यह कहानियां केवल अंकों की नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस की हैं, जिसने मौत और मुसीबत को मात देकर कामयाबी का परचम लहराया है। कहते हैं कि लोहे को जितना तपाया जाता है, वह उतना ही निखरता है। राजस्थान के इन होनहारों ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। बोर्ड एग्जाम की दहलीज पर खड़ी इन प्रतिभाओं के सामने जब दुखों का पहाड़ टूटा, तो एक पल के लिए कदम डगमगाए, लेकिन टूटे नहीं। किसी के सिर से पिता का साया उठ गया, तो किसी के घर पुलिस की आहट ने सुकून छीन लिया। मगर इन चुनौतियों को ढाल बनाकर इन्होंने जो परिणाम दिए, उसने पूरे परिवार और चाहने वालों की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए। बाड़मेर के गुड़ामालानी के रहने वाले भावेश गोदारा के बोर्ड एग्जाम चल रहे थे। इस बीच पिता बाबूलाल गोदारा को हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया। भावेश ने कदम पीछे नहीं खींचे और 97.67% मार्क्स हासिल किए। जालोर की चंद्रिका विश्नोई के पिता की पुलिस केस के सिलसिले में जांच चल रही है। पुलिस वाले घर आते तो डिस्टर्ब हो जाती। लेकिन पिता का सपना पूरा करने की ठानी और 99 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए। हिंडौन सिटी (करौली) की रहने वाली खुशबू शर्मा के अर्धवार्षिक एग्जाम (2025) चल रहे थे। इसी दौरान पिता की एक हादसे में मौत हो गई। मां बच्ची की ढाल बनी, जिसके बाद खुशबू 99% मार्क्स लेकर आई। पढ़िए… ऐसे ही होनहारों की कहानी पिता इंजीनियर बना?
एग्जाम के बीच पिता चल बसे,फिर भी 97.67% मार्क्स लाए:परिजनों को खोने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत; पढ़िए 10वीं बोर्ड के टॉपर्स के संघर्ष की कहानी
By worldprime
On: मार्च 25, 2026 6:21 पूर्वाह्न
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