CG Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नई शिक्षा नीति-2020 को लेकर सदन में जोरदार चर्चा हुई। नीति लागू हुए करीब छह साल बीत जाने के बावजूद प्रदेश में इसे पूरी तरह लागू नहीं किए जाने का मुद्दा विपक्ष ने उठाया। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस विधायकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को इस मुद्दे पर घेरा।
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य में नई शिक्षा नीति का पालन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या शिक्षा नीति के तहत सभी स्कूलों में छात्रों के अनुपात के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत 22 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था का प्रावधान है, जबकि छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण के बाद औसतन 19 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। हालांकि मंत्री यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि यह व्यवस्था सभी स्कूलों में लागू है या नहीं। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदेश के सभी स्कूलों में नई शिक्षा नीति अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।

मंत्री ने इसके पीछे युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने और कुछ मामलों के न्यायालय में लंबित होने को कारण बताया। उन्होंने कहा कि इसी वजह से कई स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था अभी शेष है। वहीं स्कूलों के मर्जर और यूडाइस कोड समाप्त करने के सवाल पर मंत्री ने बताया कि विभाग की ओर से अलग-अलग यूडाइस कोड की जगह एक ही कोड रखने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश के सवालों पर मंत्री ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में फिलहाल प्री-प्राइमरी की व्यवस्था नहीं है। नई शिक्षा नीति के अनुसार 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी और बालवाड़ी की व्यवस्था की गई है। राज्य में 11 हजार बालवाड़ी स्वीकृत किए गए हैं।
चर्चा के दौरान विधायक शेषराज हरबंश ने आरोप लगाया कि प्रदेश में हजारों स्कूलों को बंद कर दिया गया है, जिसमें जांजगीर जिले के कई स्कूल भी शामिल हैं। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्कूल बंद नहीं किए गए हैं, बल्कि उन्हें मर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब करीब 87 प्रतिशत स्कूल एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं और उसी आधार पर प्राचार्य की व्यवस्था की गई है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि आज गांव-गांव में निजी स्कूल खुल रहे हैं और सरकारी स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं है। इस पर मंत्री ने माना कि प्रदेश में 7 हजार से अधिक निजी स्कूल खुल चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसके कारणों की समीक्षा की जाएगी और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जाएगा, ताकि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे फिर से सरकारी स्कूलों की ओर लौट सकें।






