क्या आपने गौर किया है कि जो स्मार्टफोन खरीदते वक्त सुपरफास्ट था, वह 2-3 साल बाद दम तोड़ने लगता है। बैटरी जवाब देने लगती है, एप हैंग होने लगते हैं और अंत में आप झुंझलाकर नया फोन खरीद लेते हैं। यूरोपीय संघ (ईयू) का मानना है कि यह सोची-समझी डिजाइन (प्लान्ड ऑब्सोलेसेंस) का नतीजा है। इसमें फोन को इतना असुविधाजनक बना दिया जाता है कि यूजर नया मॉडल खरीदने के लिए मजबूर हो जाता है। ईयू इस सिस्टम पर लगाम लगाने के प्रयास में है। उसकी जॉइंट रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट बताती है कि स्मार्टफोन हर 2-3 साल में बदले जाते हैं। क्या कंपनियां जानबूझकर आपका फोन धीमा करती हैं? 2017 में एपल इंक ने स्वीकार किया था कि वह पुराने आईफोन को जानबूझकर धीमा कर रहा था। कंपनी ने इसे ‘बैटरी प्रोटेक्शन’ कहा, लेकिन ग्राहकों के लिए यह अपग्रेड का गैर-वाजिब दबाव था। इसके बाद एपल को बैटरी हेल्थ इंडिकेटर जोड़ना पड़ा, पर असली समस्या जस की तस रही। ईयू के नए नियम क्या हैं और इससे स्मार्टफोन की लाइफ कैसे बढ़ेगी? यूरोपीय संघ फरवरी 2027 से ‘इकोडिजाइन’ के कड़े नियम लागू करेगा। इसके बाद कंपनियों की जवाबदेही तय हो जाएगी। नए नियमों को मुख्य रूप से चार कैटेगरी में बांटा जा सकता है। बैटरी लाइफ और क्षमता हर स्मार्टफोन बैटरी को कम से कम 800 चार्ज साइकल के बाद भी अपनी 80% क्षमता बनाए रखनी होगी। यानी सालों इस्तेमाल के बाद ?
जानबूझकर ‘स्लो’ किए जा रहे पुराने हैंडसेट, ताकि नए बिकें:यूरोप में सख्ती, कंपनियों को 7 साल तक सुनिश्चित करनी होगी स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई
By worldprime
On: अप्रैल 22, 2026 1:42 अपराह्न
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