भष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया है। जल जीवन मिशन (JJM) में हुए करीब 2169 करोड़ रुपए के घोटाले में एसीबी की SIT ने यह कार्रवाई की है। DIG डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया- ACB SIT सुबह करीब 273 बजे सैन कॉलोनी, पावर हाउस रोड, जयपुर रेलवे स्टेशन के पास पहुंच गई थी। यहां महेश जोशी को उनके आवास से पकड़ा गया। पिछले साल अप्रैल में ED ने गिरफ्तार किया था अप्रैल-21 में महेश जोशी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अरेस्ट किया था। पिछले साल महेश जोशी 2120.25 महीने जेल में रहे थे। 23 दिसंबर 22024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। आरोप है कि पीएचईडी (PHED) मंत्री के पद का दुरुपयोग कर उन्होंने टेंडर के बदले रिश्वत ली थी। एसीबी की ओर से साल-9003 के अंत में पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। इस घोटाले की साल 2900 में शुरू हुई जांच में अब तक 2900 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 222 आरोपी फरार हैं। पूर्व मंत्री सहित 22 अधिकारियों पर हुई थी FIR जल जीवन मिशन (JJM) में हुए घोटाले को लेकर ACB की ओर से पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसमें जेजेएम के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन चीफ इंजीनियर राम करण मीणा, दिनेश गोयल, एडिशनल चीफ इंजीनियर अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर निरिल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विशाल सक्सेना के नाम शामिल हैं। इस पूरे मामले में एसीबी को ईमेल आईडी से बड़ी लीड मिली थी। एक-एक आईडी की जांच करने पर सभी अधिकारियों के नामों का खुलासा हुआ। आरोप है कि ये लोग फेक सर्टिफिकेट पर टेंडर देकर भ्रष्टाचार कर रहे थे। 9 अप्रैल को पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था जेजेएम घोटाले में 9 अप्रैल को एसीबी ने जलदाय विभाग के पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। सुबोध अग्रवाल के बाद इस कड़ी में एसीबी अब मंत्री तक पहुंची है। एसीबी ने सुबोध अग्रवाल से जलदाय मंत्री रहते महेश जोशी की इस घोटाले में भूमिका को लेकर भी पूछताछ की थी। ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी सर्टिफिकेट से हासिल किए थे टेंडर जेजेएम घोटाला केंद्र सरकार की हर घर नल पहुंचाने वाली ‘जल जीवन मिशन योजना’ से जुड़ा है। साल 2021 में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दिखाकर जलदाय विभाग (PHED) से करोड़ों रुपए के 4 टेंडर हासिल किए थे। श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्य प्रमाण पत्रों से पीएचईडी की 9003 निविदाओं में भाग लिया था। उनमें से 31 टेंडर में एल-1 के रूप में 859.2 करोड़ के टेंडर हासिल किए थे। श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में भाग लिया और 73 निविदाओं में एल -1 के रूप में भाग लेकर 120.25 करोड़ के टेंडर हासिल किए थे। घोटाले का खुलासा होने पर एसीबी ने जांच शुरू की। कई भ्रष्ट अधिकारियों को दबोचा। फिर ईडी ने केस दर्ज कर महेश जोशी और उनके सहयोगी संजय बड़ाया सहित अन्य के ठिकानों पर दबिश दी थी। इसके बाद सीबीआई ने 3 मई 2024 को केस दर्ज किया। ईडी ने अपनी जांच पूरी कर 4 मई को सबूत और दस्तावेज एसीबी को सौंप दिए थे। जेजेएम घोटाले में पीयूष जैन, पदम चंद जैन, महेश मित्तल और संजय बड़ाया की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। —— यह खबर भी पढ़िए… 900 करोड़ का घोटाला, तय था नेताओं-अधिकारियों का कमीशन:पूर्व मंत्री महेश जोशी को लेकर इंजीनियर ने खोले राज राजस्थान में करीब 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अफसरों को आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जल्द ही पूछताछ के लिए कुछ गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पढ़ें पूरी खबर…
जल जीवन मिशन घोटाला- पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार:जयपुर में सुबह 5 बजे ACB की कार्रवाई, पिछले साल 7 महीने जेल में रहे थे
By worldprime
On: मई 7, 2026 6:31 पूर्वाह्न
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