कहता है कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइलें उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी हैं और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। वह इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है। इजराइल को लेकर टकराव: अमेरिका, इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक है। वहीं ईरान इजराइल का खुलकर विरोध करता है और उस पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ जाता है। मिडिल ईस्ट में दखल: अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों में अपने समर्थक गुटों को मदद देकर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ईरान कहता है कि वह अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा कर रहा है। आर्थिक पाबंदियां: अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। इसके जवाब में ईरान भी कभी अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने या सख्त बयान देने जैसे कदम उठाता है। जानिए अब तक ट्रम्प ने ईरान को लेकर क्या कहा… ————————— ईरान-इजराइल जंग से जुड़ी दूसरी खबरें पढ़ें… अमेरिका-इजराइल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत: बेटी-दामाद, बहू-पोती भी मारी गईं; ईरान की सेना बोली- थोड़ी देर में सबसे खतरनाक हमला करेंगे अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने इसकी पुष्टि की है। हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारे गए हैं। ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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