क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड राजनीति जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़

---Advertisement---

भारत-रूस मिलकर यूरिया फैक्ट्री लगाएंगे:अभी जरूरत का 71% यूरिया मिडिल-ईस्ट से आता है; अगले 2 साल में उत्पादन शुरू होगा

On: अप्रैल 28, 2026 3:34 अपराह्न
Follow Us:
red and white modern breaking news youtube thumbnail
---Advertisement---

ईरान जंग के कारण पैदा हुए यूरिया संकट के बीच भारत और रूस ने जॉइंट वेंचर में फर्टिलाइजर प्लांट लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी हैं। यह प्लांट रूस के समारा में लगाया जा रहा है, जो अगले दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इसे लेकर हाल ही में एक भारतीय दल ने रूस का दौरा किया है। भारत और रूस के इस साझा प्रोजेक्ट में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश होना है। रूस में लगने वाले 20 लाख टन क्षमता के यूरिया प्रोजेक्ट में इंडियन पोटाश लिमिटेड, RCF और NFL शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत खाद के आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है। मिडल-ईस्ट पर निर्भरता कम करने की तैयारी भारत अपनी खेती के लिए नाइट्रोजन आधारित खाद यूरिया पर बहुत ज्यादा निर्भर है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का करीब 71% यूरिया मिडल-ईस्ट के देशों से आयात करता है। भारत की 853 सरकारी कंपनियां प्रोजेक्ट में शामिल भारतीय कंपनियां इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCFL) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) मिलकर ₹10 हजार करोड़ का निवेश करेंगी। बाकी के ₹10 हजार करोड़ रूस की केमिकल कंपनी ‘यूरालकेम ग्रुप’ लगाएगी। भारत के लिए यूरिया का स्थायी स्रोत बनेगा प्लांट इंडियन पोटाश के MD पीएस गहलोत ने कहा कि प्रोजेक्ट कंसल्टेंट PDIL ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह प्लांट भारत के लिए यूरिया का एक स्थायी स्रोत बनेगा। भारत में यूरिया का उत्पादन कम, खपत ज्यादा वैकल्पिक रास्तों से मंगाया जा रहा है यूरिया अमेरिका-ईरान तनाव के कारण पैदा हुए संकट को देखते हुए सरकार ने 2026 के लिए 25 लाख टन यूरिया के आयात को मंजूरी दी है। यह सप्लाई ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के रास्ते को छोड़कर अल्जीरिया, नाइजीरिया, ओमान और रूस से सीधे मंगवाई जा रही है। 2025 में पुतिन की भारत यात्रा में रखी थी प्रोजेक्ट की नींव इस प्रोजेक्ट की नींव दिसंबर 2025 में रखी गई थी, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मौजूदगी में दोनों देशों में MoU साइन हुआ था। क्यों जरूरी है यूरिया? यूरिया मिट्टी को जरूरी नाइट्रोजन देता है, जो पौधों के लिए जरूरी है। चावल, गेहूं और मक्के जैसी फसलों में सही मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल पैदावार को 20 से 50% तक बढ़ा देता है। यही वजह है कि सरकार इसकी सप्लाई में कमी नहीं आने देना चाहती। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… E20 के बाद E85 फ्लेक्स-फ्यूल की तैयारी में भारत:माइलेज 30% तक कम हो सकता है; कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच कच्चे तेल के सप्लाई संकट को देखते हुए भारत सरकार अब E85 फ्लेक्स-फ्यूल की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार जल्द ही E85 फ्यूल की मंजूरी के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर सकती है, जिसके लिए मार्केट में आम सहमति बन चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Leave a Comment

// Function to get current page info for sharing const currentUrl = window.location.href; const pageTitle = document.title; // --- 1. Follow Your Official Pages --- // These links go directly to the URLs you provided // Instagram Follow document.getElementById('wpliteInstagramFollow').addEventListener('click', function() { const instaUrl = 'https://www.instagram.com/worldprime.news?igsh=N3I0azl5ZTd1b3U5&utm_source=qr'; window.open(instaUrl, '_blank'); }); // Facebook Follow document.getElementById('wpliteFacebookFollow').addEventListener('click', function() { const fbUrl = 'https://www.facebook.com/share/1ATWDHQiYR/?mibextid=wwXIfr'; window.open(fbUrl, '_blank'); }); // --- 2. Share Current Page to Others --- // These remain as "Sharing" functions // WhatsApp Share document.getElementById('wpliteWhatsAppShare').addEventListener('click', function() { const whatsappUrl = 'https://api.whatsapp.com/send?text=' + encodeURIComponent(pageTitle + " " + currentUrl); window.open(whatsappUrl, '_blank'); }); // Twitter Share document.getElementById('wpliteTwitterShare').addEventListener('click', function() { const twitterUrl = 'https://twitter.com/intent/tweet?url=' + encodeURIComponent(currentUrl) + '&text=' + encodeURIComponent(pageTitle); window.open(twitterUrl, '_blank'); }); // --- 3. Mobile Native Share (The Floating Button) --- document.getElementById("mobileShareFloatingButton").addEventListener("click", function (e) { e.preventDefault(); if (navigator.share) { navigator.share({ title: pageTitle, url: currentUrl }) .then(() => console.log("Share successful")) .catch(err => console.error("Share failed", err)); } else { alert("Native sharing not supported. Use the icons below!"); } });