आज की तेज और प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं मिलती बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसी मानसिक मजबूती के लिए खेल की दुनिया में एक दिलचस्प तरीका सामने आया है- ‘ऑल्टर ईगो’, यानी खुद को कुछ समय के लिए किसी और के रूप में देखना और उसी तरह व्यवहार करना। एनबीए के स्टार खिलाड़ी शाई गिलगियस-अलेक्जेंडर की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। जब वे 13 साल के थे, तब उनकी सबसे बड़ी बेटी ने उन्हें अपने घर में ही छोड़ दिया था। समस्या थी उनकी कम हाइट. करीब 5 फुट 6 इंच के इस खिलाड़ी को उनके कोच ने एक अनोखी सलाह दी कि खुद को स्टार एलन आइवर्सन की तरह सोचो और खेलो. शुरुआत में यह सिर्फ खेल जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी ताकत बन गया। उन्होंने डरना छोड़ दिया और आत्मविश्वास के साथ खेलना शुरू किया। न भी इसे सही ठहराता है। मनोवैज्ञानिकों ने एक प्रयोग में बच्चों को अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहा। कुछ बच्चों ने खुद के बारे में सोचा, कुछ ने अपने नाम से और कुछ बच्चों को बैटमैन या डोरा बनने का मौका दिया गया। नतीजा चौंकाने वाला था, जो बच्चे किरदार में थे, उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत की। दरअसल, जब हम खुद से दूरी बनाकर किसी और की तरह आज की तेज और प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसी मानसिक मजबूती के लिए खेल की दुनिया में एक दिलचस्प तरीका सामने आया है- ‘ऑल्टर ईगो’, यानी खुद को कुछ समय के लिए किसी और के रूप में देखना और उसी तरह व्यवहार करना। यह तरीका न सिर्फ खिलाड़ियों, बल्कि आम लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। एनबीए के स्टार खिलाड़ी शाई गिलगेयस-अलेक्जेंडर की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। जब वे 13 साल के थे, तब उनकी सबसे बड़ी समस्या थी उनकी कम हाइट। करीब 5 फुट 6 इंच के इस खिलाड़ी को उनके कोच ने एक अनोखी सलाह दी कि खुद को स्टार एलन आइवरसन की तरह सोचो और खेलो। शुरुआत में यह सिर्फ एक खेल जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी ताकत बन गया। उन्होंने डरना छोड़ दिया और आत्मविश्वास के साथ खेलना शुरू किया। यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि विज्ञान भी इसे सही ठहराता है। मनोवैज्ञानिकों ने एक प्रयोग में बच्चों को अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहा। कुछ बच्चों ने खुद के बारे में सोचा, कुछ ने अपने नाम से खुद को देखा, और कुछ बच्चों को बैटमैन या डोरा बनने का मौका दिया गया। नतीजा चौंकाने वाला था, जो बच्चे किरदार में थे, उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत की। इस प्रयोग को ‘बैटमैन इफेक्ट’ कहा गया। दरअसल, जब हम खुद से दूरी बनाकर किसी और की तरह स आज की तेज और प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसी मानसिक मजबूती के लिए खेल की दुनिया में एक दिलचस्प तरीका सामने आया है- ‘ऑल्टर ईगो’, यानी खुद को कुछ समय के लिए किसी और के रूप में देखना और उसी तरह व्यवहार करना। यह तरीका न सिर्फ खिलाड़ियों, बल्कि आम लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। एनबीए के स्टार खिलाड़ी शाई गिलगेयस-अलेक्जेंडर की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। जब वे 13 साल के थे, तब उनकी सबसे बड़ी समस्या थी उनकी कम हाइट। करीब 5 फुट 6 इंच के इस खिलाड़ी को उनके कोच ने एक अनोखी सलाह दी कि खुद को स्टार एलन आइवरसन की तरह सोचो और खेलो। शुरुआत में यह सिर्फ एक खेल जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी ताकत बन गया। उन्होंने डरना छोड़ दिया और आत्मविश्वास के साथ खेलना शुरू किया। यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि विज्ञान भी इसे सही ठहराता है। मनोवैज्ञानिकों ने एक प्रयोग में बच्चों को अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहा। कुछ बच्चों ने खुद के बारे में सोचा, कुछ ने अपने नाम से खुद को देखा, और कुछ बच्चों को बैटमैन या डोरा बनने का मौका दिया गया। नतीजा चौंकाने वाला था, जो बच्चे किरदार में थे, उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत की। इस प्रयोग को ‘बैटमैन इफेक्ट’ कहा गया। दरअसल, जब हम खुद से दूरी बनाकर किसी और की तरह स
‘बैटमैन इफेक्ट’ से प्रदर्शन सुधार रहे खिलाड़ी:खुद को सुपरहीरो जैसा मानते हैं तो नतीजे बेहतर; सफलता के लिए अपनाएं ‘ऑल्टर ईगो’
By worldprime
On: मई 7, 2026 2:01 अपराह्न
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