क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड राजनीति जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़

---Advertisement---

चंडीगढ़ में एक घंटे स्टैच्यू बन बैठा रहा युवक,VIDEO:हाथ में बीड़ी, पी नहीं पाया; पंजाब-चंडीगढ़ से 6 वीडियो सामने आ चुके; जॉम्बी ड्रग का शक

On: अप्रैल 23, 2026 7:24 पूर्वाह्न
Follow Us:
red and white modern breaking news youtube thumbnail
---Advertisement---

चंडीगढ़ में युवक एक घंटे तक रोड के किनारे एक ही तरह से बैठा रहा। युवक का सिर झुका हुआ था और शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसके हाथ में बीड़ी थी लेकिन वह उसे पी नहीं पा रहा था। लोगों ने उससे बात करने की भी कोशिश की लेकिन वह हिल तक नहीं पाया। इसे जॉम्बी ड्रग के असर से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बारे में चंडीगढ़ पुलिस का कहना है कि युवक की पहचान कर एड्रेस निकलवाया जा रहा है। उसके बाद उससे पूछताछ करेंगे कि उसने ऐसा कौन सा नशा किया था। चंडीगढ़ में यह पहला मामला नहीं है बल्कि इससे पहले ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय और एक अन्य युवक की वीडियो भी सामने आ चुकी हैं, जिनमें वह एक घंटे तक बिना हिले-डुले खड़े रहे। इससे पहले लुधियाना और जालंधर में भी ऐसे 3 मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले 2 वीडियो सामने आ चुके.. पहले वीडियो में डिलीवरी बॉय दिखा चंडीगढ़ में पहला वीडियो 25 मार्च को सेक्टर 33B में ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय का सामने आया था। जो करीब ढाई घंटे तक सड़क पर बिल्कुल स्थिर और अचेत अवस्था में खड़ा रहा। यह वीडियो खूब वायरल हुआ तो सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे अमेरिका में मशहूर ‘जॉम्बीड्रग’ से जोड़ा। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। पुलिस ने शक जताया था कि यह किसी अन्य नशे या मेडिकल इमरजेंसी का मामला हो सकता है। दूसरे वीडियो में युवक फुटपाथ किनारे खड़ा दिखा
दूसरा वीडियो सारंगपुर एरिया से सामने आया था। इसमें दिखा कि एक युवक सड़क किनारे फुटपाथ पर खड़ा था। उसके आसपास 10 से 15 लोग बैठे हुए थे और कुछ वहां से गुजर भी रहे हैं। युवक अपने पैरों को मोड़कर खड़ा हुआ था। उसकी जिसकी आंखें बंद और मुंह खुला हुआ था। उसके एक हाथ में बीड़ी थी और शरीर में कोई मूवमेंट नहीं थी। तब भी पुलिस ने जांच का भरोसा दिया था। पंजाब से भी 3 वीडियो सामने आ चुके
लुधियाना से 12 अप्रैल को एक वीडियो सामने आया था। जिसमें एक युवक और युवती नशे में धुत दिखे। युवक सिर झुकाकर खड़ा था और युवती नशे में झूमते हुए चेहरा छुपा रही थी। दोनों का खुद के शरीर पर कोई कंट्रोल नहीं था। इस दौरान वह सड़क के बीच में काफी देर तक खड़े रहे। युवती युवक को संभालने की कोशिश करती दिखी लेकिन युवक के शरीर में बिल्कुल हलचल नहीं हो रही थी। एक हफ्ते पहले सामने आए वीडियो में क्या दिख रहा अप्रैल में ही लुधियाना में बस स्टैंड के सामने का एक वीडियो सामने आया था। इसमें भी युवक व युवती नशे में धुत नजर आ रहे थे। युवती ने ग्रीन कलर का टॉप व ब्लैक कलर की पेंट पहनी थी। वहीं युवक ने ग्रे कलर के कपड़े पहने हैं। युवक नशे में होने के कारण सिर झुकाकर सड़क पर खड़ा था। युवती उसे संभालने की कोशिश करती दिख रही थी। वह भी नीचे झुकते हुए उसी तरह से काफी देर तक खड़ी रही। 22 अप्रैल को जालंधर का वीडियो सामने आया
कल यानी 22 अप्रैल को जालंधर के सिटी रेलवे स्टेशन पर इसी तरह का वीडियो सामने आया। जिसमें एक युवक लंबे समय से एक ही जगह पर खड़ा था। उसका शरीर पर कंट्रोल नहीं था। वहां गुजरते हुए लोग उसे देखकर पूछ भी रहे थे कि उसे क्या हुआ, लेकिन वह किसी को कोई जवाब नहीं दे रहा था। हालांकि GRP का कहना था कि वे इसकी जांच करेंगे कि युवक ने कौन सा नशा किया था। जानिए, जॉम्बी ड्रग’ क्या है, जिससे इन मामलों को जोड़ा जा रहा है?
