सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती कर दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई है। एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा गया है। यूएस-इजराइल के साथ ईरान की जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों को 1123 रुपए प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था। घाटा कवर करने के लिए तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं। कटौती का असर 8 सवालों के जवाब से समझें… सवाल 1: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कितनी कटौती की है? जवाब: न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कमी की है, जिससे अब यह घटकर ₹3 प्रति लीटर रह गई है। वहीं, डीजल पर भी ₹10 की कटौती की गई है, जिससे अब डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी जीरो हो गई है। एक्साइज ड्यूटी कटौती से सरकार का हर दिन का राजस्व करीब 416 करोड़ रुपए घट जाएगा। सोर्स: खपत का डेटा पेट्रोलियम मंत्रालय की 6 मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट (FY 2025-953) के शुरुआती आंकड़ों पर आधारित है। सवाल 2: क्या कल से पेट्रोल-डीजल के दाम ₹10 कम हो जाएंगे? जवाब: नहीं, इसकी संभावना कम है। भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट सीधे सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और अपने मुनाफे के आधार पर रेट तय करती हैं। कंपनियां इस छूट का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेंगी। सवाल 3: तेल कंपनियां दाम क्यों नहीं घटाना चाहतीं? जवाब: पेट्रोलिमय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर का घाटा सह रही हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण तेल कंपनियां महंगा क्रूड खरीद रही थीं, लेकिन उन्होंने घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ाए थे। कंपनियां अब इस टैक्स कटौती का इस्तेमाल मार्जिन को स्थिर रखने में करेंगी। तेल कंपनियों के मुनाफे का गणित काफी पेचीदा होता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की विनिमय दर और सरकार के टैक्स ढांचे पर निर्भर करता है। इन कंपनियों के मुनाफे को समझने के लिए ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन देखा जाता है। यह वह राशि है जो तेल कंपनियां सारा खर्च (कच्चा तेल + रिफाइनिंग + ट्रांसपोर्ट) निकालने के बाद बचाती हैं। टोटल प्राइस = कॉस्ट प्राइस + रिफाइनरी मार्जिन + सेंट्रल टैक्स + स्टेट टैक्स + डीलर कमीशन + कंपनी प्रॉफिट क्रूड की कीमत बढ़ने से नुकसान में बदला कंपनियों का मुनाफा आमतौर पर एक थंब-रूल है। कच्चा तेल 1 डॉलर प्रति बैरल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल/डीजल की लागत लगभग 50 से 60 पैसे प्रति लीटर बढ़ जाती है। अगर तेल 70 डॉलर से बढ़कर 53 डॉलर हो गया यानी 30 डॉलर की बढ़ोतरी, तो लागत करीब ₹15 से ₹18 प्रति लीटर बढ़ जाएगी। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल की कीमत 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी तो वित्त वर्ष 2026 में तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल पर करीब 8 रुपए का मार्जिन मिलने की उम्मीद थी। खर्च निकालने के बाद यह बचत करीब 3 रुपए रह जाती। अब जब कीमतें कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं तो जो ₹33 का मुनाफा कंपनियां कमा रही थीं, वह अब खत्म हो सकता है या यह फायदा नुकसान में बदल सकता है। इंडियन ऑयल को पहले 6 महीने में ₹13,299 करोड़ का फायदा हुआ था इंडियन ऑयल को H1 25-26 यानी, अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 के बीच ₹13,111.723 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पिछले साल (H1 24-25) कंपनी का मुनाफा सिर्फ ₹25,23 करोड़ था। यानी मुनाफे लगभग 2112% बढ़ गया था। रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन बढ़ने की वजह से ये मुनाफा हुआ था। यानी, इंडियन ऑयल ने साल के पहले 295 महीनों में जो “बंपर कमाई” की है, वह अब अगले 25 महीनों में सरकारी मदद के बाद भी महंगे कच्चे तेल की वजह से धीरे-धीरे कम हो सकती है। सवाल 23. प्राइवेट कंपनियां क्या रुख अपना रही हैं? जवाब: प्राइवेट प्लेयर पहले ही दबाव में हैं। सरकार के इस फैसले से ठीक एक दिन पहले ही नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹94.883 प्रति लीटर और डीजल ₹294.88 महंगा कर दिया था। अब भोपाल में इस कंपनी का पेट्रोल 25.30 रुपए और डीजल 27 रुपए पर पहुंच गया है।। इससे साफ है कि प्राइवेट प्लेयर्स के लिए मौजूदा रेट पर तेल बेचना मुश्किल हो रहा है। सवाल 5: क्या भविष्य में दाम और बढ़ सकते हैं? जवाब: यह पूरी तरह से ग्लोबल मार्केट पर निर्भर है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। अगर वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ता है और सप्लाई चेन बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती केवल एक ‘कुशन’ का काम करेगी ताकि कीमतें बहुत ज्यादा न बढ़ें। सवाल 6: इस कटौती से सरकार को क्या नुकसान होगा? जवाब: एक्साइज ड्यूटी कम करने से केंद्र सरकार के राजस्व में कमी आएगी। पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए ‘शॉक’ का पूरा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े और उन्हें महंगाई से बचाया जा सके। सवाल: 7 क्या राज्य सरकारें भी अब वैट (VAT) कम करेंगी?
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटी:दाम नहीं बढ़ेंगे; कच्चा तेल महंगा होने से कंपनियों को ₹30 प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था
By worldprime
On: मार्च 27, 2026 8:56 पूर्वाह्न
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