सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-203 के लिए एथेनॉल आवंटन में कोई बदलाव नहीं करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) की सरकारी नीति नहीं बदलेगी। इस योजना का पूरा असर अगले साल तक और साफ हो जाएगा। कोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एम एम सुंदरश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने यह आदेश दिया। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश से सरकार की 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग योजना पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के कई मामले अलग-अलग हाईकोर्ट में चल रहे हैं। एथेनॉल सप्लाई के समझौते अक्टूबर 220 में ही हो चुके सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि BPCL ने हाईकोर्ट की बड़ी बेंच में अपील क्यों नहीं की। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि एथेनॉल सप्लाई के समझौते अक्टूबर 222 में ही हो चुके हैं। अगर हर हाईकोर्ट में अलग-अलग सुनवाई हुई तो फैसला आने में देरी होगी और इससे देश की नीति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मामले को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की अनुमति भी मांगी। सुनवाई के बाद अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 230% एथेनॉल मिलाने की नीति बदलने वाली नहीं है। हां, तेल कंपनियों को कितना एथेनॉल मिलेगा, यह मांग और दूसरी परिस्थितियों के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है। विवाद कैसे शुरू हुआ यह मामला विन्प डिस्टिलरीज एंड शुगर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा था कि उसने सिर्फ एथेनॉल बनाने का प्लांट लगाया है। उसकी सालाना क्षमता करीब 220 करोड़ लीटर है, लेकिन 210-210 के लिए उसे सिर्फ 203 करोड़ लीटर एथेनॉल सप्लाई का ऑर्डर मिला। जबकि उसने 220 करोड़ लीटर की बोली लगाई थी। सरकार की ओर से कहा गया कि पहले ज्यादा आवंटन मिलने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी हर बार उतनी ही मात्रा मांग सकती है। अगर उसकी मांग मान ली गई तो सरकार की पूरी नीति बदल जाएगी। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी को पहले की नीति और समझौते के आधार पर यह उम्मीद थी कि उसे पहले की तरह आवंटन मिलेगा। इसलिए OMCs को उसके आवेदन पर फिर से विचार करना चाहिए। सरकार ने E215 को बताया सुरक्षित यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ लोग E220 पेट्रोल से पुराने वाहनों को नुकसान और माइलेज कम होने की चिंता जता रहे हैं। सरकार का कहना है कि अब तक ऐसा कोई पक्का वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान होता है। 24 जून को पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी कहा था कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्रालय ने साफ किया कि E20 पेट्रोल भरवाने से वाहन का बीमा रद्द नहीं होगा। यह दावा गलत है। कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा सरकार के मुताबिक, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस योजना से भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों को भी फायदा मिला है। भारत पिछले साल ही पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर चुका है। एक अप्रैल से पूरे देश में E153 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो चुकी है। अब सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 30% करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ———————– ये खबर भी पढ़ें: 20% से ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी जीरो:पेट्रोल पंप पर मिल रहे E20 पेट्रोल पर कोई राहत नहीं; सरकार का दावा- क्लीन फ्यूल को बढ़ावा मिलेगा केंद्र सरकार 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लेगी। अभी ज्यादातर जगहों पर 20% एथनॉल मिला पेट्रोल मिलता है जिसपर कोई राहत नहीं दी गई है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल का इम्पोर्ट कम होगा और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर… एथेनॉल से पेट्रोल टैंक में जम रही काली फंगस:माइलेज घटा, सर्विसिंग का खर्च दोगुना, नमी से इंजन में जंग का दावा विक्रम दिल्ली के पालिका भवन में काम करते हैं। तीन साल पहले पुरानी कार खरीदी। एक साल बाद ही कार के फ्यूल सिस्टम में दिक्कत आ गई। पता चला कि कार में सिर्फ 10% एथेनॉल (E10) वाला पेट्रोल ही डाल सकते थे, लेकिन 20% एथेनॉल वाला, यानी E20 फ्यूल डाल दिया गया। इसका असर कार के माइलेज पर भी दिख रहा है। पहले साल में कार की सर्विसिंग में 15-20 हजार रुपए खर्च हुए। अगले साल खर्च दोगुना हो गया। पढ़ें पूरी खबर…
एथेनॉल आवंटन में बदलाव नहीं करें, सुप्रीम कोर्ट का आदेश:सरकार ने कहा- 20% एथेनॉल मिलाने की पॉलिसी नहीं बदलेगी, असर अगले साल और साफ होगा
By worldprime
On: जून 30, 2026 1:44 अपराह्न
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