Ram Mandir Theft: अयोध्या: भगवान श्रीराम मंदिर के दानपात्र में जमा होने वाली धनराशि में कथित गबन के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ साल पहले गणना कक्ष में CCTV कैमरे लगाने का विरोध किया गया था। हालांकि बाद में लगाए गए और गुप्त रूप से स्थापित कैमरों की फुटेज के आधार पर संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान की गई है।![]()
CCTV लगाने का हुआ था विरोध
सूत्रों के अनुसार, गणना कक्ष में निगरानी के लिए कैमरे लगाए जाने का कुछ लोगों ने विरोध किया था। तर्क दिया गया था कि यहां काम करने वाले सभी कर्मचारी विश्वसनीय हैं, इसलिए कैमरों की आवश्यकता नहीं है। बावजूद इसके कुछ कैमरे लगाए गए और कुछ स्थानों पर गुप्त निगरानी व्यवस्था भी की गई।
बाद में इन्हीं कैमरों की रिकॉर्डिंग में दानपात्र की रकम की गिनती के दौरान संदिग्ध गतिविधियां सामने आने का दावा किया जा रहा है।
एक ही टीम संभाल रही थी जिम्मेदारी
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ कर्मचारी लंबे समय से एक ही शिफ्ट में नोटों की गिनती का कार्य कर रहे थे। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों के एक समूह को लगातार एक साथ रखा गया था और उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव नहीं किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, नोटों की गिनती के बाद कर्मचारियों की नियमित तलाशी भी नहीं ली जाती थी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऑडिट में सामने आया बड़ा अंतर
मामले का खुलासा तब हुआ जब आंतरिक ऑडिट के दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और दानपात्र में जमा राशि के आंकड़ों में अंतर पाया गया। इसके बाद जांच शुरू की गई और CCTV फुटेज की समीक्षा की गई।
जांच एजेंसियां संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ कर रही हैं। कुछ लोगों से नकदी बरामद होने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
राज्य सरकार ने गठित की SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इसमें विजय विश्वास पंत, किरन एस और नील रतन को शामिल किया गया है।
SIT को सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अब जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गबन में किन-किन लोगों की भूमिका रही है।