जानवरों को दी जाने वाली एक दवा है- जाइलेजीन (Xylazine)। इसे देने से जानवर ट्रान्क्विलाइज हो जाते हैं, यानी हल्की बेहोशी जैसी स्थिति में आ जाते हैं और उन्हें दर्द का अनुभव कम होता है। इसीलिए इसे आम बोलचाल में ‘Tranq’ कहा जाता है। इसी जाइलेजीन को जब अफीम से बने किसी ओपिऑइड ड्रग जैसे- फेंटानिल, हेरोइन या कोकेन के साथ मिलाकर लिया जाता है, तो ये तेजी से नशा करती है। जाइलेजीन और ओपिऑइड के इसी कॉम्बिनेशन को ‘जॉम्बी ड्रग’ कहते हैं। इसके आदी लोग देर तक एक ही पोजीशन में बेसुध से पड़े रहते हैं। उनके शरीर पर घाव और लाल चकत्ते पड़ने लगते हैं। चमड़ी उतरने लगती है। जैसे साइंस फिक्शन मूवीज के ‘जॉम्बीज’ होते हैं। जाइलेजीन को पहली बार 1962 में एक जर्मन कंपनी ने बनाया था। इसका इस्तेमाल जानवरों में दर्द कम करने, उन्हें ऑपरेशन के दौरान बेहोश करने के लिए होता है। इंसानों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। नशे के लिए जाइलेजीन को फेंटानिल या हेरोइन के साथ मिलाकर लेने के पीछे 2 बड़ी वजहें हैं… 1. हेरोइन जैसे ड्रग्स की तुलना में काफी सस्ता
अवैध ड्रग मार्केट्स में जाइलेजीन करीब 500 से 1000 रुपए किलो में मिल जाता है। अमेरिका के ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन यानी DEA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जाइलेजीन को फेंटानिल या हेरोइन के साथ मिलावट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसमें भी साइकोएक्टिव यानी नशे का इफेक्ट होता है। सस्ते होने के चलते मिलावट करने से ड्रग ट्रैफिकिंग करने वालों का मुनाफा बढ़ जाता है।’ 2. इसका नशा देर तक रहता है
1959 में दर्द कम करने के लिए बना ड्रग फेंटानिल, आज हेरोइन से ज्यादा महंगा है। हालांकि ज्यादा नशीला होने के चलते हेरोइन की जगह अब फेंटानिल का इस्तेमाल बढ़ने लगा। इसमें दूसरे नशीले ड्रग्स मिलकर इसकी मात्रा बढ़ाई जाती है, इससे ड्रग तस्करों का मुनाफा बढ़ जाता है। अमेरिका की पेसिफिक नॉर्थवेस्ट नेशनल लैबोरेट्री की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘अमेरिका में 1 किलो हेरोइन लगभग 6,000 डॉलर में खरीदकर लगभग 80,000 डॉलर में बेची जा सकती थी। वहीं अगर 6,000 डॉलर का फेंटानिल खरीदा जाए, तो इसके तेज असर के चलते अवैध रूप से करीब 16 लाख डॉलर में बेचा जा सकता है। चूंकि फेंटानिल का नशा थोड़ी देर के लिए रहता है, इसलिए इसमें सस्ता जाइलेजीन मिलाया जाने लगा, जिसका असर ज्यादा देर तक रहता है। DEA के मुताबिक, नशे का असर और ड्यूरेशन बढ़ाने के लिए फेंटानिल में जाइलेजीन मिलाई जाती है। द ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन की मैगजीन BMJ जर्नल्स के मुताबिक, ‘अमेरिका के फिलाडेल्फिया में ड्रग्स के आदी लोगों पर की गई स्टडी में पता चला कि फेंटानिल में जाइलेजीन की मिलावट से ऐसा महसूस होता है, जैसे आप पुराने समय की हेरोइन ले रहे हों, जो ज्यादा देर तक नशा करती है। जाइलेजीन के नशे में वही नॉड स्टेट यानी सिर झुकाकर सोने की स्थिति आ जाती है, जो फेंटानिल के आने के पहले हेरोइन से आती थी।’ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जॉम्बी ड्रग’ लेने वाले ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि वह ये मिलावटी ड्रग ले रहे हैं। क्या ‘जॉम्बी ड्रग’ के असर में व्यक्ति स्टैच्यू बन जाता है?
‘जॉम्बी ड्रग’ में शामिल जाइलेजीन इंसान के दिमाग और नसों में मौजूद अल्फा-2 नाम के रिसेप्टर को एक्टिव कर देता है। ये रिसेप्टर हमारे शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर काम करके नॉरपिनेफ्रीन नाम के एक न्यूरोट्रांसमिटर का रिलीज होना कम कर देता है। नॉरपिनेफ्रीन का काम हमें जागरूक, सचेत या चौकस रखना होता है। जब जाइलेजीन की वजह से अल्फा-2 रिसेप्टर एक्टिव होता है, तो नॉरपिनेफ्रीन इनएक्टिव हो जाता है। इससे दो तरह के असर होते हैं… दिमाग की एक्टिविटी कम हो जाती है। दिमाग एक तरह से सुन्न हो जाता है और व्यक्ति जिस पोजीशन में है, उसी में तेज सुस्ती और नींद महसूस करने लगता है। उसे पता नहीं चलता कि आसपास क्या हो रहा है। शरीर की मांसपेशियां शिथिल पड़ जाती हैं। बहुत कमजोरी महसूस होती है। हिलने-डुलने की ताकत कम होती जाती है। व्यक्ति एक ही पोजीशन में घंटों बना रहता है, क्योंकि मांसपेशियों को दिमाग से किसी एक्शन का सिग्नल नहीं मिलता।जाइलेजीन के साथ मिलाया हुआ फेंटानिल या कोई और ड्रग इस असर को और तेज करता है। क्या पहले भी ‘जॉम्बी ड्रग’ के मामले सामने आए हैं?
