एआई और अन्य डिजिटल साधनों के कारण हम खुद किसी बात को याद रखने या विचार करने के लिए दिमाग पर जोर नहीं देते। इससे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स के बीच के कनेक्शन कमजोर होने लगते हैं। विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को ‘डिजिटल डिमेंशिया’ कहा जा रहा है। क्या करें, रोज कुछ हाथों से लिखें, मस्तिष्क सक्रिय रहेगा ‘एक्टिव रिकॉल’ अपनाएं यानी किसी भी सर्च से पहले दो मिनट स्वयं याद करें। रोजाना कुछ हाथों से लिखें, इससे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स सक्रिय होते हैं। अकेलापन और एंग्जाइटी- एआई को ही पार्टनर या दोस्त समझने की भूल कर रहे हैं लोग कई लोगों ने अब एआई को ही डिजिटल पार्टनर या दोस्त बना लिया है। वे घंटों इससे बातें करते हैं और अपनी भावनाओं के लिए सुझाव लेते हैं। इससे लोगों में अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है, वे बहुत जल्दी तनाव और एंग्जायटी की चपेट में आ रहे हैं। क्या करें, अपनों से खूब बात करें, खुशी मिलेगी तनाव घटाने वाला ऑक्सीटोसिन मानवीय संवाद से मिलता है। एआई के बजाय प्रियजनों से बात करें। सोने से एक घंटा पहले डिजिटल डिटॉक्स करें।
एआई ‘डिजिटल डिमेंशिया’ दे रहा है:मस्तिष्क के न्यूरॉन्स के बीच के कनेक्शन कमजोर कर रहा है एआई, जानिए असर और बचाव
By worldprime
On: अप्रैल 7, 2026 12:52 अपराह्न
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