क्या कोई 21 साल का छात्र किसी ऐसी यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट को इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकता है, जिसका सालाना बजट दुनिया के 116 देशों की सरकारों से भी बड़ा हो? स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र और युवा पत्रकार थियो बेकर ने न सिर्फ ऐसा कर दिखाया, बल्कि सिलिकॉन वैली की इस पसंदीदा यूनिवर्सिटी के भीतर चल रहे मुनाफे, धोखाधड़ी और रसूख के खेल को भी बेनकाब कर दिया है। बेकर ने अपनी नई किताब ‘हाउ टू रूल द वर्ल्ड’ में स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के इसी चमकदार चेहरे के पीछे छिपे नैतिक पतन के काले सच को सामने रखा है। बेकर ने शुरुआत में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की, इसके साथ ही उनका रुझान छात्र अखबार ‘द स्टैनफर्ड डेली’ की ओर हो गया। निडर खोजी पत्रकार की तरह काम करते हुए उन्होंने साबित किया कि तत्कालीन प्रेसिडेंट मार्क टेसियर-लवाइन के रिसर्च पेपर्स में डेटा से भारी हेरफेर हुई थी। इस खुलासे से देशव्यापी विवाद हुआ और प्रेसिडेंट को इस्तीफा देना पड़ा। साहसी रिपोर्टिंग के लिए बेकर को प्रतिष्ठित जॉर्ज पोल्क अवार्ड मिला। इसे जीतने वाले वे सबसे युवा पत्रकार बने। किताब के मुताबिक स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी अब सिर्फ ‘फुटबॉल टीम वाला बड़ा टेक इनक्यूबेटर’ बनकर रह गई है। यहां का पूरा माहौल इस बात से संचालित होता है कि कौन कितनी जल्दी करोड़पति बन सकता है। यूनिवर्सिटी के प्र
स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का नैतिक पतन:छात्रों के स्टार्टअप में निवेश से मोटी कमाई कर रहे प्रोफेसर, बिना ठोस आइडिया के करोड़ों की फंडिंग
By worldprime
On: जुलाई 7, 2026 12:39 अपराह्न
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