भारत में अभी तक इंसानों में जाइलेजीन के इस्तेमाल की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा है। 2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिकी द्वीप प्यूर्टो रिको में नशा करने वाले लोगों ने इसका इस्तेमाल शुरू किया था। तब इसे घोड़ों को बेहोश करने वाली दवाई के तौर पर जाना जाता था। 2006 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया में जाइलेजीन से 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। 2014 में बड़े पैमाने पर हेरोइन जैसे ड्रग्स में इसकी मिलावट की जाने लगी। अप्रैल 2023 में बाइडन प्रशासन ने इसे नेशनल लेवल पर बढ़ता खतरा बताया। 2022 में यूक्रेन में भी इससे एक व्यक्ति की मौत हुई। 2024 में ब्रिटेन की सरकार ने इसे ‘कंट्रोल्ड ड्रग’ की लिस्ट में डाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलाडेल्फिया में इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा है। यहां ड्रग ओवरडोज से होने वाली कुल मौतों में 31% मौतें इसकी वजह से होती हैं। मौजूदा समय में इसका इस्तेमाल पूरे अमेरिका में होने लगा है। देश में ये ‘जॉम्बी ड्रग’ कैसे आया, सबसे ज्यादा इस्तेमाल किस इलाके में हो रहा?
भारत में जाइलेजीन के अवैध इस्तेमाल को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। सरकार के सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन यानी CDSCO के नियमों के मुताबिक, जाइलेजीन का इस्तेमाल सिर्फ जानवरों के इलाज के लिए किया जा सकता है। AIIMS का नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर यानी NDDTC और केंद्र सरकार का सामाजिक न्याय मंत्रालय नशे की रोकथाम के लिए काम करते हैं। NDDTC के 2019 के सर्वे के मुताबिक, भारत में करीब 5.7 करोड़ लोग अफीम बेस्ड हेरोइन जैसे ड्रग्स का नशा करते हैं। वहीं करीब 4 करोड़ लोग बाकी तरह के नशे करते हैं। 2024 में DEA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘अब एक नई दवा मेडोटोमिडाइन, जाइलेजीन की जगह ले रही है। ये जाइलेजीन से भी 300 गुना ज्यादा तक नशीली है। चीन इन दोनों दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। दूसरे नंबर पर भारत इन दवाओं का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और नॉर्थ-ईस्ट के इलाकों में अवैध ड्रग्स की तस्करी सबसे ज्यादा होती है। NCRB के 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, अवैध ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़े कानून NDPS एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10,432 मामले दर्ज हुए थे। इसके बाद महाराष्ट्र और पंजाब का नंबर आता है। हालांकि प्रति 10 लाख की आबादी पर ड्रग्स से जुड़े अपराधों के मामले में पंजाब सबसे ऊपर है। यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑफ ड्रग्स एंड क्राइम यानी UNODC की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में अवैध तरीके से ड्रग्स ट्रैफिकिंग के लिए दो इलाके कुख्यात हैं। पहला- अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान, जबकि दूसरा है- म्यांमार, थाईलैंड और लाओस। इन दोनों इलाकों से दुनिया का ज्यादातर अफीम बेस्ड और दूसरे तरह के ड्रग्स की सप्लाई होती है। 2021 तक अफगानिस्तान अफीम का सबसे बड़ा उत्पादक देश था। अब म्यांमार सबसे ज्यादा अफीम पैदा करता है। UNODC का कहना है कि इन दोनों इलाकों के बीच में होने के चलते साउथ एशिया में खास तौर पर भारत ड्रग्स के अवैध इस्तेमाल से सबसे ज्यादा प्रभावित है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

