देश की रिटेल महंगाई जून महीने में बढ़कर 2100% पर पहुंच गई है। जनवरी 22026 के बाद यह पहला मौका है जब महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 2104.38% के मिडपॉइंट टारगेट के पार निकल गई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने आज 13 जुलाई को ये आंकड़े जारी किए। 2026 की शुरुआत में महंगाई दर काफी कम थी। जनवरी में यह 2.74% के स्तर पर थी, जो जून तक बढ़ते हुए 4.38% पर पहुंच गई है। पिछले महीने यानी अप्रैल के मुकाबले मई में खुदरा महंगाई में 0.45% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन जून में बढ़कर 5.32% पर पहुंच गई है। मई में यह आंकड़ा 202% पर था। आलू और अदरक महंगे हुए, सोने-चांदी के गहने सस्ते इस साल रिटेल महंगाई का हाल महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। 4.38% महंगाई दर का क्या मतलब है? 1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल) जब हम कहते हैं कि जून 2026 में महंगाई 4.38% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जून 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.38% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं: 2. ₹100 की चीज अब ₹104.38 की हो गई इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जून 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान मई 2026 में ₹104.38 का हो गया है।
जून में महंगाई 4.38% पर पहुंची:17 महीने में पहली RBI के टारगेट के पार निकली, खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं
By worldprime
On: जुलाई 13, 2026 4:15 अपराह्न
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