‘NEET ही नहीं, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से ली गई UGC-NET परीक्षा में भी पेपर लीक हुए। हम हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET), एडीए और CSIR-NET पेपर लीक का खुलासा करने के बहुत करीब पहुंच गए थे। हमारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रमुख अभिजीत दीपके से बात हो गई थी। यह मामला प्रॉपर तरीके से हाईलाइट करना था लेकिन उससे पहले ही हमारी धरपकड़ शुरू हो गई। मेरी पत्नी, भाई-बहन, पिता और ससुर को इल्लीगल तरीके से पुलिस ने डिटेन कर लिया। ऐसे हालात में मुझे मजबूरन अंडर ग्राउंड होना पड़ा।’ ये दावा है कि हरियाणा में रोहतक के रहने वाले एडवोकेट दीपक धनखड़ का। धनखड़ कई दिन से अंडरग्राउंड हैं। उनकी दैनिक भास्कर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात हुई। दरअसल, दीपक ने 6 जुलाई को 100 पन्नों की एक PDF सोशल मीडिया पर जारी की और दावा किया कि ये NTA के UGC-NET के सोशियोलॉजी सब्जेक्ट की पेपर सेटिंग फाइल है, जो कॉन्फिडेंशियल कैटेगरी में आती है। सोशियोलॉजी का NET एग्जाम 30 जून को हुआ। दीपक का दावा है कि 29 जून को ही पेपर-लीक माफिया ने रोहतक के एक फ्लैट पर जो सवाल पैसा देने वाले अभ्यर्थियों को रटवाए, वो अगले दिन एग्जाम में हुबहू आए। दीपक धनखड़ के इसी दावे को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 8 जुलाई को अपने ऑफिशियल ‘X’ हैंडल से पोस्ट किया। राहुल ने लिखा- पिछले सप्ताह हुई यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर गंभीर आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं। अब जानिए…दीपक धनखड़ ने भास्कर इंटरव्यू में क्या–क्या दावे किए पेपर लीक माफिया से अंकित ने संपर्क कराया दीपक ने बताया कि मैं 10 साल से स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में हूं। आम आदमी पार्टी की स्टूडेंट इकाई एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स का हरियाणा अध्यक्ष हूं। CM के सामने परचे फेंकने, BJP दफ्तर घेरने और बेरोजगारी का मुद्दा उठाने के कारण मुझ पर 83 केस दर्ज हैं। मैं NEET पेपर लीक मामले पर दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरने में गया। वहां CJP प्रमुख अभिजीत दीपके का मंच संचालित किया। एक कॉमन फ्रेंड के जरिये अंकित जी मुलाकात हुई थी। अंकित चरखी-दादरी के हैं। अंकित ने ही बताया कि कुछ लोग उनके संपर्क में हैं जो सरकारी नौकरी की भर्ती के पेपर लीक कराने का दावा करते हैं। अंकित के मोबाइल में संजीत नाम से एक नंबर सेव था। 20 जून को ही संजीत से फोन पर बात हुई तो उसने कहा कि 22 जून से शुरू हो रही UGC-NET परीक्षा का पेपर उपलब्ध करवा सकता है। तभी हमने तय कर लिया कि इस मामले को अच्छे से एक्सपोज करेंगे। बिहार से 7-8 लोगों की टीम रोहतक आई, क्लास ली दीपक के अनुसार, अंकित ने ही इस कथित पेपर–लीक माफिया से टाई-अप किया। इसके बाद 21-22 जून और 28-29 जून की रात 7-1003 लोगों की टीम रोहतक आई। ये लोग शायद बिहार के थे। इनमें से दो के नाम संतोष और मनोज थे। मनोज ने बताया था कि वह पेपर लीक मामले में जेल काट चुका है। बिहार से आए इन लोगों ने एक बार रोहतक में IMT चौक स्थित फ्लैट और एक बार मकड़ौली टोल प्लाजा के पास एक फार्म हाउस पर पेपरों का सौदा करने वाले युवाओं की क्लास ली। ये लोग पेन ड्राइव में पेपर लाते थे। कमरे पर ही पीडीएफ से प्रिंटआउट निकाला। पहली बार लॉ और ज्योग्राफी सब्जेक्ट के 20-22 अभ्यर्थी आए। इनमें हरियाणा के अलावा राजस्थान, दिल्ली, बिहार के भी लोग थे। इनकी सेटिंग गिरोह ने खुद की थी। हमने सिर्फ उन्हें पेपर की तैयारी कराने की लोकेशन दी। मैं भी हर बार अंकित के साथ मौके पर था। वहां कोई फोन अलाउड नहीं था, पूरी तलाशी ली जाती थी। पहली बार जो पेपर तैयार करवाया…वो सवाल नहीं आए दीपक के अनुसार 21 जून की रात को इन लोगों ने अभ्यर्थियों को जो सवाल रटवाए, उसके बाद सभी से प्रिंटआउट वापस ले लिए और उन्हें वाटर बकेट में तब तक डाले रखा, जब तक वो पूरी तरह गल नहीं गए। फिर टॉयलेट में फ्लश कर दिया। हमने अगले दिन पता किया तो सामने आया कि जो सवाल रटवाए थे, वो अगले दिन पेपर में आए ही नहीं। हमें लगा ये पेपर लीक कराने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह है। फिर भी गिरोह के संपर्क में रहे। दूसरी बार जो सवाल बताए, वो अगले दिन आए दीपक के मुताबिक 24-25 जून की रात को फिर गिरोह के सदस्य पेन ड्राइव में पेपर लेकर पहुंचे। इस बार 26-27 अभ्यर्थी थे। इसी बीच पेन ड्राइव और लैपटॉप संभाल रहा गिरोह का एक सदस्य सो गया। हमने मौका पाकर एक पीडीएफ खुद को शेयर कर ली। इसमें सोशियोलॉजी के सवाल थे। 