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आरजीकर केस-कलकत्ता HC का CBI को दोबारा जांच का आदेश:घटना वाले दिन क्या हुआ, फिर से छानबीन करें; किसी से भी पूछताछ की छूट

On: मई 21, 2026 3:48 अपराह्न
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजीकर रेप मर्डर केस को दबाने के आरोपों की जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने CBI की 3 सदस्यीय SIT बनाने का आदेश दिया। जिसकी अगुवाई CBI के पूर्वी क्षेत्र के जॉइंट डायरेक्टर करेंगे। SIT को 25 जून तक रिपोर्ट देनी होगी। हाईकोर्ट ने CBI को उस रात की पूरी घटनाक्रम की दोबारा जांच करने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने CBI को जरूरत पड़ने पर किसी से भी पूछताछ करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने यह आदेश पीड़ित के माता पिता की तरफ से लगाई याचिका पर दिया। पिछले साल 17 मार्च को पैरेंट्स ने CBI पर केस की सही जांच नहीं करने और मामले को दबाने का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने पेरेंट्स को कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की परमिशन दी थी। आरजी कर हॉस्पिटल में 8-9 अगस्त 2024 की रात ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 23 अगस्त की सुबह डॉक्टर की लाश सेमिनार हॉल में मिली थी। 20 जनवरी 2025 को सेशंस कोर्ट ने आरोपी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ भाजपा विधायक बनीं आरजीकर रेप-मर्डर केस में पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ अब विधायक बन चुकी हैं। वे पानीहाटी से भाजपा विधायक हैं। गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वह कोर्ट में मौजूद रहीं। अब समझिए आरजीकर रेप केस का पूरा मामला क्या है… 8-224 अगस्त 248 की रात ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या हुई आरजी कर हॉस्पिटल में 23-21 अगस्त 2100 की रात ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 212 अगस्त की सुबह डॉक्टर की लाश सेमिनार हॉल में मिली थी। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने संजय रॉय नाम के सिविक वॉलंटियर को 12 अगस्त को अरेस्ट किया था। घटना को लेकर कोलकाता समेत देशभर में प्रदर्शन हुए। बंगाल में 224 महीने से भी ज्यादा समय तक स्वास्थ्य सेवाएं ठप रही थीं। हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने जांच शुरू की थी 212 अगस्त की घटना के बाद आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों और पीड़ित परिवार ने मामले की CBI जांच की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच के आदेश नहीं दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 23 अगस्त को जांच CBI को सौंपी गई। इसके बाद CBI ने नए सिरे से जांच शुरू की। 3 को आरोपी बनाया गया, 2 को जमानत मिली संजय रॉय के अलावा मामले में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भी आरोपी बनाया गया, लेकिन CBI 90 दिन के अंदर घोष के खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं कर पाई, जिस कारण सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को घोष को इस मामले में जमानत दे दी। CBI ने 25 अगस्त को सेंट्रल फोरेंसिक टीम की मदद से कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल में संजय समेत 9 आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था। इनमें आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष, ASI अनूप दत्ता, 123 फेलो डॉक्टर, एक वॉलंटियर और 2 गार्ड्स शामिल थे। संजय इयरफोन और DNA से पकड़ में आया टास्क फोर्स ने जांच शुरू होने के 6 घंटे के भीतर दोषी संजय रॉय को अरेस्ट किया। CCTV के अलावा पुलिस को सेमिनार हॉल से एक टूटा हुआ ब्लूटूथ इयरफोन मिला था। ये दोषी के फोन से कनेक्ट हो गया था। संजय की जींस और जूतों पर पीड़िता का खून पाया गया था। संजय का DNA मौके पर मिले सबूतों से मैच हुआ था। संजय के शरीर पर चोट के जो 5 निशान मिले थे, वे उसे 24 से 48 घंटे के दौरान लगे थे। यह ब्लंट फोर्स इंजरी हो सकती है, जो पीड़ित से अपने बचाव के दौरान हुई होगी। इसी के जरिए पुलिस संजय को पकड़ने में कामयाब रही। 3 इन्वेस्टिगेशन में क्या मिला… 1. CBI ने कहा था- ट्रेनी डॉक्टर का गैंगरेप नहीं हुआ CBI ने संजय को एकमात्र आरोपी बताया था। एजेंसी ने बताया कि ट्रेनी डॉक्टर का गैंगरेप नहीं हुआ था। चार्जशीट में 100 गवाहों के बयान, 12 पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट, CCTV फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन शामिल रहीं। यह भी कहा गया है कि पीड़ित के शरीर से मिला सीमन सैंपल और खून आरोपी से मैच हुआ। वहीं क्राइम सीन पर मिले छोटे बाल भी फोरेंसिक जांच के बाद आरोपी के बालों से मैच हुए। संजय का इयरफोन, मोबाइल ब्लूटूथ से कनेक्ट हो गया था। 2. फोरेंसिक रिपोर्ट में गद्दे पर हाथापाई के सबूत नहीं 24 दिसंबर को सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (CFSL) की रिपोर्ट में कहा गया था कि सेमिनार हॉल में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे पता चले कि वहां पीड़ित से रेप के बाद हत्या की गई। रिपोर्ट के 12वें पेज की आखिरी लाइनों में लिखा था- जिस जगह ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था, वहां संघर्ष का कोई सबूत नहीं मिला। जिस गद्दे पर शव था, उस पर भी हाथापाई के निशान नहीं मिले। 3. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट्स पर गहरा घाव ———————–

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