कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की घोषणा की है। सीएम सिद्दारमैया ने कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उन पर गलत असर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने 2026-27 के राज्य बजट भाषण में कहा कि इस बैन को किस तरह लागू किया जाएगा, इसकी तैयारी चल रही है। यह प्रस्ताव देश के डेटा सुरक्षा कानून डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP) और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 से भी जुड़ा है। इसके तहत बच्चों को अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति और उनकी वयस्कता की पुष्टि जरूरी होगी। इसके लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर का उपयोग किया जा सकता है। वहीं आंध्र प्रदेश में सरकार को 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने का सुझाव मिला है। मुख्यमंत्री CM एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी। सरकार स्कूल-कॉलेजों में नशे पर रोक की कोशिश कर्नाटक के बजट भाषण में सीएम ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय छात्रों के स्वास्थ्य, व्यक्तित्व और भविष्य को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों में नशे की समस्या रोकने के लिए भी कदम उठाने की बात कही है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, सख्त अनुशासन लागू किया जाएगा और छात्रों के लिए सहायता व काउंसलिंग केंद्र बनाए जाएंगे। DPDP एक्ट की 5 सबसे जरूरी बातें… कंसेंट बिना डेटा नहीं ले सकते: कोई कंपनी या ऐप आपका पर्सनल डेटा कलेक्ट करने से पहले साफ-साफ बताएगी कि इसका क्या यूज होगा। बिना आपकी इजाजत के ये नहीं कर सकतीं। अगर आप नहीं चाहते, तो डेटा शेयर न करें- ये आपका हक है। डेटा सिर्फ जरूरी काम के लिए: कंपनियां आपका डेटा सिर्फ वही काम कर सकती हैं जो उन्होंने बताया। मिसाल के तौर पर, शॉपिंग ऐप सिर्फ ऑर्डर के लिए यूज करेगी, मार्केटिंग के लिए नहीं। अगर गलत यूज हो, तो आप शिकायत कर सकते हैं। अपना डेटा कंट्रोल में रखें: आप कभी भी अपनी जानकारी देख सकते हैं, गलतियां सुधार सकते हैं, अपडेट कर सकते हैं या पूरा डेटा डिलीट करवा सकते हैं। कंपनियों को 90 दिनों के अंदर जवाब देना पड़ेगा। डेटा लीक होने पर तुरंत खबर: अगर आपका डेटा चोरी या ब्रेक होता है, तो कंपनी को तुरंत घंटों में आपको आसान भाषा यानी आपके समझने लायक भाषा में बताना पड़ेगा- क्या हुआ, असर क्या हो सकता है और क्या कदम उठाए। इससे आप सतर्क रह सकेंगे। शिकायत आसान, बोर्ड डिजिटल: कोई प्रॉब्लम हो तो डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड पर ऑनलाइन या ऐप से शिकायत करें। ये फ्री है और ट्रैकिंग आसान। अगर संतुष्ट न हों, तो TDSAT कोर्ट में अपील कर सकते हैं। छोटे बिजनेस के लिए भी कंप्लायंस आसान रखा गया है, ताकि सर्विसेज महंगी न हों। डेटा ब्रेक और शिकायतों का क्या होगा? अगर पर्सनल डेटा ब्रेक होता है, तो डेटा फिड्यूशरी को तुरंत अफेक्टेड लोगों को प्लेन लैंग्वेज में बताना पड़ेगा। जैसे- ब्रेक की नेचर, इसका क्या प्रभाव हो सकता है, क्या कदम उठाने चाहिए और किससे मदद लेनी चाहिए। लोगों को राइट्स मिले हैं- अपना डेटा एक्सेस, करेक्ट, अपडेट या इरेज करने के। नॉमिनी भी ये अधिकार मिलेंगे। सभी रिक्वेस्ट्स पर मैक्सिमम 90 दिनों में रिस्पॉन्स देना पड़ेगा। शिकायतों के लिए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड डिजिटल होगा जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप से फाइल और ट्रैक कर सकेंगे। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र की चेतावनी, कहा- कंपनियां ऐसे कंटेंट पर रोक लगाएं, नहीं तो केस होगा केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अश्लील कंटेंट को लेकर चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि कंपनियां अश्लील, भद्दे, पोर्नोग्राफिक, बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले और गैर-कानूनी कंटेंट पर तुरंत रोक लगाएं। यदि कंपनियां ऐक्शन नहीं लेंगी तो उन पर केस चलेगा। पूरी खबर पढ़ें…
कर्नाटक- बच्चों के सोशल मीडिया यूज पर बैन लगेगा:अकांउट के लिए पैरेंट्स की परमिशन जरूरी होगी; आंध्र भी 90 दिन में बैन लगाएगा
By worldprime
On: मार्च 6, 2026 3:52 अपराह्न
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