28 सवाल एकदम स्पष्ट थे, जबकि 28 ब्लर थे। अगले दिन हमने चेक किया तो पता चला सोशियोलॉजी का जो पेपर इन लोगों ने रटवाया वो अगले दिन हुबहू आया। इस पूरे मामले में सबूत के तौर पर सोशियोलॉजी के पेपर के यही पीडीएफ है। पेपर होने के बाद दूसरे दिन करनी थी पेमेंट दीपक के मुताबिक–सौदा यह था कि जिन अभ्यर्थियों से सेटिंग है, उनसे प्रत्येक से सवा दो लाख रुपए लिए जाने थे। शर्त ये थी कि पेपर होने के बाद ही पैसे दिए जाएंगे। हमें कहा गया था कि 903 जून को नेट का पेपर होने के बाद 290 जुलाई तक पेमेंट करनी होगी। इसके लिए रिषीराज कुमार के नाम का एक खाता नंबर और IFSC कोड (UBIN22.25) दिया था। यह IFSC कोड यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की आरा ब्रांच (बिहार) का है। धनखड़ ने कागज पर हाथ से लिखा नंबर दिखाते हुए कहा कि हमारी तरफ से कोई ट्रांजेक्शन नहीं की गई। दीपक ने कागज के टुकड़े पर लिखे 22.25 मोबाइल नंबर भी दिखाए। इनमें 72578-02***, 77059-82***, 96934-58***, 2.8-48*** व 98305-579***। इसी पर्ची पर डब्ल्यूटी पुरनोई, संतोष और मनोज के नाम लिखे हैं। अब वो सवाल, जो एचटीईटी और परिवार से जुड़े थे… सवाल: एचटेट-एडीए पेपर लीक का खुलासा करना चाहते थे? दीपक: गिरोह ने दावा किया था कि वे 4-5 जुलाई को होने वाले हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) और सरकारी वकील के लिए एडीए का पेपर भी लीक करवाएंगे। हमने किसी तरह गिरोह को यह कहकर टालने की कोशिश की कि यूजीसी-नेट पेपर की पेमेंट भी एचटेट के बाद कर देंगे, लेकिन वो नहीं माने। सवाल: अंडरग्राउंड क्यों हुए? दीपक: एक जुलाई को इंडियन नेशनल स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (इनसो) से जुड़े एक छात्र नेता ने मुझे बताया कि पुलिस की टीम तुम्हारे बारे में पता कर रही है। फिर कुछ और सोर्सेज से भी इसका पता चला। इसके बाद ही मैं अंडरग्राउंड हो गया। सवाल: क्या परिवार के सदस्यों को इल्लीगल डिटेन किया? दीपक : मेरी तलाश में पुलिस ने मेरे भाई, पत्नी, पिता, ससुर व बहन को डिटेन कर लिया था। भाई प्रदीप धनखड़ नर्सिंग ऑफिसर है और सुनारिया जेल में ड्यूटी है। बहन रेखा सोनीपत डीसी ऑफिस में क्लर्क है। इनकी सरकारी ड्यूटी का रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से चेक करवा सकते हैं। इसी वजह से मैंने 6 जुलाई को सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर की। ये वायरल होने के बाद ही मेरे परिवार को छोड़ दिया गया। सवाल: राहुल गांधी की टीम से कैसे संपर्क किया? दीपक : 7 जुलाई को राहुल गांधी की टीम से मैंने ही किसी तरह संपर्क किया और यह मामला उठाने को कहा। टीम ने मुझसे सबूत मांगे। मैंने उपलब्ध जानकारियां उन्हें दी। उनकी टीम ने कहा-हम पहले चेक करेंगे। फिर 8 जुलाई को पोस्ट डाली। सवाल: अब मामले में सरकार से क्या चाहते है? दीपक : मैं लगातार लोकेशन बदल रहा हूं। चाहता हूं कि CBI इस मामले की जांच करे। फॉरेंसिक जांच हो। पूरी NTA की जांच हो। जो प्रोफेसर पेपर सेटर हैं, उनकी भी जांच हो। एक बार केस रजिस्टर्ड किया जाए, फिर मैं सारे सबूतों के साथ सामने आऊंगा। हमारे सामने पेपर हल करवाया गया। हम आई-विटनेस हैं। अंकित भी मेरे साथ है। अगर, हम झूठ बोल रहे हैं तो हमारे खिलाफ भी कार्रवाई हो। इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए या सीमित जानकारी दी सवाल: अंकित कौन है, उससे कैसे मुलाकात हुई? दीपक : कॉमन फ्रेंड के जरिये मुलाकात हुई। वो बीटेक पासआउट है। चरखी दादरी का है लेकिन किसी छात्र संगठन से नहीं जुड़ा। एक्टिविस्ट भी नहीं है। सवाल: धमकी नहीं मिली, फिर अंडरग्राउंड क्यों हुए? दीपक : किसी से धमकी तो नहीं मिली। पुलिस ने सीधा कॉन्टेक्ट भी नहीं किया। यही डर है कि कहीं पुलिस बगैर एफआईआर के इल्लीगली न उठा ले। सवाल: आप खुद एडवोकेट हैं। परिवार को इल्लीगल डिटेन किया, तो इसकी कहीं शिकायत क्यों नहीं की?
पेपरलीक कांड में अंडरग्राउंड हरियाणवी एडवोकेट का इंटरव्यू,VIDEO:दावा– बिहार का गैंग पेनड्राइव में लाया NET पेपर, रोहतक में 2 जगह सवाल रटवाए
By worldprime
On: जुलाई 10, 2026 5:00 पूर्वाह्न
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