पिरामिड स्कीम्स सिर्फ पैसे नहीं डुबोतीं, बल्कि रिश्तों और भरोसे को भी तोड़ देती हैं। TVF की नई वेब सीरीज ‘द पिरामिड स्कीम’ इसी सच्चाई को दिखाती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रणवीर शौरी, अल्फिया जाफरी, परमवीर सिंह चीमा और क्रिएटर-निर्देशक श्रेयांश पांडे ने अपने अनुभव साझा किए। किसी ने मॉडलिंग के नाम पर लाखों रुपए गंवाए, तो किसी ने झूठे वादों और फर्जी ऑफर्स का सामना किया। कलाकारों ने भरोसा टूटने, संघर्ष, इंडस्ट्री की हकीकत और पिरामिड स्कीम्स के असर पर बात की। सवाल: क्या कभी किसी ने आपसे कहा कि बस यह काम कर लो, फिर जिंदगी बदल जाएगी? जवाब/रणवीर शौरी: हमारी इंडस्ट्री में यह बात अक्सर सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि यह लाइफ-चेंजिंग रोल है, इसके बाद सब बदल जाएगा। जिंदगी बदलती है, लेकिन उतनी नहीं जितनी बताई जाती है। हर प्रोजेक्ट के बाद खुद को फिर से साबित करना पड़ता है। एक बार नीचे गिर जाएं तो दो-तीन साल दोबारा खड़े होने में लग जाते हैं। सवाल: क्या आप कभी किसी स्कीम या झांसे में फंसे हैं? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, शुरुआती दिनों में मैं एक फोटोग्राफर के झांसे में आ गया था। मॉडलिंग के लिए पोर्टफोलियो बनवाने की सलाह दी गई। बताया गया कि वह फोटोग्राफर आमतौर पर 2 लाख रुपए लेता है, लेकिन मुझसे 1.25 लाख लेगा। मैंने पैसे दिए और शूट कराया। बाद में पता चला कि वह फोटोग्र
डेढ़ लाख गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला:फर्जी वादों और इंडस्ट्री के धोखों पर बोले ‘द पिरामिड स्कीम’ के सितारे
By worldprime
On: जून 7, 2026 5:30 पूर्वाह्न
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