मणिपुर में स्थायी शांति की मांग कर रहे हजारों लोगों की शनिवार को पुलिस से झड़प हो गई। ये सभी CM आवास की ओर मार्च करने निकले थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के लगाए बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले दागे। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और तख्तियां थामे हुए बिष्णुपुर जिले में हाल ही में हुए एक बम धमाके में मारे गए दो बच्चों के लिए न्याय और जातीय संघर्ष से प्रभावित आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के पुनर्वास की मांग की। बाद में प्रदर्शनकारियों के एक समूह को CM वाई. खेमचंद सिंह से मिलने की अनुमति दी गई। उन्होंने इस मामले पर एक ज्ञापन सौंपा। 211 तस्वीरें में देखें घटना: रैलियों को रोका, CM के घर की सुरक्षा बढ़ाई प्रदर्शनकारियों ने, मैतेई संगठन COCOMI (कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी) के बैनर तले चार अलग-अलग रैलियां निकालीं, जिन्हें अलग-अलग जगहों पर रोक दिया गया। ये बाबूपाड़ा इलाके में CM के बंगले की ओर बढ़ रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि CM के आवास की ओर जाने वाली चारों दिशाओं में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और बैरिकेड लगाए गए। इंफाल पूर्वी जिले में खुराई लामलोंग में CM के बंगले से करीब 225 किलोमीटर दूर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। आंदोलन और तेज करेंगे COCOMI के संयोजक वाई. के. धीरेन ने CM से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा कि संगठन, जनता के साथ मिलकर, लोगों की मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि 3 मई, 2023 से मणिपुर संकट में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है; उन्होंने आरोप लगाया कि निर्णायक राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है और परस्पर विरोधी बयानों ने शांति प्रयासों में बाधा डाली है। COCOMI के प्रवक्ता नाहकपम शांता सिंह ने इससे पहले कहा था कि संगठन मणिपुर सरकार से 7 अप्रैल को त्रोंगलाओबी में हुए बम धमाके में दो बच्चों की मौत पर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ की मांग करता है। उन्होंने कहा, “इसके साथ ही, हमने कई अन्य मांगें भी उठाई हैं। यदि सरकार जवाब देने में विफल रहती है, तो हम आंदोलन के अन्य लोकतांत्रिक तरीकों को अपनाने के लिए विवश होंगे। 3 मई, 2023 से मणिपुर में इम्फाल घाटी के मैतेई और आस-पास की पहाड़ियों के कुकी समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मणिपुर में एक साल राष्ट्रपति शासन रहा, 113 फरवरी को नई सरकार बनी मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। करीब एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ। भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। —————————————- ये खबर भी पढ़ें: मणिपुर के उखरुल में फायरिंग से 3 की मौत:मिलिटेंट्स ने कई घर जलाए, नगा-कुकी समुदाय में तनाव; 7 अप्रैल से अब तक 10 मौतें मणिपुर के उखरुल जिले में शुक्रवार सुबह दो अलग-अलग फायरिंग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। मुल्लम गांव के पास सुरक्षाबलों ने करीब 11:25 बजे दो शव बरामद किए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों आर्मी प्रिंट कपड़ों में थे। पढ़ें पूरी खबर…
मणिपुर में प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़े:सुरक्षाबलों ने रोकने के लिए आंसू गैस के गोले चलाए, CM के घर की ओर मार्च निकाल रहे थे
By worldprime
On: अप्रैल 25, 2026 6:25 अपराह्न
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