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पंजाबी युवती ने कनाडा पुलिस से मांगा ₹558 करोड़ हर्जाना:बोलीं-इनकी वजह से माता-पिता मरे, मुझे 13 गोलियां लगीं; हमलावरों ने ड्रग सप्लायर समझा था

On: मई 22, 2026 5:33 पूर्वाह्न
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पंजाबी मूल की युवती ने अपने भाई के साथ माता-पिता की हत्या मामले में कनाडा पुलिस पर 558.4 करोड़ रुपए के हर्जाने का केस ठोका है। युवती का कहना है कि उसके पेरेंट्स की हत्या पुलिस की लापरवाही के चलते हुई है। तीन साल पहले जसप्रीत कौर सिद्धू (31) और गुरदित्त सिद्धू (29) के माता पिता अमृतसर से कनाडा के ओंटारियो बच्चों से मिलने आए थे। 20 नवंबर 2023 को जिस घर में वो ठहरे, वहीं कुछ हमलावरों ने जगतार सिद्धू और हरभजन सिद्धू की गोली मारकर हत्या कर दी। अब युवती ने कोर्ट में 5583 मई 2026 को वकील फ्रेडरिक शूमान के जरिए कनाडा पुलिस पर केस किया है। आरोप लगाया कि पुलिस ने परिवार को किसी भी खतरे के बारे में नहीं बताया था और वहां रहने के लिए क्लीन चिट दी थी। जबकि हत्या से 4 दिन पहले ही घर का विजिट भी किया था। उधर, पुलिस का कहना है कि ये सब गलती से ये हुआ है। जसप्रीत सिद्धू ने रोते हुए बताया- मुझे उस रात की याद है मेरे माता-पिता की मेरी आंखों के सामने हत्या कर दी। पिता को मेरे सामने गोली मारी गई। मैंने अपनी मां की आखिरी चीखें सुनीं। इसके बाद सिर्फ गोलियों की आवाजें गूंज रही थीं। पहले जानिए युवती क्यों मांग रही 558 करोड़ रुपए… मुकदमे में जसप्रीत कौर सिद्धू ने दावा किया कि हमलावरों ने उसे भी 13 गोलियां मारीं थी, जिसके बाद महीनों अस्पताल में बिताए और वह अभी भी उन चोटों से उबर नहीं पा रही हैं जो अपने माता-पिता को खोने से मिली हैं। जसप्रीत कौर ने बताया कि उसे कंधे से लेकर पैरों तक बार-बार गोलियां मारी गईं और उनकी जान बचाने के लिए 18 घंटे लंबा ऑपरेशन चला। उनके गले और पेट में लगी गोलियों के कारण वे कुछ समय तक बोल नहीं पाईं। मुकदमे के अनुसार, एक गोली जिसे निकाला नहीं जा सका, वह अभी भी उनकी रीढ़ के पास फंसी है। दावे के मुताबिक, इस गोलीबारी के बाद से सिद्धू काम करने में असमर्थ हैं। वह नसों के डैमेज होने से चलने-फिरने में असमर्थ हैं और गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। सिद्धू परिवार की ओर से वकील फ्रेडरिक शूमान ने कहा कि यह मामला पुलिस को उनकी जवाबदेही का अहसास कराने के लिए है। अब जानिए क्या है पूरा मामला… दरअसल, 20 नवंबर 2023 को जिस घर में माता-पिता और जसप्रीत ठहरी थीं, वहां हमलावर किसी बॉबी नामक शख्स को ढूंढते हुए आए थे। हमलावरों ने दोनों को गोली मार दी। अक्टूबर 2024 में कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय की तरफ से आरोप लगाया गया कि कनाडाई गैंगस्टर रायन वेडिंग और उसके सहयोगी एंड्रयू क्लार्क ने कथित तौर पर दक्षिणी कैलिफोर्निया से होकर निकलने वाली ड्रग्स की चोरी हुई खेप का बदला लेने के लिए बॉबी नामक युवक को मारने के आदेश दिए थे। इसी बॉबी की खोज करते हुए हमलावर पंजाबी दंपति के घर पहुंचे और गोलियां चला दीं। 4 दिन पहले पुलिस घर का विजिट किया था स्टेटमेंट आफ क्लेम में भाई-बहन ने तर्क दिया है कि पील पुलिस को इस गंभीर खतरे के बारे में पता होना चाहिए था, क्योंकि यह मामला कनाडाई गैंगस्टर रायन वेडिंग के एक सहयोगी से जुड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने न तो इस मामले की सावधानीपूर्वक जांच की और न ही परिवार को इसकी जानकारी दी। मुकदमे में कहा गया कि यह पूरी तरह से स्पष्ट था कि पीड़ितों को चेतावनी न देने का नतीजा उनकी मौत का कारण बन सकता था। युवती ने लगाया ये आरोप परिवार का आरोप है कि उस दिन आधी रात से ठीक पहले पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने जगतार सिद्धू को मृत पाया, जबकि उनकी पत्नी घायल थीं, जिन्होंने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। बेटी जसप्रीत कौर सिद्धू को भी 13 गोलियां लगी थीं, लेकिन वह जीवित बच गईं। अब वह और उनके भाई गुरदित सिंह सिद्धू ने खतरे की चेतावनी न देने के लिए पील रीजनल पुलिस (PRP) से 80 मिलियन कनाडाई डॉलर (लगभग 558 करोड़ रुपए) के हर्जाने की मांग कर रहे हैं। सिद्धू ने बताया कि हत्याकांड से चार दिन पहले इस पुलिस बल के एक अधिकारी ने उनके घर का दौरा किया था, लेकिन कोई संभावित खतरा नहीं बताया। पुलिस ने कहा-उन्हें खतरे के बारे कुछ पता नहीं था दूसरी तरफ पील पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं थी जिससे यह संकेत मिले कि उस पते पर रहने वाले किसी निवासी को जान का खतरा था। बाद में यह बात सामने आई कि वह पता बॉबी नामक एक व्यक्ति से जुड़ा था, जिसके घर को पहले भी एक गोलीबारी में निशाना बनाया गया था। उत्तरी अमेरिकी ड्रग गैंग के सरगना रायन वेडिंग को इस मामले में जनवरी 2026 में मैक्सिको से गिरफ्तार किया गया था। सिद्धू दंपति की हत्या की जांच ओंटारियो प्रांतीय पुलिस (OPP) की कैलेडन टुकड़ी द्वारा की गई थी। घटना के एक महीने बाद उन्हें पीड़ितों के रूप में पहचाना गया था। ओंटारियो पुलिस ने बाद में कहा कि सिद्धू परिवार हमलावरों का असली निशाना नहीं था।

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