red and white modern breaking news youtube thumbnail

श्रीलंका 142 रन से आगे: वेस्टइंडीज की पहली पारी में 499 रन, ग्रीव्स ने 180 रन बनाए, दूसरी पारी में श्रीलंका का स्कोर 92/2

red and white modern breaking news youtube thumbnail

श्रीलंका 142 रन से आगे: वेस्टइंडीज की पहली पारी में 499 रन, ग्रीव्स ने 180 रन बनाए, दूसरी पारी में श्रीलंका का स्कोर 92/2

red and white modern breaking news youtube thumbnail

खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान के बाद कोम पहुंचा:यहां से पूर्व सुप्रीम लीडर ने धार्मिक शिक्षा हासिल की; अंतिम यात्रा निकाली जाएगी

red and white modern breaking news youtube thumbnail

PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज दूसरा दिन:यहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे, ब्रह्मोस डील पर मुहर लगने की संभावना

red and white modern breaking news youtube thumbnail

रोनाल्डो की टीम पुर्तगाल फुटबॉल विश्व कप से बाहर: स्पेन को 1-0 से हराया, गोलकीपर सिमोन ने लगातार छठे मैच में नहीं खाया गोल

red and white modern breaking news youtube thumbnail

नर्स ने पति की ड्रिप में टॉयलेट क्लीनर डालकर मारा:तेलंगाना के निजामाबाद की घटना; छत से धक्का देकर नहीं मार पाई तो प्लान B अपनाया

Leave a Comment

// Function to get current page info for sharing const currentUrl = window.location.href; const pageTitle = document.title; // --- 1. Follow Your Official Pages --- // These links go directly to the URLs you provided // Instagram Follow document.getElementById('wpliteInstagramFollow').addEventListener('click', function() { const instaUrl = 'https://www.instagram.com/worldprime.news?igsh=N3I0azl5ZTd1b3U5&utm_source=qr'; window.open(instaUrl, '_blank'); }); // Facebook Follow document.getElementById('wpliteFacebookFollow').addEventListener('click', function() { const fbUrl = 'https://www.facebook.com/share/1ATWDHQiYR/?mibextid=wwXIfr'; window.open(fbUrl, '_blank'); }); // --- 2. Share Current Page to Others --- // These remain as "Sharing" functions // WhatsApp Share document.getElementById('wpliteWhatsAppShare').addEventListener('click', function() { const whatsappUrl = 'https://api.whatsapp.com/send?text=' + encodeURIComponent(pageTitle + " " + currentUrl); window.open(whatsappUrl, '_blank'); }); // Twitter Share document.getElementById('wpliteTwitterShare').addEventListener('click', function() { const twitterUrl = 'https://twitter.com/intent/tweet?url=' + encodeURIComponent(currentUrl) + '&text=' + encodeURIComponent(pageTitle); window.open(twitterUrl, '_blank'); }); // --- 3. Mobile Native Share (The Floating Button) --- document.getElementById("mobileShareFloatingButton").addEventListener("click", function (e) { e.preventDefault(); if (navigator.share) { navigator.share({ title: pageTitle, url: currentUrl }) .then(() => console.log("Share successful")) .catch(err => console.error("Share failed", err)); } else { alert("Native sharing not supported. Use the icons below!"); } });