केरल में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। पिछले दस साल से लेफ्ट के नेतृत्व वाला LDF यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सत्ता में है। LDF की ओर से मुख्यमंत्री पी. विजयन चुनावी कमान संभाल रहे हैं। 80 साल के विजयन प्रचार से लेकर विरोधियों के आरोपों का जवाब देने तक हर मोर्चे पर सक्रिय हैं। यहां मुकाबला सीधे कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से है। हालांकि वे कहते हैं कि कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्व वाले रुख की वजह से उसका कोर वोट बैंक धीरे-धीरे भाजपा की ओर जा रहा है। विजयन ने भास्कर के कई सवालों के जवाब दिए… सवाल: 10 साल की एंटी इंकंबेंसी और विपक्ष के भ्रष्टाचार के आरोपों को कैसे देखते है? जवाब: कोई एंटी इंकंबेंसी नहीं है। हम 10 साल से लगातार कल्याणकारी और विकास वाली सरकार चला रहे हैं। बाढ़ हो या वैश्विक महामारी, हम हमेशा जनता के साथ खड़े रहे। स्वास्थ्य और शिक्षा का हमारा ढांचा दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बन चुका है। सवाल: इस चुनाव में UDF कितनी बड़ी चुनौती है? सवाल: भाजपा आपके लिए कितनी बड़ी चुनौती है? जवाब: केरल में सांप्रदायिक राजनीति के लिए जगह नहीं है। भाजपा चाहे जितनी ताकत और पैसा लगा ले, यहां अपनी जड़ें नहीं जमा पाएगी। यहां के लोग उन दलों के साथ हैं, जो पूरी तरह सेक्यूलरिज्म और अल्टरनेटिव डेवलपमेंट मॉडल में यकीन करते हैं। हां, यह जरूर दिख रहा है कि कांग्रेस का वोट भाजपा की ओर जा रहा है। नेमोन और त्रिशुर जैसी जगहों पर यह साफ नजर आया है। यह कांग्रेस के राजनीतिक गिरावट को दिखाता है। सवाल: RSS को किस नजरिए से देखते हैं? जवाब: वामपंथ किसी भी ऐसे संगठन को स्वीकार नहीं कर सकता और न ही उसकी सराहना कर सकता है, जो सांप्रदायिकता के जरिए देश को बांटने और लोगों को अलग करने का काम करता है। सवाल: लाखों केरलवासी खाड़ी देशों में हैं। युद्ध के बीच आपने अब तक उनके लिया क्या किया? जवाब: खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों मलयाली केरल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। राज्य सरकार लोका केरलम सभा और नोरका रूट्स के जरिए प्रवासी मलयाली समुदाय और संबंधित दूतावासों के साथ लगातार संपर्क में है। मैंने इस बारे में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को औपचारिक पत्र भी लिखा है। सवाल: कांग्रेस आरोप लगाती है कि आपके पीएम मोदी से अच्छे संबंध हैं… इस पर क्या कहेंगे? जवाब: यह राजनीतिक आरोप हैं और पूरी तरह निराधार हैं। मेरा प्रधानमंत्री से सिर्फ संवैधानिक और आधिकारिक जिम्मेदारी वाला संबंध है। हमारे पद संघीय व्यवस्था का हिस्सा हैं। लेकिन भाजपा की नीतियों के खिलाफ राजनीतिक रूप से वामपंथ ही मजबूती से खड़ा है। इस मामले में कोई समझौता नहीं है। सवाल: क्या राजनीति में लेफ्ट का स्थान खत्म हो रहा है? जवाब: वामपंथ (लेफ्ट) को सिर्फ सीटों की संख्या से नहीं आंका जा सकता। आज देश के सामने बड़ी चुनौती कॉरपोरेट समर्थक, अवसरवादी नीतियां और सांप्रदायिकता है। इनके खिलाफ सिर्फ वामपंथ ही एकमात्र अडिग विकल्प है। जमीन पर देखें तो आज भी देश के कई हिस्सों में किसानों, गरीबों और मजदूरों के बड़े आंदोलनों का नेतृत्व वामपंथी दल और संगठन ही कर रहे हैं। सवाल: चुनाव में किस संदेश के साथ उतरे हैं? जवाब: केरल आशावादी द्वीप है। पूरा देश इसे सांप्रदायिकता और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष के रूप में देखता है। हमें राज्य की एकता, शांति और विकास की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। हम केंद्र की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत लोकतांत्रिक जनादेश मांग रहे हैं, जो केरल को आर्थिक रूप से प्रभावित कर रही हैं। —————–
केरल के CM बोले-सॉफ्ट हिंदुत्व से कांग्रेस का वोट खिसका:इससे भाजपा को फायदा; राज्य में सांप्रदायिक राजनीति की कोई जगह नहीं
By worldprime
On: मार्च 30, 2026 7:36 पूर्वाह्न
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