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कांग्रेस का BRICS+ समिट को लेकर पीएम से सवाल:पूछा- पश्चिम एशिया संकट पर समिट आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे ‘विश्वगुरु’

On: मार्च 23, 2026 11:50 पूर्वाह्न
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कांग्रेस का brics+ समिट को लेकर पीएम से सवाल:पूछा पश्चिम एशिया संकट पर समिट आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे 'विश्वगुरु'
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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि वेस्ट एशिया संकट से निपटने के लिए BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा। पार्टी का आरोप है कि मोदी अमेरिका और इजराइल को नाराज नहीं करना चाहते। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पोस्ट में कहा- भारत इस साल नई दिल्ली में 222वीं BRICS+ समिट की मेजबानी करने वाला है। ऐसे में सरकार को वेस्ट एशिया संकट पर कूटनीतिक पहल के लिए इस मंच का इस्तेमाल करना चाहिए। खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में पहल क्यों नहीं कर रहे हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते। केवल फोन कॉल के जरिए बातचीत की सीमाएं होती हैं, जबकि समिट के जरिए ठोस फैसले और आमने-सामने बातचीत ज्यादा प्रभावी हो सकती है। पहले भी सरकार पर साधा था निशाना कांग्रेस ने पिछले हफ्ते भी केंद्र सरकार की आलोचना की थी। पार्टी का कहना था कि BRICS+ चेयर होने के बावजूद भारत ने वेस्ट एशिया संघर्ष पर कोई सामूहिक बयान जारी नहीं किया। 21 मार्च को भी कांग्रेस ने अमेरिका-इजराइल के हमले की निंदा न करने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। BRICS समिट 2026 की अध्यक्षता भारत के पास दरअसल, BRICS समिट 2026 की अध्यक्षता भारत कर रहा है। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी 1 जनवरी को ब्राजील से भारत को मिली थी। 15 जनवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने थीम, लोगो और वेबसाइट का शुभारंभ किया था। पीएम मोदी ने 20003 में रियो डी जनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स समिट में भारत की योजना को साझा किया था। भारत का लक्ष्य ब्रिक्स को एक नए रूप में पेश करना है, जिसका फोकस है… मानवता पहले (Humanity First): भारत ब्रिक्स को लोगों के हितों को प्राथमिकता देने वाला मंच बनाएगा, जैसा कि उसने G20 की अध्यक्षता में किया था। लचीलापन और नवाचार (Resilience and Innovation): भारत वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीकों और सहयोग पर जोर देगा। सतत विकास (Sustainability): जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। ग्लोबल साउथ की आवाज: भारत विकासशील देशों के हितों को बढ़ावा देगा और वैश्विक संस्थानों जैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IMF और विश्व बैंक में सुधार की मांग करेगा। आतंकवाद विरोधी और आर्थिक मजबूती: भारत आतंकवाद के खिलाफ कदम और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर देगा। 17वें BRICS समिट में शामिल होने मोदी ब्राजील गए थे 17वां BRICS समिट 6-7 जुलाई, 2025 को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुआ। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की अध्यक्षता में इस समिट का थीम था ‘ग्लोबल साउथ के लिए समावेशी और टिकाऊ सहयोग’। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, यूएई) और साझेदार देशों के नेता शामिल हुए थे। मोदी इसमें भाग लेने के लिए ब्राजील गए थे। ये 12वां था जब मोदी BRICS समिट में भाग ले रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘ग्लोबल साउथ के देश अक्सर डबल स्टैंडर्ड का शिकार रहे हैं। चाहे विकास हो, संसाधनों की बात हो, या सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की, ग्लोबल साउथ को कभी प्राथमिकता नहीं दी गई है। इनके बिना, वैश्विक संस्थाएं ऐसे मोबाइल की तरह हैं, जिसमें सिम कार्ड तो है लेकिन नेटवर्क नहीं है।’ BRICS क्या है? BRICS 11 प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का एक समूह है। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसका मकसद इन देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें शुरुआत में 4 देश थे, जिसे BRIC कहा जाता था। यह नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। तब उन्होंने कहा था कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगे। बाद में ये देश एक साथ आए और इस नाम को अपनाया। BRICS को बनाने की जरूरत और आगे का सफर सोवियत संघ के पतन के बाद और 2000 के शुरुआती सालों में दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी देशों का दबदबा था। अमेरिका का डॉलर और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) फैसले करती थीं। इस अमेरिकी दबदबे को कम करने के लिए रूस, भारत, चीन और ब्राजील BRIC के तौर पर साथ आए, जो बाद में BRICS हो गया। इन देशों का मकसद ग्लोबल साउथ यानी विकासशील और गरीब देशों की आवाज को मजबूती देना था। ……………………. विपक्ष और केंद्र सरकार से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जयराम रमेश बोले-मोदी तारीफ करते रहे, ट्रम्प टैरिफ लगाते रहे: अमेरिका से ट्रेड डील किसानों के गले में फंदा, एकतरफा समझौता मंजूर नहीं शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 22 मार्च को कहा कि पीएम मोदी अब देश का नेतृत्व करने में काबिल नहीं हैं। रुपया लगातार गिर रहा है, जंग आज है, लेकिन कल तो जंग नहीं हुई थी। रुपया ठीक उसी समय नीचे गिरना शुरू हुआ जब PM मोदी प्रधानमंत्री बने। PM अभी भी इलेक्शन कैंपेन में बिजी हैं और उन्हें रुपये की कोई परवाह नहीं है। मेरे पास उनसे कहने के लिए बस एक ही बात है कि ‘मोदी जी, अब झोला उठाओ और चले जाओ।’ पूरी खबर पढ़ें…

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